Yashwant Varma Case: पूर्व जज यशवंत वर्मा पर आरोप साबित, लोकसभा में पेश हुई जांच रिपोर्ट

जांच समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट के साथ सभी संबंधित रिकॉर्ड और साक्ष्य सक्षम प्राधिकारी को सौंप दिए हैं। अब रिपोर्ट के आधार पर कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Yashwant Varma Case

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 12, 2026

Yashwant Varma Case: भारतीय न्यायपालिका से जुड़ी एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आई है। दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ गठित उच्चस्तरीय जांच समिति ने अपनी विस्तृत जांच पूरी कर ली है और अपनी बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट बुधवार (12 अगस्त 2026) को संसद के निचले सदन लोकसभा में आधिकारिक रूप से पेश कर दी है। इस जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद न्यायिक हलकों में राजनीतिक और प्रशासनिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है। इंक्वायरी कमेटी की रिपोर्ट में पूर्व जज जस्टिस वर्मा पर लगाए गए सभी तीनों ‘आर्टिकल्स ऑफ चार्ज’ (Articles of Charge I, II और III) पूरी तरह से सिद्ध हो गए हैं।

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कमेटी द्वारा सिद्ध किए गए प्रमुख तीन आरोप

जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में जिन तीन गंभीर आरोपों की पुष्टि की है, उनमें मुख्य रूप से अघोषित नकदी मिलना, साक्ष्यों के संरक्षण में भारी लापरवाही बरतना और जांच के दौरान टालमटोल तथा असंतोषजनक जवाब देना शामिल है। इन सभी बिंदुओं पर समिति ने गहराई से छानबीन की है।

नई दिल्ली स्थित 30, तुगलक क्रेसेंट पर स्थित आधिकारिक आवासीय परिसर के स्टोररूम से 500-500 रुपये के नोटों के रूप में भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी। समिति की जांच में यह बात सामने आई कि पूर्व जज इस बात का कोई भी संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सके कि यह नकदी वहां कैसे पहुंची, इसका स्रोत क्या था और इसका वास्तविक मालिक कौन था। इस आधार पर समिति ने पहले आरोप को पूरी तरह सिद्ध माना।

साक्ष्यों के संरक्षण में लापरवाही का दूसरा आरोप

समिति ने अपनी रिपोर्ट में रेखांकित किया कि इस संवेदनशील मामले से जुड़े भौतिक साक्ष्यों को नियमानुसार सुरक्षित और संरक्षित नहीं रखा गया। कानूनी रूप से सीलिंग और औपचारिक निरीक्षण किए जाने से पहले ही स्टोररूम की मूल स्थिति में बदलाव किए जाने के प्रमाण मिले। इसके अलावा, बाद में कुछ करेंसी नोटों के गायब या अनुपलब्ध होने को लेकर भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा सका। हालांकि समिति ने यह स्पष्ट किया कि इससे यह सीधे तौर पर साबित नहीं होता कि नोट जज ने खुद हटाए थे, लेकिन साक्ष्यों की सुरक्षा में गंभीर लापरवाही जरूर बरती गई।

जांच समिति ने पूर्व जज द्वारा दिए गए स्पष्टीकरणों, विशेष रूप से 22 मार्च 2025 को दाखिल किए गए उनके जवाब को सिरे से खारिज कर दिया। समिति का मानना था कि उनका रुख पूरी तरह से टालमटोल वाला था, जो एक उच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की संस्थागत जिम्मेदारी और पारदर्शिता के अनुरूप नहीं था। उपलब्ध साक्ष्यों और स्वतंत्र गवाहों के बयानों के आधार पर यह तीसरा आरोप भी साबित पाया गया।

आगे की कानूनी कार्रवाई और प्रक्रिया

जांच समिति ने अपनी इस अंतिम और निर्णायक रिपोर्ट के साथ-साथ संपूर्ण कार्यवाही का आधिकारिक रिकॉर्ड, संबंधित दस्तावेज और संकलित साक्ष्य सक्षम प्राधिकारी को सौंप दिए हैं। अब इस रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर देश के कानून और निर्धारित नियमों के अनुसार आगे की आवश्यक और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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