Zakir Naik On Narendra Modi: विवादास्पद इस्लामिक धर्मप्रचारक जाकिर नाईक एक बार फिर अपनी विवादास्पद टिप्पणियों के कारण सुर्खियों में है। पाकिस्तानी यूट्यूबर नादिर अली को दिए गए एक पुराने साक्षात्कार के पुनः वायरल होने के बाद, नाईक के भारत छोड़ने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए गए बयानों ने नई बहस छेड़ दी है। नाईक ने व्यंग्यात्मक लहजे में अपनी वर्तमान प्रसिद्धि का पूरा श्रेय भारत सरकार की कानूनी कार्रवाइयों को दिया है।
भारतीय प्रधानमंत्री और लोकप्रियता पर नाईक का व्यंग्य
मुंबई में जन्मे और वर्तमान में मलेशिया में शरण लिए हुए जाकिर नाईक ने साक्षात्कार के दौरान दावा किया कि भारत सरकार के कड़े रुख ने अनजाने में उसे एक वैश्विक पहचान दिला दी है। नाईक ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी की वजह से ही आज मुझे हिंदुस्तान के कोने-कोने में पहचाना जाता है। पहले मेरी पहुँच मुख्य रूप से मुस्लिम समुदाय तक सीमित थी, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह उलट गई है। सरकारी कार्रवाई के बाद अब मुस्लिमों से कहीं अधिक गैर-मुस्लिम लोग मेरे नाम और विचारों से वाकिफ हैं।”
‘हिजरत’ और धार्मिक विमर्श का सहारा
अपनी कानूनी मुश्किलों और भारत से पलायन को धार्मिक रंग देते हुए, नाईक ने इसे ‘अल्लाह की योजना’ करार दिया। उसने कहा कि इस्लाम के विरोधियों के माध्यम से भी कभी-कभी धर्म का प्रचार हो जाता है। उसने भारत छोड़ने की प्रक्रिया को ‘हिजरत’ (इस्लाम में धर्म के लिए प्रवास) की संज्ञा दी। नाईक के अनुसार, सरकार द्वारा उसके संगठन ‘इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन’ (IRF) पर प्रतिबंध लगाने के फैसले ने उसके वीडियो की व्यूअरशिप में भारी इजाफा किया है, जिससे उसका मिशन और अधिक मजबूत हुआ है।
भड़काऊ भाषण और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर कानूनी आरोप
जाकिर नाईक की इन टिप्पणियों के बीच यह समझना महत्वपूर्ण है कि वह भारतीय कानून से लंबे समय से फरार है। 2016 के ढाका कैफे आतंकी हमले के बाद, जिसमें आतंकियों ने नाईक के भाषणों से प्रेरित होने की बात स्वीकार की थी, भारत सरकार ने उसके खिलाफ सख्त रुख अपनाया। वर्तमान में उस पर भड़काऊ भाषण देने, युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग (अवैध धन शोधन) के गंभीर आरोप हैं।
मलेशिया में शरण और प्रत्यर्पण की जटिल प्रक्रिया
भारत सरकार ने 2016 में नाईक के एनजीओ, IRF पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके बाद वह गिरफ्तारी से बचने के लिए मलेशिया भाग गया। तब से, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवा चुकी हैं। हालांकि भारतीय एजेंसियां लगातार मलेशियाई सरकार के संपर्क में हैं और उसके प्रत्यर्पण (Extradition) की कोशिशें कर रही हैं, लेकिन अभी तक उसे भारत लाने में सफलता नहीं मिली है। नाईक अक्सर सोशल मीडिया के जरिए भारत की आंतरिक नीतियों की आलोचना कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि सुधारने की कोशिश करता रहता है।









