12 साल छोटे प्रेमी को पत्नी से खरीदने का मामला, महिला अधिकारी पर विवादित आरोप

भोपाल  भोपाल के कुटुंब न्यायालय में हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने 90 के दशक की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'जुदाई' की यादें ताजा कर दीं। भोपाल के एक परिवार में शांति बहाली के लिए रिश्तों का बाकायदा वित्तीय समझौता किया है। एक महिला ने अपनी गृहस्थी में जहर घोल रही 'सौतन' से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की संपत्ति और कैश लेकर अपने पति को हमेशा के लिए उसके नाम कर दिया। शहर के न्यायिक गलियारों में इस 'महंगे तलाक' की चर्चा हर तरफ है। सरकारी विभाग में हैं कार्यरत मामला केंद्रीय सरकारी विभाग का है। यहां तैनात

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Published On :

फ़रवरी 13, 2026

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भोपाल
 भोपाल के कुटुंब न्यायालय में हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने 90 के दशक की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'जुदाई' की यादें ताजा कर दीं। भोपाल के एक परिवार में शांति बहाली के लिए रिश्तों का बाकायदा वित्तीय समझौता किया है। एक महिला ने अपनी गृहस्थी में जहर घोल रही 'सौतन' से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की संपत्ति और कैश लेकर अपने पति को हमेशा के लिए उसके नाम कर दिया। शहर के न्यायिक गलियारों में इस 'महंगे तलाक' की चर्चा हर तरफ है।

सरकारी विभाग में हैं कार्यरत
मामला केंद्रीय सरकारी विभाग का है। यहां तैनात एक 42 वर्षीय अधिकारी का प्रेम प्रसंग अपनी ही सहकर्मी के साथ शुरू हुआ। दिलचस्प बात यह है कि प्रेमिका की उम्र 54 वर्ष है, जो अधिकारी से उम्र में 12 साल बड़ी है। इस प्रेम के परवान चढ़ते ही अधिकारी ने अपने घर, पत्नी और दो मासूम बेटियों की अनदेखी शुरू कर दी। घर में आए दिन होने वाले विवादों ने वातावरण को बोझिल बना दिया था।

बेटियों पर पड़ रहा था असर
माता-पिता के बीच हर दिन होने वाली 'महाभारत' का सबसे बुरा असर 16 और 12 साल की दो बेटियों पर पड़ रहा था। मानसिक अवसाद से जूझ रही बड़ी बेटी ने हिम्मत दिखाई और मामले को कुटुंब न्यायालय तक ले गई। काउंसलिंग सत्र के दौरान पति ने दो टूक शब्दों में कह दिया कि वह अपनी पत्नी के साथ खुश नहीं है और उसे अपनी सहकर्मी (प्रेमिका) के साथ ही मानसिक शांति मिलती है। जब रिश्ता जुड़ना नामुमकिन है, तो पत्नी ने एक व्यावहारिक रास्ता चुना।

मान ली यह शर्त
उसने मांग रखी कि बेटियों के भविष्य और गुजर-बसर के लिए उसे एक शानदार डुप्लेक्स मकान और 27 लाख रुपये नकद दिए जाएं। हैरत की बात यह रही कि पति की प्रेमिका ने बिना किसी हिचकिचाहट के यह शर्त मान ली। प्रेमिका का तर्क था कि वह अपने साथी के परिवार को बेसहारा नहीं देखना चाहती, इसलिए वह अपनी जीवन भर की जमापूंजी इस सौदे में लगाने को तैयार है।

पारिवारिक मामलों के काउंसलर्स का मानना है कि जहां भावनाएं खत्म हो जाएं, वहां जबरन साथ रहने से बेहतर सम्मानजनक विदाई होती है। यह निर्णय भले ही समाज को अजीब लगे, लेकिन बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और वित्तीय सुरक्षा के नजरिए से यह एक तार्किक कदम है। जब रिश्ता केवल बोझ बन जाए तो शांति के लिए अलग होना ही अच्छा है।

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