Yuvraj Mehta Death Case: SIT ने योगी सरकार को सौंपी रिपोर्ट, अवैध खनन और लापरवाही का खुला कच्चा चिट्ठा

अजित पवार का अंतिम संस्कार बारामती में होने वाला है। लोग सड़कों, छतों और ब्रिज पर चढ़कर उन्हें अंतिम बार नमन करने के लिए भारी संख्या में मौजूद हैं।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जनवरी 29, 2026

Yuvraj Mehta Death Case: नोएडा के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दुखद मृत्यु के मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है। रिपोर्ट में बचाव कार्यों में हुई गंभीर चूक और अधिकारियों की संवेदनहीनता को मौत का मुख्य कारण बताया गया है।

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SIT की जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

Yuvraj Mehta Death Case
SIT ने योगी सरकार को सौंपी रिपोर्ट

बताते चले कि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित SIT ने अपनी जांच पूरी कर ली है। रिपोर्ट के अनुसार, युवराज मेहता की मौत केवल एक दुर्घटना नहीं थी, बल्कि यह संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली में भारी लापरवाही का परिणाम थी। जांच दल ने स्पष्ट किया है कि यदि समय रहते सही कदम उठाए जाते, तो युवराज की जान बचाई जा सकती थी। इस रिपोर्ट में दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

सुरक्षा तंत्र की विफलता का कच्चा चिट्ठा

आपको बता दे कि, घटनास्थल के विवरण ने पूरे प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जिस वक्त युवराज पानी से भरे गड्ढे में संघर्ष कर रहे थे, वहां नोएडा प्राधिकरण, SDRF, दमकल विभाग और पुलिस के कुल 80 जवान तैनात थे। इसके बावजूद, ठंडे पानी और उपकरणों की कमी का बहाना बनाकर कोई भी सुरक्षाकर्मी पानी में नहीं उतरा। अंततः, एक साधारण डिलीवरी बॉय, मुनेंद्र ने साहस दिखाया और पानी में छलांग लगाई, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और युवराज दम तोड़ चुके थे।

जवाबदेही से बचते विभाग

जांच के दौरान एक शर्मनाक पहलू यह भी सामने आया कि कोई भी विभाग इस हादसे की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। सूत्रों के अनुसार, नोएडा प्राधिकरण, पुलिस और जिला प्रशासन ने SIT के सामने एक-दूसरे पर दोष मढ़ने की कोशिश की। किसी भी एजेंसी ने अपनी विफलता स्वीकार नहीं की, जिससे व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार और गैर-जिम्मेदाराना रवैये की पुष्टि होती है।

नियमों के उल्लंघन की गहन तफ्तीश

इस मामले में केवल रेस्क्यू ऑपरेशन ही नहीं, बल्कि उस गड्ढे के निर्माण को लेकर भी सवाल उठे हैं। SIT ने अवैध खनन के पहलुओं की जांच की है, जिसमें रॉयल्टी के भुगतान, मिट्टी निकालने की अनुमति की गहराई और समय सीमा की जांच की गई। खनन विभाग ने इस संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें यह देखा जा रहा है कि क्या तय सीमा से अधिक खुदाई की गई थी और इस पर स्थानीय पुलिस व प्रशासन ने चुप्पी क्यों साधे रखी।

दोषियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और कानूनी शिकंजा

अब गेंद प्रदेश सरकार के पाले में है। SIT की रिपोर्ट मिलने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय इस पर गंभीरता से विचार कर रहा है। संभावना है कि जल्द ही लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ निलंबन और कानूनी कार्यवाही के आदेश जारी किए जाएंगे। पूरे प्रदेश की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस प्रशासनिक संवेदनहीनता पर क्या मिसाल कायम करती है।

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