राजीव गांधी का नाम पटियाला लॉ यूनिवर्सिटी से हटाने का प्रस्ताव, अकादमिक काउंसिल ने किया पारित

 पटियाला पंजाब के पटियाला स्थित राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ की अकादमिक काउंसिल ने विश्वविद्यालय के नाम से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम हटाने की सिफारिश की है. प्रस्ताव के अनुसार, विश्वविद्यालय का नया नाम केवल “नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी” रखा जा सकता है. इस फैसले की पुष्टि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जयशंकर सिंह ने की है.  उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव अकादमिक काउंसिल में पारित हो चुका है और अब इसे कार्यकारी परिषद तथा पंजाब सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. अंतिम फैसला पंजाब सरकार का होगा. इस फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है. पटियाला

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Published On :

फ़रवरी 28, 2026

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 पटियाला

पंजाब के पटियाला स्थित राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ की अकादमिक काउंसिल ने विश्वविद्यालय के नाम से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम हटाने की सिफारिश की है. प्रस्ताव के अनुसार, विश्वविद्यालय का नया नाम केवल “नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी” रखा जा सकता है. इस फैसले की पुष्टि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जयशंकर सिंह ने की है. 

उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव अकादमिक काउंसिल में पारित हो चुका है और अब इसे कार्यकारी परिषद तथा पंजाब सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. अंतिम फैसला पंजाब सरकार का होगा.

इस फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है. पटियाला से कांग्रेस सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी ने इसका विरोध किया है. उनका कहना है कि यह कदम चुनावों से पहले राजनीतिक ध्रुवीकरण की कोशिश हो सकती है. 

उन्होंने आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा पर ऐसे मुद्दे उठा कर राजनीतिक लाभ कमाने का आरोप लगाया. सांसद ने यह भी कहा कि देश में संस्थानों के नाम बदलने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिससे हमारी ऐतिहासिक विरासत प्रभावित हो रही है.

नाम बदलने की मांग पहली बार नहीं उठी है. नवंबर 2024 में अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने भी केंद्र सरकार से इस विश्वविद्यालय का नाम बदलने की मांग की थी. उनका तर्क था कि 1984 के सिख विरोधी दंगों की पृष्ठभूमि में राजीव गांधी का नाम सिख समुदाय की भावनाओं को आहत करता है.

यह विश्वविद्यालय साल 2006 में पंजाब सरकार द्वारा बनाए गए एक अधिनियम के तहत स्थापित किया गया था. अब सभी की निगाहें पंजाब सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हैं कि वह इस सिफारिश को स्वीकार करती है या नहीं.

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