Strait of Hormuz : ट्रंप की होर्मुज नाकेबंदी से चीन आगबबूला, क्या छिड़ेगा अब तीसरा विश्व युद्ध?

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी लागू करने के बाद चीन ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। बीजिंग ने चेतावनी दी है कि यदि चीनी तेल टैंकरों को रोका गया, तो वह मूकदर्शक नहीं रहेगा। क्या यह टकराव अमेरिका और चीन के बीच सीधे सैन्य संघर्ष की शुरुआत है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 14, 2026

Strait of Hormuz : मिडल ईस्ट में जारी तनाव ने अब एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। शनिवार (11 अप्रैल, 2026) को पाकिस्तान में ईरान के साथ हुई शांति वार्ता के विफल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी करने का कड़ा आदेश दिया है। अमेरिका के इस फैसले ने वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। ईरान द्वारा तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त किए जाने के बाद अब चीन ने भी इस मामले में एंट्री मारी है। बीजिंग ने वाशिंगटन की इस कार्रवाई को न केवल ‘खतरनाक’ बताया है, बल्कि इसे अब तक की सबसे बड़ी आलोचना के साथ ‘गैर-जिम्मेदाराना’ करार दिया है।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका को खरी-खरी: ‘जंगलराज नहीं चलेगा’

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका की इस सैन्य कार्रवाई पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने वाशिंगटन को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि दुनिया को ‘जंगल के कानून’ की ओर वापस जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि ताकत के दम पर किसी देश की संप्रभुता को रोकना अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है। दिलचस्प बात यह है कि जहाँ अमेरिका ने ईरान मुद्दे पर स्पेन के सुझावों को दरकिनार कर दिया था, वहीं चीन ने अब स्पेन का खुलकर समर्थन किया है।

स्पेन के साथ मिलकर बहुपक्षवाद का समर्थन

जिनपिंग ने अपने संबोधन में कहा कि चीन और स्पेन दोनों ही तर्कसंगत और सिद्धांतों पर चलने वाले राष्ट्र हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देश इतिहास के सही पक्ष में खड़े हैं। जिनपिंग के अनुसार, विश्व शांति और विकास की रक्षा के लिए ‘सच्चे बहुपक्षवाद’ को कायम रखना अनिवार्य है। उन्होंने आह्वान किया कि सभी जिम्मेदार देशों को मिलकर अमेरिका की मनमानी और बल प्रयोग वाली नीतियों का विरोध करना चाहिए ताकि वैश्विक स्थिरता बनी रहे।

हथियारों की सप्लाई और 50% टैरिफ की धमकी पर रार

यह विवाद तब और गहरा गया जब अमेरिका ने चीन पर ईरान को गोपनीय तरीके से हथियार मुहैया कराने के आरोप लगाए। एनबीसी (NBC) की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी खुफिया जानकारी में दावा किया गया है कि चीन अगले कुछ हफ्तों में ईरान को उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम (वायु रक्षा प्रणाली) देने वाला है या शायद इसकी खेप भेज चुका है। इसी खुफिया रिपोर्ट के आधार पर डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी सामानों पर अतिरिक्त 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी है।

चीन ने आरोपों को नकारा, जवाबी कार्रवाई की दी चेतावनी

चीन ने इन आरोपों को आधारहीन बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है। बीजिंग का कहना है कि ट्रंप प्रशासन टैरिफ बढ़ाने के लिए झूठे बहाने गढ़ रहा है। चीन ने दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका व्यापार युद्ध को और भड़काता है और अतिरिक्त शुल्क लागू करता है, तो चीन भी हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठेगा और बराबर की जवाबी कार्रवाई (Retaliatory Action) करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक नए ‘कोल्ड वॉर’ की शुरुआत हो सकती है।

होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी: शांति के लिए बड़ा खतरा

चीनी विदेश मंत्रालय ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को क्षेत्रीय शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है। मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि वाशिंगटन के इस कदम से न केवल तनाव चरम पर पहुँचेगा, बल्कि पहले से ही बेहद नाजुक स्थिति में पहुँच चुके युद्धविराम (Ceasefire) समझौतों को भी अपूरणीय क्षति होगी।

वैश्विक समुद्री सुरक्षा पर संकट

चीन का तर्क है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग को निशाना बनाने से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। इससे न केवल ऊर्जा आपूर्ति बाधित होगी, बल्कि वैश्विक व्यापारिक जहाजों की मुक्त आवाजाही पर भी संकट के बादल मंडराने लगेंगे। चीन ने विश्व समुदाय से अपील की है कि वे इस ‘अवैध नाकेबंदी’ के खिलाफ आवाज उठाएं ताकि मध्य पूर्व को एक महायुद्ध की आग में झोंकने से बचाया जा सके।

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