650वीं जयंती पर श्रद्धा का महासंगम: धार्मिक समागम और नगर कीर्तन की तैयारियां तेज

अमृतसर. शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की ओर से भक्त रविदास जी की 650वीं जयंती को बड़े स्तर पर मनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस संबंध में मुख्य कार्यालय में एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने की। बैठक में आगामी धार्मिक समागमों, नगर कीर्तन, सेमिनार और अन्य कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की गई। एडवोकेट धामी ने बताया कि 20 फरवरी 2027 को आने वाली भक्त रविदास जी की 650वीं जयंती को ऐतिहासिक तरीके से मनाया जाएगा। इसके तहत भक्त रविदास जी के जीवन, उनके दर्शन, सामाजिक संदेश और गुरबाणी

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Published On :

मई 9, 2026

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अमृतसर.

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की ओर से भक्त रविदास जी की 650वीं जयंती को बड़े स्तर पर मनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस संबंध में मुख्य कार्यालय में एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने की।

बैठक में आगामी धार्मिक समागमों, नगर कीर्तन, सेमिनार और अन्य कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की गई। एडवोकेट धामी ने बताया कि 20 फरवरी 2027 को आने वाली भक्त रविदास जी की 650वीं जयंती को ऐतिहासिक तरीके से मनाया जाएगा। इसके तहत भक्त रविदास जी के जीवन, उनके दर्शन, सामाजिक संदेश और गुरबाणी से संबंधित छह बड़े सेमिनार आयोजित किए जाएंगे।

इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर आठ कीर्तन दरबार भी सजाए जाएंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि भक्त रविदास जी के जन्म स्थान गोवर्धनपुर से एक विशाल नगर कीर्तन निकाला जाएगा। यह नगर कीर्तन अलग-अलग राज्यों से होता हुआ पंजाब पहुंचेगा। नगर कीर्तन के दौरान भक्त रविदास जी के उपदेशों और समाज सुधार के संदेश को लोगों तक पहुंचाया जाएगा।

भक्त रविदास जी से संबंधित पुस्तकें होंगी प्रकाशित
एसजीपीसी प्रधान ने कहा कि भक्त रविदास जी के जीवन और इतिहास से संबंधित पुस्तकें भी विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित की जाएंगी, ताकि देश और विदेश में रहने वाले लोग उनके विचारों और शिक्षाओं से जुड़ सकें। उन्होंने बताया कि कार्यक्रमों के सफल आयोजन और संत-महापुरुषों के साथ बेहतर तालमेल के लिए एसजीपीसी सदस्यों की अलग-अलग उप समितियां बनाई हैं। ये समितियां विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों से संपर्क करेंगी। इस संबंध में 25 मई को एक और बैठक कर सुझाव लिए जाएंगे।

बैठक के दौरान परीक्षाओं में सिख विद्यार्थियों के कक्कार उतरवाने के मामले पर भी चर्चा हुई। एडवोकेट धामी ने कहा कि एसजीपीसी के विरोध के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने माफी मांगते हुए भविष्य में ऐसी घटनाएं न होने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि यह मामला सिख भावनाओं से जुड़ा हुआ है और एजेंसी को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए। बेअदबी कानून को लेकर पूछे गए सवाल पर धामी ने कहा कि एसजीपीसी हमेशा दोषियों को कड़ी सजा दिए जाने के पक्ष में रही है, लेकिन नए कानून में शामिल कुछ प्रावधानों को लेकर संगतों में आशंकाएं हैं।

उन्होंने कहा कि धर्म लोगों को प्रेम, भाईचारे और निर्मलता का संदेश देता है। सरकार को सभी पक्षों की भावनाओं का सम्मान करते हुए लोगों की चिंताओं को दूर करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अकाल तख्त साहिब जो भी आदेश देगा, एसजीपीसी उसका पूरी तरह पालन करेगी।

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