Xi Jinping India Visit: सात साल बाद भारत आ रहे जिनपिंग, मोदी संग बैठक में क्या होगा बड़ा फैसला

सात साल बाद भारत आ रहे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की BRICS यात्रा पर पूरी दुनिया की नजर है। मोदी-जिनपिंग बातचीत से भारत-चीन व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। लेकिन सीमा विवाद, निवेश प्रतिबंध और कारोबारी बाधाएं अब भी बड़ी चुनौती हैं। क्या दोनों देश भरोसे की नई शुरुआत करेंगे?

Xi Jinping India Visit

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 10, 2026

Xi Jinping India Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 से 13 सितंबर तक नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत पहुंचेंगे। लंबे अंतराल के बाद होने वाली यह यात्रा भारत और चीन के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को आगे बढ़ाने के साथ व्यापार, निवेश और कारोबारी सहयोग के नए अवसर तलाशने पर चर्चा होने की संभावना है।

सात साल बाद भारत दौरे पर शी जिनपिंग

शी जिनपिंग का यह दौरा करीब सात वर्षों बाद भारत की उनकी पहली यात्रा होगी। ऐसे समय में यह दौरा हो रहा है जब नई दिल्ली और बीजिंग के बीच उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद को मजबूत करने के प्रयास जारी हैं। दोनों देश व्यावहारिक सहयोग के नए क्षेत्रों पर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में ब्रिक्स सम्मेलन दोनों नेताओं को आर्थिक और रणनीतिक विषयों पर विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराएगा।

व्यापार और निवेश पर रह सकता है खास फोकस

भारत और चीन के बीच बढ़ता व्यापार दोनों देशों के आर्थिक संबंधों की अहम तस्वीर पेश करता है। संभावित द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार बढ़ाने, निवेश को प्रोत्साहित करने और कारोबार के नए क्षेत्रों की पहचान करने पर जोर दिया जा सकता है। इसके साथ ही तकनीक, आपूर्ति श्रृंखला और औद्योगिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में अवसर तलाशने की संभावना भी बनी हुई है।

2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार 151.10 अरब डॉलर पहुंचा

बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और चीन के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 151.10 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में करीब 18.31 प्रतिशत अधिक है। आंकड़ों के अनुसार, चीन को भारत का निर्यात 36.62 प्रतिशत बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया, जबकि चीन से आयात 16.03 प्रतिशत बढ़कर 131.63 अरब डॉलर दर्ज किया गया।

2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार
2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार

निर्यात बढ़ने के बावजूद व्यापार घाटा बड़ी चुनौती

द्विपक्षीय कारोबार में तेजी के बावजूद भारत के लिए व्यापार घाटा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। भारत का चीन से आयात उसके निर्यात की तुलना में काफी अधिक है। ऐसे में दोनों देशों के बीच संभावित वार्ता में भारतीय उत्पादों के लिए चीनी बाजार में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने और व्यापार संतुलन सुधारने के उपायों पर चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है।

वांग यी ने आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर दिया था जोर

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने पिछले वर्ष जुलाई में भारत और चीन के बीच व्यापार को नई ऊंचाई पर पहुंचने की बात कही थी। उन्होंने दोनों देशों से अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने की अपील की थी। साथ ही कारोबारी गतिविधियों में आने वाली बाधाओं को दूर करने और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया था।

ब्रिक्स मंच पर भारत की आर्थिक प्राथमिकताएं

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान व्यापार और निवेश के विस्तार को प्रमुख आर्थिक प्राथमिकताओं में रखा गया है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच कारोबार के अवसर बढ़ाना, ग्लोबल वैल्यू चेन को मजबूत करना और आर्थिक सहयोग को व्यापक बनाना है। भारत इस मंच के जरिए सदस्य देशों के बीच व्यावसायिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दे रहा है।

ब्रिक्स इकोनॉमिक पार्टनरशिप 2030 पर आगे बढ़ा काम

जयपुर में आयोजित ब्रिक्स ट्रेड मंत्रियों की बैठक में सदस्य देशों ने ‘ब्रिक्स इकोनॉमिक पार्टनरशिप 2030’ की रणनीति पर काम आगे बढ़ाया। इस पहल का उद्देश्य व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना तथा सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग के लिए बेहतर माहौल तैयार करना है। ऐसे में आगामी शिखर सम्मेलन में इस एजेंडे को उच्चस्तरीय राजनीतिक समर्थन मिलने की उम्मीद है।

मोदी-शी वार्ता
मोदी-शी वार्ता

मोदी-शी वार्ता से नई उम्मीदें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की पिछली बातचीत में भी व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने तथा व्यापार घाटे को कम करने की जरूरत पर चर्चा हुई थी। आगामी मुलाकात में इन मुद्दों को आगे बढ़ाने की संभावना है। दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को स्थिर और व्यावहारिक दिशा देने के लिए कारोबारी बाधाओं को कम करना अहम हो सकता है।

ब्रिक्स सम्मेलन भारत-चीन रिश्तों के लिए अहम

शी जिनपिंग की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब दोनों देश अपने संबंधों में व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने के अवसर तलाश रहे हैं। ब्रिक्स सम्मेलन इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। यदि व्यापार, निवेश, तकनीक और सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति होती है, तो भारत-चीन आर्थिक रिश्तों को आने वाले समय में नई दिशा मिल सकती है।

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