दिल्ली के IITF-2026 में चमकेगी बिहार की विरासत, भागलपुरी सिल्क और मधुबनी पेंटिंग होंगे आकर्षण

मुजफ्फरपुर बिहार की विरासत को कारोबारी विस्तार देने की तैयारी है। सूबे की पारंपरिक कला, शिल्प, बुनकरी व स्थानीय उद्यमों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला (आईआईटीएफ)-2026 एक बड़ा मंच बनेगा। राज्य से 52 उद्यमियों को व्यापार मेले में बेहतर मंच मिलेगा। बिहार के छोटे उद्यमियों और पारंपरिक कारीगरों को बड़े बाजार तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। ‘विकास और विरासत’ थीम पर आधारित मेले के 45वें संस्करण में बिहार के खाद्य प्रसंस्करण, भागलपुरी सिल्क, हैंडलूम, मधुबनी पेंटिंग, मिथिला पाग, जूट शिल्प, खादी, आभूषण, लकड़ी की नक्काशी समेत पारंपरिक हस्तशिल्प की

Wrriten By :

Editor

Published On :

नवम्बर 7, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

मुजफ्फरपुर
बिहार की विरासत को कारोबारी विस्तार देने की तैयारी है। सूबे की पारंपरिक कला, शिल्प, बुनकरी व स्थानीय उद्यमों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला (आईआईटीएफ)-2026 एक बड़ा मंच बनेगा। राज्य से 52 उद्यमियों को व्यापार मेले में बेहतर मंच मिलेगा। बिहार के छोटे उद्यमियों और पारंपरिक कारीगरों को बड़े बाजार तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।

‘विकास और विरासत’ थीम पर आधारित मेले के 45वें संस्करण में बिहार के खाद्य प्रसंस्करण, भागलपुरी सिल्क, हैंडलूम, मधुबनी पेंटिंग, मिथिला पाग, जूट शिल्प, खादी, आभूषण, लकड़ी की नक्काशी समेत पारंपरिक हस्तशिल्प की झलक दिखेगी। उद्योग विभाग की गठित समिति ने 92 अभ्यर्थियों के उत्पादों के भौतिक परीक्षण के बाद 52 के चयन की अनुशंसा की है। इनमें मुजफ्फरपुर के दो और उत्तर बिहार के कुल 11 उद्यमी शामिल हैं। चयन होने के बाद इन उद्यमियों में काफी उत्साह है और बेहतर परफॉर्म करने का प्रयास तेज कर दिया है।

मुजफ्फरपुर के निधि बिपिन कुमार और राहुल कुमार भारत अंतराराष्ट्रीय व्यापार मेले में अपना स्टॉल लगाएंगे और अपने उत्पाद को राष्ट्रीय मंच देंगे। उद्योग विभाग की चयन समिति ने चार नवंबर को विकास भवन में अभ्यर्थियों के उत्पादों के साथ भौतिक परीक्षण किया। उत्पादों और प्रदर्शों को देखने के बाद 52 उम्मीदवारों के नामों की अनुशंसा की गई। सभी चयनित स्टॉल धारकों को 12 नवंबर को दोपहर तीन बजे तक अपने निर्धारित स्टॉल पर शिल्प और उत्पादों के साथ पहुंचकर प्रदर्शनी लगाने को कहा गया है। 13 नवंबर को मेले का उद्घाटन प्रस्तावित है। मेले में देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशी कारोबारियों व प्रदर्शकों की भी भागीदारी रहती है। पिछले संस्करण में 3500 से अधिक प्रदर्शकों ने हिस्सा लिया था। इनमें 12 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे और करीब 18 लाख आगंतुक पहुंचे थे।

छोटे उद्यमियों, पारंपरिक कारीगरों को मिलेगा बड़ा बाजार
मेले में भागीदारी से बिहार के छोटे उद्यमियों और पारंपरिक कारीगरों को बड़े बाजार तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। अभी जिन उत्पादों की बिक्री मुख्य रूप से स्थानीय हाट, दुकानों और सीमित ऑनलाइन माध्यमों से होती है, उन्हें देश के दूसरे राज्यों के खरीदारों के सामने प्रदर्शित किया जा सकेगा। इससे थोक कारोबारियों, वितरकों, खुदरा विक्रेताओं और संभावित निर्यातकों से सीधा संपर्क बनने की संभावना है। कारीगरों को अपने उत्पादों की मांग, गुणवत्ता, डिजाइन और कीमत को लेकर बड़े बाजार की प्रतिक्रिया भी मिलेगी। गांवों में बुनकरी, सिल्क, हस्तशिल्प तथा खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े रोजगार को भी गति मिल सकती है।

2