Abbas Ansari: मुख्तार अंसारी की याद में बेटे अब्बास का छलका दर्द, सोशल मीडिया पर लिखा इमोशनल मैसेज

मऊ सदर विधायक अब्बास अंसारी ने अपने दिवंगत पिता मुख्तार अंसारी के जन्मदिन पर एक भावुक फेसबुक पोस्ट साझा किया है। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद अपने पहले बड़े सार्वजनिक संदेश में अब्बास ने पिता को 'शहीद' बताते हुए याद किया। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

Abbas Ansari

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जनवरी 25, 2026

Abbas Ansari: मऊ सदर से विधायक अब्बास अंसारी ने अपने दिवंगत पिता और पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी के ‘यौम-ए-पैदाइश’ (जन्मदिन) के अवसर पर सोशल मीडिया पर एक अत्यंत भावुक पोस्ट साझा किया है। रविवार, 25 जनवरी 2026 को किए गए इस फेसबुक पोस्ट में अब्बास ने अपने पिता को ‘शहीद’ बताते हुए उनके प्रति अपनी संवेदनाएं और यादें व्यक्त की हैं। सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिलने और विधायकी बहाल होने के बाद, अब्बास अंसारी का यह सार्वजनिक संदेश अब तेजी से वायरल हो रहा है।

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अब्बास अंसारी का सोशल मीडिया पोस्ट और पिता के प्रति भावुकता

बताते चले कि, अब्बास अंसारी ने अपने पिता को याद करते हुए लिखा कि आज उनके पिता का जन्मदिन है, लेकिन उनके न होने से जीवन में एक खालीपन है। उन्होंने लिखा, “अब्बा, आप मेरी ज़िंदगी की वो रोशनी हैं जिसने अंधेरों में भी रास्ता दिखाया। आपका साया उठ गया, मगर आपकी यादें दिल के हर कोने में आबाद हैं।” अब्बास ने अपनी पोस्ट में इस बात का भी जिक्र किया कि उन्हें अपने पिता की कमी बहुत खल रही है और वे उनकी आवाज सुनने के लिए बेकरार हैं।

मुख्तार अंसारी को ‘शहीद’ बताकर दी जन्मदिन की मुबारकबाद

इस पोस्ट का सबसे चर्चा का विषय मुख्तार अंसारी को ‘शहीद’ संबोधित करना रहा। अब्बास ने लिखा कि कुरान-ए-पाक में उल्लेख है कि ‘शहीद कभी मरते नहीं’, इसलिए वे उनके जन्मदिन पर उन्हें मुबारकबाद पेश करते हैं। उन्होंने अल्लाह से अपने पिता के लिए जन्नत-उल-फिरदौस में आला मुकाम और परिवार के लिए सब्र-ए-जमील की दुआ मांगी। समर्थकों के बीच यह पोस्ट गहरी संवेदनाओं के साथ साझा की जा रही है।

अब्बास अंसारी की कानूनी लड़ाई और विधायकी की बहाली

गौरतलब है कि अब्बास अंसारी पिछले काफी समय से कानूनी मुश्किलों का सामना कर रहे थे। हाल ही में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से कड़ी शर्तों के साथ नियमित जमानत मिली है। इससे पहले कानूनी पचड़ों के कारण उनकी विधायकी रद्द कर दी गई थी, जो शीर्ष अदालत से राहत मिलने के बाद पुनः बहाल हो गई है। जेल से बाहर आने के बाद अब्बास ने मीडिया से दूरी बना रखी थी, लेकिन पिता के जन्मदिन पर उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपनी चुप्पी तोड़ी है।

मऊ की सियासत में मुख्तार अंसारी का पांच दशक का दबदबा

मुख्तार अंसारी का मऊ की राजनीति में निर्विवाद प्रभाव रहा है। 1996 में पहली बार बसपा के टिकट पर मऊ सदर से विधायक बनने के बाद, उन्होंने 2002 और 2007 में निर्दलीय चुनाव जीता। इसके बाद अपनी पार्टी ‘कौमी एकता दल’ बनाई और 2012 व 2017 में भी जीत दर्ज की। विभिन्न आपराधिक मुकदमों और गैंगस्टर एक्ट के तहत वे लंबे समय तक जेल में रहे, जहां 28 मार्च 2024 को हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया था। वर्तमान में उनकी राजनीतिक विरासत को उनके बेटे अब्बास अंसारी मऊ सदर सीट से आगे बढ़ा रहे हैं।

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