Raghav Chadha News: आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए राजनीतिक गलियारों से एक बेहद परेशान करने वाली खबर सामने आई है। राज्यसभा सचिवालय ने राघव चड्ढा सहित पार्टी के सभी सात बागी सांसदों को आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सदस्यों के रूप में मान्यता दे दी है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद उच्च सदन में न केवल शक्ति संतुलन बदल गया है, बल्कि अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली पार्टी का संख्या बल भी काफी कम हो गया है।
सदन में भाजपा का बढ़ता कुनबा
बताते चले कि, राज्यसभा सचिवालय द्वारा जारी हालिया नोटिफिकेशन ने ‘आप’ के उन सात सांसदों के भाग्य का फैसला कर दिया है जिन्होंने अपनी पुरानी पार्टी का साथ छोड़ दिया था। सचिवालय की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, अब ये सभी सांसद उच्च सदन में भारतीय जनता पार्टी का अभिन्न हिस्सा माने जाएंगे। इस घटनाक्रम के बाद राज्यसभा में भाजपा के सदस्यों की कुल संख्या बढ़कर 113 हो गई है, जिससे सदन की कार्यवाही में सत्तापक्ष की स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत नजर आ रही है।
सभापति को संजय सिंह का पत्र
इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बीच, आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने उपराष्ट्रपति और सभापति सीपी राधाकृष्णन को एक कड़ा शिकायती पत्र लिखा था। इस पत्राचार के जरिए उन्होंने मांग की थी कि पाला बदलने वाले सांसदों को संविधान की दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) के तहत अयोग्य घोषित किया जाए। संजय सिंह ने इसे पंजाब के जनादेश और भारतीय लोकतंत्र के साथ सरासर विश्वासघात करार दिया था। उन्होंने संकेत दिए थे कि पार्टी इस “अन्याय” के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने और कानूनी कार्रवाई शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
उच्च सदन में आप का गिरता ग्राफ
पार्टी में मचे इस घमासान की नींव शुक्रवार को रखी गई थी, जब राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल जैसे प्रमुख चेहरों ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी से अलग होने का ऐलान किया था। उनके साथ हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रम साहनी और राजिंदर गुप्ता जैसे राज्यसभा सदस्यों ने भी भगवा खेमे में जाने का फैसला किया। सचिवालय के इस ताजा निर्णय के बाद अब राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के पास मात्र तीन सांसद बचे हैं। उल्लेखनीय है कि पार्टी छोड़ने वाले 7 में से 6 सांसद पंजाब से प्रतिनिधित्व करते थे, जिससे पंजाब की राजनीति में भी बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।
आम आदमी पार्टी की मांग खारिज
सचिवालय द्वारा जारी इस गजट नोटिफिकेशन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि संजय सिंह और ‘आप’ की आपत्तियों को फिलहाल दरकिनार कर दिया गया है। संसदीय नियमों और दल-बदल से जुड़े तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इन सात सांसदों को भाजपा सदस्य मान लिया गया है। अब उच्च सदन में बैठने की व्यवस्था से लेकर मतदान की प्रक्रियाओं तक, ये सभी नेता भाजपा के व्हिप और दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे। ‘आप’ के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती अपने बचे हुए कैडर को एकजुट रखने और इस कानूनी लड़ाई को तार्किक अंत तक पहुंचाने की होगी।









