Women Reservation Bill: संसद के विशेष सत्र में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण संशोधन विधेयक) पेश होते ही सदन का माहौल गरमा गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। जहाँ कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए, वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का करारा जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है।
कांग्रेस का विरोध और अमित शाह का पलटवार
विधेयक पेश होते ही कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि पूरा देश देख रहा है कि सोनिया गांधी ने 2023 में ही इस बिल को लागू करने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने देरी की। वेणुगोपाल ने सरकार पर ‘संविधान को हाइजैक’ करने का गंभीर आरोप लगाया।
कांग्रेस के इन आरोपों पर गृह मंत्री अमित शाह तुरंत खड़े हुए और आक्रामक अंदाज में कहा, “हम विपक्ष को कसकर जवाब देंगे।” शाह ने प्रक्रियात्मक आपत्ति जताते हुए कहा कि अभी बिल के ‘मेरिट’ (गुण-दोष) पर चर्चा करने का समय नहीं है। नियमों के अनुसार, वर्तमान चरण केवल विधेयक को सदन के पटल पर पुनर्स्थापित करने का है, विस्तृत बहस बाद में होगी।
जाति जनगणना पर भिड़ंत
सदन में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और अमित शाह के बीच ‘जाति जनगणना’ को लेकर सीधी और तीखी बहस हुई। अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि सरकार जनगणना का इंतज़ार क्यों नहीं कर रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इसलिए जल्दबाजी कर रही है क्योंकि विपक्ष ‘जाति जनगणना’ की मांग पर अड़ा है।
अमित शाह का स्पष्टीकरण
अखिलेश यादव के सवालों का जवाब देते हुए शाह ने देश को आश्वस्त किया कि जनगणना की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। उन्होंने सपा नेताओं के उस दावे को खारिज किया जिसमें कहा गया था कि जनगणना के फॉर्म में जाति का कॉलम नहीं है। शाह ने कहा, वर्तमान में ‘घरों की गिनती’ हो रही है और घरों की कोई जाति नहीं होती। जब वास्तविक जनगणना (Counting of Persons) का चरण शुरू होगा, तो उसमें जाति का कॉलम निश्चित रूप से होगा। सरकार जातीय जनगणना कराने का निर्णय पहले ही ले चुकी है।
धर्म आधारित आरक्षण पर सरकार का सख्त स्टैंड
चर्चा के दौरान अमित शाह ने एक और महत्वपूर्ण नीतिगत स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता है। शाह ने जोर देकर कहा कि मुसलमानों को धर्म के आधार पर आरक्षण देना असंवैधानिक है और सरकार ऐसी किसी भी मांग को स्वीकार नहीं करेगी।
किरेन रिजिजू की नसीहत
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्षी सांसदों के शोर-शराबे पर आपत्ति जताई। उन्होंने कांग्रेस और अन्य दलों से कहा कि वे सदन की गरिमा बनाए रखें और केवल उन्हीं मुद्दों पर डिबेट करें जो हाउस की कार्यसूची में शामिल हैं। उन्होंने ‘संविधान हाइजैक’ जैसे बयानों को अनावश्यक और निराधार बताया।
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