4 साल में ही खस्ताहाल स्कूल भवन पर बवाल, स्वाति मालीवाल बोलीं– बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़, सिसोदिया जिम्मेदार

नई दिल्ली दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। साल 2020 में करोड़ों रुपए की लागत से बनी एक सरकारी स्कूल की चार मंजिला इमारत अब इतनी खराब हालत में पहुंच चुकी है कि उसे 'डेंजरस' घोषित कर बंद करना पड़ा है। इस मामले को लेकर राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने आम आदमी पार्टी और तत्कालीन शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। 4–5 साल में खंडहर बनी 2020 की स्कूल बिल्डिंग, सुरक्षा के चलते स्कूल बंद सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, स्वाति मालीवाल का कहना है कि जिस

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Published On :

जनवरी 25, 2026

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नई दिल्ली
दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। साल 2020 में करोड़ों रुपए की लागत से बनी एक सरकारी स्कूल की चार मंजिला इमारत अब इतनी खराब हालत में पहुंच चुकी है कि उसे 'डेंजरस' घोषित कर बंद करना पड़ा है। इस मामले को लेकर राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने आम आदमी पार्टी और तत्कालीन शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

4–5 साल में खंडहर बनी 2020 की स्कूल बिल्डिंग, सुरक्षा के चलते स्कूल बंद
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, स्वाति मालीवाल का कहना है कि जिस स्कूल को 2020 में बनाया गया था, वह महज 4–5 साल में ही खंडहर जैसी हालत में पहुंच गया। उन्होंने स्कूल भवन की तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि इमारत में जगह-जगह दरारें, भारी सीलन, कमजोर दीवारें और कुछ हिस्सों में लेंटर तक नहीं है। ऐसे हालात में बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल को बंद करना पड़ा।

दरारें, सीलन और कमजोर ढांचा, स्वाति मालीवाल ने तस्वीरें-वीडियो जारी कर उठाए सवाल
स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया कि यह मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। उनका कहना है कि अगर निर्माण कार्य सही तरीके से और मानकों के अनुसार हुआ होता, तो इतनी नई बिल्डिंग को खतरनाक घोषित नहीं करना पड़ता। उन्होंने सवाल उठाया कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी क्यों नहीं हुई।

भ्रष्टाचार का आरोप, करोड़ों खर्च के बावजूद निर्माण गुणवत्ता पर सवाल
वहीं आम आदमी पार्टी और मनीष सिसोदिया समर्थकों की ओर से इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि दिल्ली में हजारों सरकारी स्कूलों का निर्माण और नवीनीकरण किया गया है और किसी एक इमारत की खराब हालत के आधार पर पूरे शिक्षा मॉडल पर सवाल उठाना गलत है। साथ ही यह भी कहा गया है कि अगर किसी स्कूल में निर्माण से जुड़ी खामी पाई गई है, तो उसकी तकनीकी जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार ठेकेदार या एजेंसी पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
 
AAP का पलटवार, आरोपों को बताया राजनीति से प्रेरित, तकनीकी जांच की मांग
इस पूरे मामले ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या स्कूल निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ? क्या गुणवत्ता जांच में लापरवाही बरती गई? और सबसे बड़ा सवाल, बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

घटिया निर्माण या निगरानी में चूक? दिल्ली के स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा सवाल
फिलहाल मामला आरोप-प्रत्यारोप के बीच है, लेकिन 2020 में बनी एक स्कूल इमारत का इतनी जल्दी जर्जर हो जाना दिल्ली के सरकारी निर्माण कार्यों और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल जरूर खड़े करता है।

 

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