AAP vs BJP: राघव चड्ढा समेत AAP के 7 सांसद अब BJP के! राज्यसभा की मुहर के बाद सरकार का पहला रिएक्शन आया सामने

आम आदमी पार्टी को राज्यसभा में उस वक्त बड़ा झटका लगा जब राघव चड्ढा और हरभजन सिंह समेत 7 बागी सांसदों के भाजपा में विलय को राज्यसभा सचिवालय ने मंजूरी दे दी। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इन सांसदों का एनडीए में स्वागत किया, वहीं संजय सिंह ने इसे जनता के साथ विश्वासघात बताते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 27, 2026

AAP vs BJP: भारतीय राजनीति के गलियारों में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। आम आदमी पार्टी (AAP) के सात बागी राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के प्रस्ताव को राज्यसभा सचिवालय ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया है। इस फैसले के साथ ही उच्च सदन में समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।

राज्यसभा सचिवालय की अधिसूचना

बताते चले कि, राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी के सात सांसदों—राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, संजीव अरोड़ा (राजिंदर गुप्ता) और विक्रमजीत सिंह साहनी—के भाजपा में विलय को हरी झंडी दे दी है। सचिवालय द्वारा जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, अब ये सभी सात नेता भाजपा संसदीय दल के अभिन्न सदस्य माने जाएंगे। इस निर्णय के बाद तकनीकी रूप से इन सांसदों पर ‘दल-बदल विरोधी कानून’ लागू नहीं होगा, क्योंकि पार्टी के दो-तिहाई से अधिक सांसदों ने एक साथ पाला बदला है।

केंद्र सरकार की ओर से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया

आपको बता दे कि, इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर केंद्र सरकार की ओर से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सांसदों का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उनके विश्वास की सराहना की। रिजिजू ने लिखा कि इन सांसदों का आचरण हमेशा शालीन और संसदीय रहा है। उन्होंने विपक्षी गठबंधन पर तंज कसते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ एनडीए में इन नेताओं का स्वागत है और ‘टुकड़े-टुकड़े’ इंडी गठबंधन को अब विदा लेने का समय आ गया है।

संजय सिंह की अयोग्यता याचिका

दूसरी ओर, इस टूट से आहत आम आदमी पार्टी ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। आप सांसद संजय सिंह ने राज्यसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर इन सभी सातों सांसदों को ‘अयोग्य’ घोषित करने की मांग की थी। उन्होंने तर्क दिया कि यह कदम सीधे तौर पर दल-बदल (Defection) है और पंजाब की जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात है। पार्टी का कहना है कि वे इस असंवैधानिक विलय के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने और कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं।

उच्च सदन में ‘आप’ की घटती ताकत

इस विलय के बाद राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की ताकत काफी कम हो गई है। अब सदन में ‘आप’ के केवल तीन सांसद—संजय सिंह, एनडी गुप्ता और बलबीर सिंह सीचेवाल—ही शेष रह गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस टूट का असर न केवल दिल्ली की राजनीति पर पड़ेगा, बल्कि पंजाब में भी पार्टी के सांगठनिक ढांचे को बड़ा धक्का लगा है। भाजपा के लिए यह विलय राज्यसभा में अपनी संख्या बल को मजबूत करने और विपक्षी खेमे को कमजोर करने की एक बड़ी रणनीतिक जीत मानी जा रही है।

भारतीय संविधान और दल-बदल कानून की नई व्याख्या

यह घटनाक्रम एक बार फिर भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) को चर्चा के केंद्र में ले आया है। जहां भाजपा इसे ‘स्वैच्छिक विलय’ और राष्ट्रहित में लिया गया फैसला बता रही है, वहीं आम आदमी पार्टी इसे लोकतंत्र की हत्या करार दे रही है। आने वाले दिनों में यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच सकता है, जिससे भारतीय राजनीति में ‘विलय बनाम दलबदल’ की परिभाषा और स्पष्ट होगी।