रायगढ़ में उद्योगों में तीन सालों में 55 मजदूरों की मौत, 63 घायल – सुरक्षा मानकों की कमी बनी बड़ी वजह

रायगढ़  छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में उद्योगों में लगातार हादसे हो रहे हैं। औद्योगिक सुरक्षा विभाग ने एक आंकड़ा जारी किया है जिसके मुताबिक, पिछले 3 साल में अलग-अलग उद्योगों में हुए हादसे में काम करने वाले 55 लोगों की जान जा चुकी है, वहीं 63 लोग घायल हुए हैं। जहां घटनाएं हुई उनमें एनआर इस्पात, रायगढ़ इस्पात, एमएसपी स्टील एंड पवार लिमिटेड, एनआरवीएश स्पंज प्लांट, जिंदल स्टील एंड पावर प्लांट, सिंघल स्पंज प्लांट, बीएस स्पंज प्राइवेट लिमिटेड, नवदुर्गा फ्युल प्राइवेट लिमिटेड, शारदा एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड समेत कई प्लांट शामिल हैं। ज्यादातर मामलों में सुरक्षा मानकों में कमी के कारण

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Published On :

जनवरी 10, 2026

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रायगढ़ 

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में उद्योगों में लगातार हादसे हो रहे हैं। औद्योगिक सुरक्षा विभाग ने एक आंकड़ा जारी किया है जिसके मुताबिक, पिछले 3 साल में अलग-अलग उद्योगों में हुए हादसे में काम करने वाले 55 लोगों की जान जा चुकी है, वहीं 63 लोग घायल हुए हैं।

जहां घटनाएं हुई उनमें एनआर इस्पात, रायगढ़ इस्पात, एमएसपी स्टील एंड पवार लिमिटेड, एनआरवीएश स्पंज प्लांट, जिंदल स्टील एंड पावर प्लांट, सिंघल स्पंज प्लांट, बीएस स्पंज प्राइवेट लिमिटेड, नवदुर्गा फ्युल प्राइवेट लिमिटेड, शारदा एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड समेत कई प्लांट शामिल हैं। ज्यादातर मामलों में सुरक्षा मानकों में कमी के कारण हादसा उजागर हुआ है।

3 साल में 55 मजदूरों की मौत

औद्योगिक सुरक्षा विभाग के मुताबिक, साल 2023 में 9 प्लांटों में हादसों के मामले सामने आए। जिसमें 9 मजदूरों की मौत हो गई और 6 गंभीर व 6 सामान्य रूप से घायल हुए। इसके बाद आकड़ों का ग्राफ भी बढ़ते गया।

साल 2024 में उद्योगों में 22 हादसे हुए और इसमें 23 मजदूरों की मौत हो गई। जबकि 14 गंभीर और 18 सामान्य रूप से घायल हुए।

इसके अलावा साल 2025 में भी 22 हादसों में 23 लोगों की जान चले गई और 9 गंभीर व 10 सामान्य रूप से घायल होकर अस्पताल पहुंचे।

सुरक्षा मानकों की कमी के कारण घटनाएं

विभागीय जानकारों ने बताया कि उद्योगों में हादसे अक्सर सुरक्षा मानकों की कमी के कारण हो रहे हैं। जिसमें मजदूरों को बिना सुरक्षा व मनमाने तरीके से काम कराया जाता है।

पिछले कुछ सालों में देखा गया कि अधिक हादसे बॉयलर फटने या कन्वेयर बेल्ट और मशीन की चपेट में आने से हुई है। उत्पादन बढ़ाने के दबाव में सुरक्षा नियमों की अनदेखी और पुराने पड़ चुके उपकरणों का रखरखाव न होना भी मौतों की मुख्य वजह बतायी जा रही है।

3 महीने में 25 आपराधिक प्रकरण दर्ज

औद्योगिक स्वास्थ्य व सुरक्षा विभाग के उप संचालक राहुल पटेल ने बताया कि कारखानों में लगातार हादसों को देखते हुए नियमित रूप से जांच की जा रही है।

पूर्व में हुए हादसों में निरीक्षण में कई कमियां पाई गई। ऐसे में पिछले 3 माह में उद्योगों के खिलाफ 25 आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया है।

इसके अलावा जांच के दौरान जिन-जिन प्लांटों में सुरक्षा को लेकर कमियां मिलती हैं, उन्हें नोटिस जारी कर सुधार के निर्देश दिए जाते हैं।

औद्योगिक सुरक्षा विभाग के मुताबिक, साल 2023 में 9 प्लांटों में हादसों के मामले सामने आए। जिसमें 9 मजदूरों की मौत हो गई और 6 गंभीर व 6 सामान्य रूप से घायल हुए। इसके बाद आकड़ों का ग्राफ भी बढ़ते गया।

साल 2024 में उद्योगों में 22 हादसे हुए और इसमें 23 मजदूरों की मौत हो गई। जबकि 14 गंभीर और 18 सामान्य रूप से घायल हुए।

इसके अलावा साल 2025 में भी 22 हादसों में 23 लोगों की जान चले गई और 9 गंभीर व 10 सामान्य रूप से घायल होकर अस्पताल पहुंचे।

सुरक्षा मानकों की कमी के कारण घटनाएं

विभागीय जानकारों ने बताया कि उद्योगों में हादसे अक्सर सुरक्षा मानकों की कमी के कारण हो रहे हैं। जिसमें मजदूरों को बिना सुरक्षा व मनमाने तरीके से काम कराया जाता है।

पिछले कुछ सालों में देखा गया कि अधिक हादसे बॉयलर फटने या कन्वेयर बेल्ट और मशीन की चपेट में आने से हुई है। उत्पादन बढ़ाने के दबाव में सुरक्षा नियमों की अनदेखी और पुराने पड़ चुके उपकरणों का रखरखाव न होना भी मौतों की मुख्य वजह बतायी जा रही है।

3 महीने में 25 आपराधिक प्रकरण दर्ज

औद्योगिक स्वास्थ्य व सुरक्षा विभाग के उप संचालक राहुल पटेल ने बताया कि कारखानों में लगातार हादसों को देखते हुए नियमित रूप से जांच की जा रही है।

पूर्व में हुए हादसों में निरीक्षण में कई कमियां पाई गई। ऐसे में पिछले 3 माह में उद्योगों के खिलाफ 25 आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया है।

इसके अलावा जांच के दौरान जिन-जिन प्लांटों में सुरक्षा को लेकर कमियां मिलती हैं, उन्हें नोटिस जारी कर सुधार के निर्देश दिए जाते हैं।

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