योगी सरकार का मिशन, यीडा के सेक्टर-28 के अंतर्गत 350 एकड़ में आकार ले रहा मेडिकल डिवाइस पार्क

यीडा बना मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग का नया केंद्र, 101 यूनिट्स को भूमि आवंटन योगी सरकार का मिशन, यीडा के सेक्टर-28 के अंतर्गत 350 एकड़ में आकार ले रहा मेडिकल डिवाइस पार्क मेडिकल डिवाइस पार्क में 188.15 एकड़ भूमि औद्योगिक इकाइयों के लिए आरक्षित 203 प्लॉट्स में निवेश की रफ्तार तेज, 101 का आवंटन, 49 ने लिया पजेशन और 12 में निर्माण कार्य शुरू 22 नए प्लॉट्स आवंटन के लिए प्रस्तावित, 11 फरवरी तक किया जा सकेगा आवेदन ग्रीन जोन, वेयरहाउस और कमर्शियल एरिया के साथ समग्र प्लानिंग, निवेशकों को मिल रहा सिंगल-विंडो सपोर्ट लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में

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Published On :

फ़रवरी 4, 2026

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यीडा बना मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग का नया केंद्र, 101 यूनिट्स को भूमि आवंटन

योगी सरकार का मिशन, यीडा के सेक्टर-28 के अंतर्गत 350 एकड़ में आकार ले रहा मेडिकल डिवाइस पार्क

मेडिकल डिवाइस पार्क में 188.15 एकड़ भूमि औद्योगिक इकाइयों के लिए आरक्षित

203 प्लॉट्स में निवेश की रफ्तार तेज, 101 का आवंटन, 49 ने लिया पजेशन और 12 में निर्माण कार्य शुरू

22 नए प्लॉट्स आवंटन के लिए प्रस्तावित, 11 फरवरी तक किया जा सकेगा आवेदन

ग्रीन जोन, वेयरहाउस और कमर्शियल एरिया के साथ समग्र प्लानिंग, निवेशकों को मिल रहा सिंगल-विंडो सपोर्ट

लखनऊ
 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के सेक्टर-28 में 350 एकड़ में विकसित हो रहा मेडिकल डिवाइस पार्क अब कागजी योजना से निकलकर जमीन पर उतर चुका है, जहां निवेश, आवंटन और निर्माण तीनों स्तरों पर ठोस प्रगति दर्ज की गई है। योजना के अंतर्गत यहां अब तक न सिर्फ 100 से अधिक प्लॉट्स का आवंटन कर दिया गया है, बल्कि एक दर्जन इकाइयों ने अपना निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया है। जल्द ही यहां प्रोडक्शन भी शुरू होने की संभावना है। 

उल्लेखनीय है कि यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण में विकसित हो रहा मेडिकल डिवाइस पार्क, योगी सरकार के उस विजन का प्रतीक है, जिसमें उत्तर प्रदेश को नीति, इन्फ्रास्ट्रक्चर व भरोसा, तीनों स्तरों पर निवेशकों का पसंदीदा राज्य बनाया जा रहा है। यह पार्क आने वाले वर्षों में यूपी को मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग का नया पावरहाउस बना सकता है।

203 इंडस्ट्रियल प्लॉट में 101 का आवंटन
मेडिकल डिवाइस पार्क के अंतर्गत 188.15 एकड़ भूमि औद्योगिक इकाइयों के लिए आरक्षित की गई है, जिसमें विभिन्न आकार के कुल 203 इंडस्ट्रियल प्लॉट विकसित किए गए हैं। अब तक 101 प्लॉट का आवंटन हो चुका है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि यीडा क्षेत्र में मेडिकल डिवाइस सेक्टर को लेकर निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है।

धरातल पर उतर रहा निवेश
यीडा द्वारा जारी प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, 85 निवेशकों ने लीज प्लान जमा किया है, जबकि 62 लीज डीड निष्पादित हो चुकी हैं। 49 यूनिट्स ने साइट का पजेशन भी ले लिया है। 23 इकाइयों के भवन मानचित्र स्वीकृत हो चुके हैं तो 12 इकाइयों में निर्माण कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। यह प्रगति योगी सरकार के सिंगल विंडो सिस्टम, समयबद्ध स्वीकृति और नीति-स्थिरता का सीधा प्रमाण मानी जा रही है।

ग्रीन, वेयरहाउस व कमर्शियल जोनों के साथ यीडा का समग्र मॉडल
यीडा इस मेडिकल डिवाइस पार्क को केवल एक इंडस्ट्रियल क्लस्टर नहीं, बल्कि एक फुल-फ्लेज्ड इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम के रूप में विकसित कर रहा है। इसके तहत 9.02 एकड़ में वेयरहाउस प्लॉट, 18.66 एकड़ में ग्रीन एरिया, 46.43 एकड़ में कॉमन फैसिलिटी एरिया, 4.84 एकड़ में कमर्शियल सेक्टर और 79.10 एकड़ में पार्किंग व रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास किया गया है, जिससे उत्पादन के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स, पर्यावरण और वर्कफोर्स सुविधाओं का संतुलन सुनिश्चित हो सके।

नए आवंटन की प्रक्रिया तेज, निवेश के लिए फिर खुले अवसर
मेडिकल डिवाइस पार्क में औद्योगिक इकाइयों के लिए उपलब्ध शेष भूमि में से 10.32 एकड़ भूमि पर नए आवंटन के लिए 12 जनवरी 2026 को योजना की शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत कुल 22 नए प्लॉट आवंटन के लिए प्रस्तावित हैं, जिनमें 1000 वर्गमीटर के 11 प्लॉट, 2100 वर्गमीटर के 9 प्लॉट तथा 5940 वर्गमीटर के 2 प्लॉट शामिल हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 11 फरवरी 2026 तय की गई है।

योगी मॉडल को मिलेगी अंतर्राष्ट्रीय पहचान
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यीडा की रणनीतिक लोकेशन, एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी और एयरपोर्ट इकोसिस्टम के साथ योगी सरकार की उद्योगोन्मुख नीतियों का मेल उत्तर प्रदेश को मेडिकल डिवाइस सेक्टर में राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला सकता है। यह परियोजना आयात पर निर्भरता घटाने के साथ-साथ मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों को भी मजबूती देती है।

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