Supreme Court On Protest: ‘पुलिस को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण क्यों नहीं दिए गए?’ नीट पेपर लीक प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट के तीखे सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में हुए प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई के मामलों पर सुनवाई करते हुए कहा है कि शांतिपूर्ण विरोध हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल आंदोलन होने भर से लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता। अदालत ने सभी मामलों के लिए एक समान गाइडलाइन बनाने के निर्देश दिए हैं।

Supreme Court On Protest

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 27, 2026

Supreme Court On Protest: सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में हाल ही में हुए विभिन्न प्रदर्शनों और उसके दौरान सामने आए पुलिसिया कार्रवाई के मामलों को गंभीरता से लेते हुए एक व्यापक सुनवाई करने का फैसला किया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि ऐसे संवेदनशील और गंभीर मामलों के लिए पूरे देश के वास्ते एक समान गाइडलाइन बनाई जाएगी। नीट पेपर लीक और अन्य परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ हुए प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार के मामले केवल किसी एक विशेष स्थान जैसे जंतर-मंतर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरे देश से जुड़े हुए हैं और इन सभी लंबित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा और प्रोटोकॉल पर उठाए सवाल

बताते चले कि, सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बल देकर कहा कि इस तरह की स्थितियों से निपटने के लिए एक समान प्रोटोकॉल और स्पष्ट गाइडलाइंस तय करना बेहद जरूरी है ताकि उठाए जाने वाले सभी उपाय पूरी तरह से लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरूप हों। वहीं पीठ में शामिल जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी भारी-भरकम भीड़ को नियंत्रित करते समय आखिर पुलिस बल को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और गियर क्यों नहीं मुहैया कराए गए? अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि यदि प्रदर्शनों की आड़ में कुछ असामाजिक तत्व जबरन घुसपैठ कर लेते हैं, तो प्रशासन को उस पहलू से भी बेहद कड़ाई और सावधानी से निपटना होगा ताकि किसी भी तरह की अराजकता को रोका जा सके।

“हर नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध का संवैधानिक अधिकार”

शीर्ष अदालत ने अपने मौखिक टिप्पणी में दो टूक कहा कि देश के संविधान के तहत हर नागरिक को पूरी तरह से शांतिपूर्ण और वैध तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है, जिसकी रक्षा करना राज्य और न्यायपालिका दोनों का कर्तव्य है। चीफ जस्टिस ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल इसलिए कि कहीं कोई विरोध प्रदर्शन चल रहा है, पुलिस द्वारा अंधाधुंध लाठीचार्ज किया जाना कतई उचित नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि प्रदर्शन के दौरान यदि पुलिस या प्रदर्शनकारियों दोनों में से किसी भी पक्ष की ओर से ज्यादती या हिंसा की गई है, तो उसकी पूरी निष्पक्षता के साथ स्वतंत्र जांच की जानी चाहिए।

मंगलवार को सभी याचिकाओं पर होगी संयुक्त सुनवाई

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट इन सभी मामलों की व्यापक और संयुक्त सुनवाई मंगलवार को कर रहा है। हाल ही में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और उसके विरोध में हुए उग्र प्रदर्शनों के बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर देश के कई हिस्सों से याचिकाएं दायर की गई हैं। सर्वोच्च न्यायालय के इस कड़े रुख और पूरे देश के लिए गाइडलाइन तैयार करने के फैसले ने प्रशासनिक अमले और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। अब देखना यह होगा कि मंगलवार को होने वाली इस उच्च-स्तरीय सुनवाई में अदालत देश भर के प्रदर्शनों के प्रबंधन को लेकर क्या ऐतिहासिक निर्देश जारी करती है।