यादों को गहनों में संजोने का नया ट्रेंड, पंजाब में DNA ज्वेलरी की बढ़ी मांग

जालंधर. पंजाब में अब रिश्तों और यादों को सहेजने का तरीका बदल रहा है। सोने-चांदी की पारंपरिक ज्वेलरी की जगह अब लोग डीएनए ज्वेलरी को तवज्जो दे रहे हैं। खास बात यह है कि इस ज्वेलरी में अपनों के खून, बाल या दूध के नमूने को ब्लू रेजिन में प्रिजर्व कर लाकेट, अंगूठी और ब्रेसलेट तैयार किए जा रहे हैं। जालंधर के सर्राफा बाजार के ज्वेलर्स की मानें तो बीते 6-8 महीनों में डीएनए ज्वेलरी के आर्डर में व्यापक स्तर पर इजाफा हुआ है। नवजात के जन्म, शादी की सालगिरह, माता-पिता की याद या किसी अपने के बिछड़ने पर लोग

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Published On :

जून 4, 2026

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जालंधर.

पंजाब में अब रिश्तों और यादों को सहेजने का तरीका बदल रहा है। सोने-चांदी की पारंपरिक ज्वेलरी की जगह अब लोग डीएनए ज्वेलरी को तवज्जो दे रहे हैं। खास बात यह है कि इस ज्वेलरी में अपनों के खून, बाल या दूध के नमूने को ब्लू रेजिन में प्रिजर्व कर लाकेट, अंगूठी और ब्रेसलेट तैयार किए जा रहे हैं।

जालंधर के सर्राफा बाजार के ज्वेलर्स की मानें तो बीते 6-8 महीनों में डीएनए ज्वेलरी के आर्डर में व्यापक स्तर पर इजाफा हुआ है। नवजात के जन्म, शादी की सालगिरह, माता-पिता की याद या किसी अपने के बिछड़ने पर लोग भावनात्मक जुड़ाव के लिए ऐसी ज्वेलरी बनवा रहे हैं। एक ग्राहक ने तो अपने दिवंगत पिता के खून की बूंद को लाकेट में हमेशा के लिए सहेज लिया है। फिलहाल जालंधर के अलावा लुधियाना और अमृतसर में भी कुछ चुनिंदा ज्वेलर्स ने यह काम शुरू किया है। कारोबारियों को उम्मीद है कि आने वाले त्योहारी सीजन में डीएनए ज्वेलरी की मांग और बढ़ेगी।

ऐसे तैयार होती है डीएनए ज्वेलरी
स्वर्णकार संघ जालंधर के अध्यक्ष दीपक निश्चल ने बताया कि ग्राहक से खून का नमूना लिया जाता है। खून को जमने से बचाने के लिए खास ईडीटीए ट्यूब में रसायनों से ट्रीट किया जाता है। इसके बाद ब्लू रेजिन में उस नमूने को डालकर हाई टेम्प्रेचर पर प्रिजर्व किया जाता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक है और नमूना खराब नहीं होता। तैयार जेम को सोने या चांदी की बेस ज्वेलरी में फिट कर दिया जाता है। एक लाकेट तैयार करने में 7 से 10 दिन का समय लगता है। कीमत 8 हजार रुपये से शुरू होकर डिजाइन के हिसाब से तय की है।

युवाओं में भारी क्रेज
सराफा बाजार के कारोबारी केशव ज्वेलर्स के मालिक वरुण चोपड़ा का कहना है कि पहले लोग फोटो फ्रेम या टैटू से यादों को सहेजते थे, लेकिन अब डीएनए ज्वेलरी नया ट्रेंड बन गया है। खासकर 25 से 40 साल के युवा वर्ग में इसे लेकर क्रेज देखा जा रहा है। कई एनआरआई परिवार भी विदेश से फोन कर आर्डर बुक करवा रहे हैं। डा. मुनीष मेहता के मुताबिक रेजिन में प्रिजर्व करने के बाद डीएनए का नमूना दशकों तक सुरक्षित रहता है। हालांकि ज्वेलर्स को नमूना लेते समय हाइजीन और मेडिकल प्रोटोकाल का पूरा ध्यान रखना जरूरी होता है। लिहाजा, स्वास्थ्य संबंधी नियमों की पालना करने के बाद इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

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