ईरान के लिए नया संकट: ‘वॉटर वॉर’ के तहत अमेरिका चार इलाकों से करेगा नाकेबंदी

वाशिंगटन पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान की ‘शांति वार्ता’ पटरी से उतरते ही डोनाल्ड ट्रंप का पारा चढ़ गया है. अब ट्रंप ने सीधी धमकी दे डाली है कि अमेरिका खुद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करेगा. यानी जिस होर्मुज को खुलवाने के लिए अब तक वॉशिंगटन ईरान पर दबाव बना रहा था, अब उसी लाइफलाइन को खुद जाम करने की बात कह रहा है।  ट्रंप का ये दांव सीधे ईरान की अर्थव्यवस्था पर चोट करने वाला है. दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तेहरान के लिए लाइफलाइन जैसा है. यहीं से उसका ज्यादातर तेल दुनियाभर में जाता है. अगर ये रास्ता बंद हुआ,

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Published On :

अप्रैल 13, 2026

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वाशिंगटन

पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान की ‘शांति वार्ता’ पटरी से उतरते ही डोनाल्ड ट्रंप का पारा चढ़ गया है. अब ट्रंप ने सीधी धमकी दे डाली है कि अमेरिका खुद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करेगा. यानी जिस होर्मुज को खुलवाने के लिए अब तक वॉशिंगटन ईरान पर दबाव बना रहा था, अब उसी लाइफलाइन को खुद जाम करने की बात कह रहा है। 

ट्रंप का ये दांव सीधे ईरान की अर्थव्यवस्था पर चोट करने वाला है. दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तेहरान के लिए लाइफलाइन जैसा है. यहीं से उसका ज्यादातर तेल दुनियाभर में जाता है. अगर ये रास्ता बंद हुआ, तो ईरान की कमाई पर सीधा ताला लग सकता है। 

ग्लोबल शिपिंग इंडस्ट्री को डर है कि ट्रंप के फैसले से तेल की कीमतें और बढ़ेंगी, क्योंकि अमेरिका उन सभी ईरानी जहाजों पर भी रोकना शुरू कर सकता है, जिन्हें अब तक बिना रोक-टोक आने दिया जा रहा था. इस बात को लेकर भी चिंता जताई जा रही है कि ईरान से आने वाले कुछ ऐसे जहाज, जो होर्मुज का इस्तेमाल भी नहीं कर रहे थे, उन्हें भी अमेरिका रोक सकता है। 

ताजा जानकारी के मुताबिक, अगर अमेरिका ईरानी के समंदर में नाकाबंदी शुरू करता है, तो ईरान के 4 प्रमुख बंदरगाह प्रभावित होंगे:

1. खर्ग (खार्क) द्वीप
2. जास्क टर्मिनल
3. बंदर अब्बास
4. बंदर खुमैनी

वैसे अमेरिका और इजरायल के सात जंग शुरू होने के बाद ईरान ने होर्मुज को बंद करने का ऐलान किया था. लेकिन फिर ईरान ने धीरे-धीरे इसे खोला. कुछ तेल टैंकर्स को 20 लाख डॉलर प्रति जहाज (करीब 18 करोड़ रुपये) तक के शुल्क के बदले में गुजरने की इजाजत भी दी। 

ईरान को आर्थिक चोट देने की तैयारी में ट्रंप

ये भी सामने आया कि होर्मुज से UAE, ओमान का तेल निकलने में दिक्कत आ रही है. वहीं ईरान युद्ध के दौरान भी इस इलाके से अपने तेल का आवागमन जारी रखे हुए है. CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान मार्च तक औसतन 18 लाख बैरल कच्चे तेल का निर्यात करने में कामयाब रहा – जो पिछले तीन महीनों की तुलना में लगभग 1 लाख बैरल प्रति दिन ज्यादा है। 

ईरान जो तेल बेच रहा है उससे मिल रहे फंड का इस्तेमाल सरकार चलाने और सैन्य अभियानों के लिए हो रहा है. अब होर्मुज स्ट्रेट को बंद करके ट्रंप इसपर डेंट करना चाहते हैं. हालांकि, इससे दुनिया भर में तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है. बता दें कि पाकिस्तान में हुई मीटिंग फेल होने के बाद कच्चा तेल फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। 

तेल के दाम और ज्यादा हाई पर न जाएं इसीलिए, अमेरिकी नौसेना ने ईरानी टैंकरों को इस क्षेत्र से गुजरने पर कोई रोक-टोक नहीं लगाई थी. क्योंकि कहीं से भी मार्केट तक पहुंचने वाला कच्चा तेल, तेल की कीमतों को कम से कम कुछ हद तक कंट्रोल में रखने में मदद कर सकता है. इसी वजह से मार्च में अमेरिका ने ईरान को उसके उस तेल को बेचने के लिए एक अस्थायी लाइसेंस दिया था, जो टैंकरों में भरकर समुद्र में पहुंच गया था। 

इस फैसले से बड़ी मात्रा (140 मिलियन बैरल) में कच्चा तेल उपलब्ध हो गया था. 140 मिलियन बैरल, जो US Energy Information Administration के अनुसार, पूरी दुनिया की तेल की मांग को लगभग डेढ़ दिन तक पूरा करने के लिए काफी था। 

लेकिन, अगर अब ट्रंप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करेंगे तो इससे तेल और गैस की कीमतों में और भी उछाल आने के पूरे-पूरे चांस बने रहेंगे। 

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