
Uttarakhand News: उत्तराखंड की राजनीति में पौड़ी से एक अहम खबर सामने आई है। पूर्व विधायक और पौड़ी नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष यशपाल बेनाम ने भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। करीब आठ साल तक भाजपा से जुड़े रहने के बाद उन्होंने पार्टी से अलग होने का फैसला किया। पौड़ी में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान बेनाम ने अपने इस्तीफे की घोषणा की। उनके इस कदम के बाद प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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कविता के जरिए जाहिर की नाराजगी
यशपाल बेनाम ने अपने इस्तीफे की घोषणा के दौरान कविता भी पढ़ी। उन्होंने कहा कि भाजपा में रहते हुए पिछले आठ वर्षों में उन्होंने पार्टी के आदेशों का पालन किया, लेकिन अब वह ऐसा नहीं करेंगे। बेनाम के मुताबिक, उन्हें महसूस होने लगा था कि पार्टी में उनकी क्षमताओं का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हो रहा है। इसी वजह से उन्होंने भाजपा से अलग होने का निर्णय लिया। हालांकि, उन्होंने पार्टी छोड़ने के बाद किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होने की घोषणा नहीं की है।
जल्द बड़े ऐलान की बात, अगले कदम पर सस्पेंस
इस्तीफे के बाद यशपाल बेनाम ने अपने भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर जल्द बड़ी घोषणा करने की बात कही है। फिलहाल उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह आगे किस राजनीतिक दिशा में बढ़ेंगे या किसी दूसरे दल का हिस्सा बनेंगे। उन्होंने अपने इस्तीफे को व्यक्तिगत निर्णय बताया। उनके इस फैसले से पौड़ी और उत्तराखंड की राजनीति में उनके अगले कदम को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं। अब उनके आगामी बयान पर राजनीतिक दलों और समर्थकों की नजर रहेगी।
निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत चुके हैं विधानसभा चुनाव

यशपाल बेनाम का पौड़ी की राजनीति में लंबा अनुभव रहा है। वह पौड़ी नगर पालिका के तीन बार अध्यक्ष रह चुके हैं। वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पौड़ी सीट से जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में उन्होंने तत्कालीन शिक्षा मंत्री नरेंद्र सिंह भंडारी और भाजपा के वरिष्ठ नेता तीरथ सिंह रावत को पराजित किया था। उनकी इस जीत ने उन्हें क्षेत्र की राजनीति में एक मजबूत पहचान दिलाई थी।
2018 में भाजपा के टिकट पर बने थे नगर पालिका अध्यक्ष
वर्ष 2018 में यशपाल बेनाम ने भाजपा के टिकट पर नगर पालिका का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी। इसके बाद वह पार्टी से जुड़े रहे। अब आठ साल बाद उनके इस्तीफे ने एक बार फिर उनके राजनीतिक भविष्य को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। उनके पुराने चुनावी प्रदर्शन और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक अनुभव को देखते हुए उनके अगले फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
18 अक्टूबर की तारीख से जुड़ा इस्तीफे का संयोग
यशपाल बेनाम ने अपने इस्तीफे के साथ 18 अक्टूबर की तारीख का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि आठ साल पहले इसी तारीख को वह भाजपा में शामिल हुए थे और संयोग से आठ साल बाद इसी दिन उन्होंने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया। बेनाम ने आरोप लगाया कि पार्टी के कई नेताओं ने उन्हें समझने की कोशिश नहीं की, जिसके कारण वह खुद को असहज महसूस कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वह ऐसी परिस्थितियों में रहने के आदी नहीं हैं। हालांकि, भाजपा की ओर से इस मामले पर प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।











