राजधानी की सड़कों पर स्मार्ट रोशनी का नया दौर, कंट्रोल सेंटर से होगी स्ट्रीटलाइटों की निगरानी

नई दिल्ली  दिल्ली की सड़कों पर जल्द ही स्मार्ट तकनीक आधारित स्ट्रीटलाइटें लगाई जाएंगी। इसके लिए दिल्ली सरकार ने करीब 93 हजार स्ट्रीटलाइटों को आधुनिक बनाने की योजना शुरू की है। खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में ठेकेदारों को एकमुश्त भुगतान नहीं किया जाएगा, बल्कि उनकी EMI कार्यक्षमता के आधार पर दी जाएगी। सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से सड़कों पर बेहतर रोशनी मिलेगी, रखरखाव में सुधार होगा और सरकारी खर्च का बोझ भी कम होगा। इसके साथ ही दिल्ली में लगे लगभग 1.4 लाख चीनी मूल के सीसीटीवी कैमरों को भी चरणबद्ध तरीके से

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Published On :

जून 22, 2026

नई दिल्ली
 दिल्ली की सड़कों पर जल्द ही स्मार्ट तकनीक आधारित स्ट्रीटलाइटें लगाई जाएंगी। इसके लिए दिल्ली सरकार ने करीब 93 हजार स्ट्रीटलाइटों को आधुनिक बनाने की योजना शुरू की है। खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में ठेकेदारों को एकमुश्त भुगतान नहीं किया जाएगा, बल्कि उनकी EMI कार्यक्षमता के आधार पर दी जाएगी।

सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से सड़कों पर बेहतर रोशनी मिलेगी, रखरखाव में सुधार होगा और सरकारी खर्च का बोझ भी कम होगा। इसके साथ ही दिल्ली में लगे लगभग 1.4 लाख चीनी मूल के सीसीटीवी कैमरों को भी चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा। पहले चरण में 50 हजार कैमरे बदले जाने की योजना है।

स्मार्ट एलईडी लाइटों से होगा बदलाव
PWD की सड़कों पर लगी पुरानी सोडियम वेपर और पुराने एलईडी लाइटों को हटाकर नई स्मार्ट एलईडी लाइटें लगाई जाएंगी। इसके अलावा लगभग 5,000 नए पोल भी लगाए जाएंगे, ताकि अंधेरे वाले हिस्सों में पर्याप्त रोशनी पहुंच सके।

प्रदर्शन के आधार पर मिलेगा भुगतान
नई व्यवस्था में ठेकेदारों को तभी भुगतान मिलेगा जब स्ट्रीटलाइटें सही तरीके से काम करेंगी। यदि लाइटें खराब रहती हैं या समय पर मरम्मत नहीं होती है, तो भुगतान प्रभावित हो सकता है। इससे ठेकेदारों की जवाबदेही बढ़ेगी और रखरखाव बेहतर होगा।

कंट्रोल सेंटर से होगी निगरानी
PWD मुख्यालय में एक केंद्रीय कमांड और कंट्रोल सेंटर बनाया जाएगा। यहां से हर स्ट्रीटलाइट की रियल टाइम निगरानी की जाएगी। स्मार्ट लाइटों की रोशनी मौसम और जरूरत के अनुसार कम या ज्यादा भी की जा सकेगी।

बिजली बचत पर सरकार का जोर
वित्त विभाग के आकलन के अनुसार स्मार्ट एलईडी प्रणाली से बिजली की खपत में बड़ी कमी आएगी। सरकार को उम्मीद है कि अगले पांच वर्षों में लगभग 300 करोड़ रुपये की बचत होगी। अधिकारियों का मानना है कि यह योजना दिल्ली की सड़कों को अधिक सुरक्षित, ऊर्जा-कुशल और तकनीकी रूप से आधुनिक बनाने में मदद करेगी।