Iran Protest: मध्य पूर्व में गहराते तनाव के बीच रूस ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। वाशिंगटन द्वारा ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के संकेतों पर मॉस्को ने सख्त रुख अपनाते हुए इसे पूरी तरह से ‘अस्वीकार्य’ करार दिया है। रूस के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि ईरान पर किसी भी प्रकार का हमला न केवल मध्य पूर्व की स्थिरता को ध्वस्त कर देगा, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए विनाशकारी परिणाम लेकर आएगा। रूस ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह न केवल सैन्य बल की धमकी दे रहा है, बल्कि टैरिफ बढ़ाने जैसे आर्थिक हथकंडों के जरिए ईरान के मित्र देशों को डरा-धमका रहा है, जो सीधे तौर पर ‘अंतरराष्ट्रीय ब्लैकमेलिंग’ है।
रूस का दावा: ‘ईरान के विद्रोह के पीछे विदेशी साजिश’
रूस ने ईरान में चल रहे हिंसक प्रदर्शनों के पीछे पश्चिमी ताकतों का हाथ होने का गंभीर आरोप लगाया है। रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, ईरान में जो असंतोष दिख रहा है, उसकी जड़ें पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में छिपी हैं। इन प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाई, जिससे सामाजिक तनाव पैदा हुआ। मॉस्को का मानना है कि बाहरी ताकतें अब इस स्थिति का अनुचित लाभ उठाकर तेहरान की सरकार को अस्थिर करने और देश को बर्बादी की ओर धकेलने की कोशिश कर रही हैं। रूस ने यहाँ तक दावा किया कि प्रदर्शनों की आड़ में कुछ ‘प्रशिक्षित हथियारबंद’ लोग हिंसा फैला रहे हैं, जिन्हें विदेशों से निर्देश मिल रहे हैं।
ट्रंप का ‘ट्रुथ सोशल’ पर संदेश: ‘मदद जल्दी आ रही है’
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख में कोई नरमी नहीं दिख रही है। ट्रंप ने घोषणा की है कि जब तक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक बल का प्रयोग बंद नहीं होता, वे ईरानी अधिकारियों के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं करेंगे। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ईरानी नागरिकों को संबोधित करते हुए एक विवादास्पद पोस्ट लिखी। ट्रंप ने लिखा, “ईरानी देशभक्तों, प्रदर्शन जारी रखो… मदद जल्दी आ रही है।” उनके इस संदेश को ईरान पर संभावित सैन्य हस्तक्षेप की सबसे बड़ी चेतावनी माना जा रहा है। हालांकि, जब पत्रकारों ने उनसे इस ‘मदद’ के स्वरूप के बारे में पूछा, तो उन्होंने रहस्यमयी अंदाज में कहा, “यह आपको खुद पता लगाना होगा।”
मानवाधिकार संकट: 2,000 से अधिक मौतों का अनुमान
मानवाधिकार निगरानीकर्ताओं और स्वतंत्र एजेंसियों के अनुसार, ईरान में स्थिति भयावह होती जा रही है। प्रदर्शनों के दौरान अब तक मरने वालों की संख्या 2,000 का आंकड़ा पार कर गई है। ट्रंप ने अपने भाषणों में स्पष्ट किया है कि ईरानी शासन को प्रदर्शनकारियों की हत्या के लिए “बड़ी कीमत” चुकानी होगी। उन्होंने ईरान के नेतृत्व को ‘अत्याचारी’ करार देते हुए दुनिया भर से उनके खिलाफ खड़े होने का आह्वान किया है। ट्रंप का यह रुख उनके उस पुराने बयान से बिल्कुल उलट है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेहरान वॉशिंगटन के साथ वार्ता की मेज पर आना चाहता है।
रूस ने अपने नागरिकों के लिए जारी की एडवाइजरी
बढ़ती हिंसा और अस्थिरता को देखते हुए रूस ने अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए हैं। रूसी विदेश मंत्रालय ने ईरान में रह रहे रूसी नागरिकों को सलाह दी है कि वे सतर्क रहें और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों या विरोध प्रदर्शन वाली जगहों पर जाने से बचें। मॉस्को ने उम्मीद जताई है कि ईरान में स्थिति जल्द ही सामान्य होगी, लेकिन अमेरिका की सैन्य धमकी ने इस क्षेत्र में कूटनीतिक समाधान की गुंजाइश को काफी कम कर दिया है।
मध्य पूर्व में बदलता शक्ति संतुलन
ईरान में चल रहा यह संकट केवल एक आंतरिक विद्रोह नहीं रह गया है, बल्कि यह रूस और अमेरिका के बीच एक नए ‘प्रॉक्सी वॉर’ (Proxy War) का केंद्र बनता जा रहा है। जहाँ अमेरिका इसे ‘आजादी की जंग’ बताकर समर्थन दे रहा है, वहीं रूस इसे एक संप्रभु राष्ट्र की संप्रभुता का उल्लंघन मान रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस तनाव को कम करने के लिए कोई ठोस कदम उठाता है या मध्य पूर्व एक और बड़े युद्ध की आग में झोंक दिया जाएगा।










