UP News: योगी की अफसरों को दो टूक! अब सरकारी दफ्तरों में नहीं भटकेगा आम आदमी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिया कि आम आदमी को पेंशन और दूसरे सरकारी कामों के लिए दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। मिशन कर्मयोगी की कार्यशाला में उन्होंने जवाबदेही, एसीआर और पदोन्नति को बेहतर कार्य प्रदर्शन से जोड़ने, एआई तकनीक अपनाने और सरकारी सेवाओं को नागरिक केंद्रित बनाने पर जोर दिया।

UP News

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 23, 2026

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UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को साफ संदेश दिया है कि आम आदमी को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए। उन्होंने कहा कि आज भी कई बुजुर्गों को पेंशन के लिए बार-बार कार्यालय जाना पड़ता है। आम नागरिक की समस्याओं का समय पर समाधान न होना पूरे प्रशासनिक सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है।

मुख्यमंत्री ने ‘ऑफिस-ऑफिस’ धारावाहिक का जिक्र करते हुए कहा कि किसी नागरिक को इस तरह दफ्तरों में भटकने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे लोगों की समस्याएं समझें और उनका समयबद्ध समाधान करें। जानबूझकर मामलों को लटकाना या जानकारी के अभाव में समस्या दूर न कर पाना, दोनों ही स्थितियां गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकों की संतुष्टि ही किसी लोकसेवक के काम का असली रिपोर्ट कार्ड है।

लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर जोर

लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर जोर

सीएम योगी ने कहा कि जिम्मेदार पद पर अयोग्य व्यक्ति का होना जितना खतरनाक है, उतना ही नुकसानदायक किसी लापरवाह कर्मचारी का उस पद पर बने रहना भी है। कई कर्मचारी अपने अधिकारों और पदोन्नति को लेकर सजग रहते हैं, लेकिन जिम्मेदारियों को निभाने में उतनी गंभीरता नहीं दिखाते।उन्होंने कार्मिकों की क्षमता बढ़ाने, उनकी जिम्मेदारियां स्पष्ट करने और उनके काम का नियमित मूल्यांकन करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, बुजुर्ग, महिला, किसान, युवा या किसी जरूरतमंद को सरकारी कार्यालय से निराश लौटना पड़े, तो यह लोक सेवा के उद्देश्य के खिलाफ है।

मिशन कर्मयोगी के तहत AI से मजबूत होगा प्रशासन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को लखनऊ स्थित लोकभवन में मिशन कर्मयोगी के तहत आयोजित ‘साधना श्रृंखला’ की उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल तकनीक से शासन का तरीका तेजी से बदल रहा है। ऐसे में सरकारी कर्मचारियों को भी नई तकनीकों के इस्तेमाल के लिए तैयार करना जरूरी है।

मिशन कर्मयोगी के तहत AI से मजबूत होगा प्रशासन

उन्होंने क्षमता विकास आयोग से आग्रह किया कि उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम) को एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने में सहयोग किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक सरकारी प्रक्रियाओं को आसान और फैसलों को बेहतर बना सकती है, लेकिन प्रशासन को संवेदनशील बनाने के लिए सेवा भावना जरूरी है।

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पंचायतों और नगर निकायों की कार्यक्षमता बढ़ाने पर फोकस

सीएम योगी ने ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों, नगर पालिका परिषदों और नगर निगमों के कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पंचायतें और नगर निकाय शासन की बुनियादी इकाइयां हैं। अगर ये संस्थाएं मजबूत और जवाबदेह होंगी, तभी सरकारी योजनाओं का लाभ आखिरी व्यक्ति तक सही तरीके से पहुंचेगा।

उन्होंने ‘राइट पर्सन फॉर द राइट रोल’ यानी सही जिम्मेदारी के लिए सही व्यक्ति की तैनाती की व्यवस्था प्रभावी बनाने की बात कही। इसके लिए अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रदर्शन, उपलब्धियों और अच्छे कामों को उनकी वार्षिक गोपनीय आख्या (एसीआर) तथा पदोन्नति से जोड़ने की दिशा में काम करने का आग्रह किया।

यूपी के 19.26 लाख से ज्यादा कर्मचारी आईजीओटी पोर्टल से जुड़े

यूपी के 19.26 लाख से ज्यादा कर्मचारी आईजीओटी पोर्टल से जुड़े

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 19.26 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारी आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकृत हैं। अब तक करीब चार करोड़ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं। इसके अलावा, 334 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान उन्नति पोर्टल से जुड़े हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि प्रशिक्षण की सफलता केवल आंकड़ों से तय नहीं होनी चाहिए। यह भी देखना जरूरी है कि प्रशिक्षण के बाद सरकारी कामकाज कितना आसान हुआ, फैसलों की गुणवत्ता कितनी बेहतर हुई और आम नागरिक को कितनी अच्छी सेवाएं मिलीं।

सड़क निर्माण का उदाहरण देकर समझाई अधिकारियों की जिम्मेदारी

सीएम योगी ने गोरखपुर में सड़क निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने एक सड़क को दो लेन से चार लेन करने के निर्देश दिए थे। लेकिन अभियंताओं ने सड़क को जमीन से करीब तीन मीटर ऊंचा बना दिया, जिससे आसपास रहने वाले लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ। शिकायत मिलने पर मुख्यमंत्री खुद मौके पर पहुंचे और सड़क को लोगों की जरूरतों के हिसाब से बनाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि केवल डिग्री हासिल कर लेना या नियुक्ति पत्र मिल जाना किसी को सक्षम अधिकारी नहीं बनाता। काम की व्यावहारिक समझ, नई तकनीक अपनाने और नागरिकों की जरूरतों के मुताबिक निर्णय लेने की क्षमता भी जरूरी है। इसी सोच के साथ प्रदेश में क्षमता विकास को मजबूत करने और उपाम को आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।