Women Reservation Bill: महिला आरक्षण पर मैथिली ठाकुर का बड़ा बयान, ‘सदन में अब गूंजेगी महिलाओं की आवाज’

महिला आरक्षण विधेयक पर बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कदम को ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि 33% आरक्षण से लोकसभा चुनाव में सकारात्मक बदलाव आएंगे। वहीं, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने विपक्ष से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि 2029 तक महिलाओं को उनका अधिकार देना सरकार का मुख्य संकल्प है।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 16, 2026

Women Reservation Bill: विपक्ष के कड़े विरोध के बीच बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर ने महिला आरक्षण बिल को लेकर देश की महिलाओं को बधाई दी है। गुरुवार (16 अप्रैल, 2026) को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह एक ऐतिहासिक कदम है। मैथिली ठाकुर के अनुसार, यदि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलता है, तो आने वाले लोकसभा चुनाव में इसके बेहद सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस आरक्षण के लागू होने से सदन में महिलाओं से जुड़े मुद्दों को अधिक मजबूती और प्रमुखता के साथ उठाया जा सकेगा।

महिला नेतृत्व की शक्ति

बताते चले कि, मैथिली ठाकुर ने महिला नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि जब एक महिला नेतृत्व संभालती है, तो वह समाज के हर वर्ग का ध्यान रखती है और सेवा भाव से कार्य करती है। उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि यह केवल नीतिगत बदलाव नहीं है, बल्कि बिहार सहित पूरे भारतवर्ष की महिलाएँ इस बात से उत्साहित हैं कि उनकी सीटें बढ़ रही हैं और उन्हें अपना वास्तविक हक मिल रहा है। विपक्ष द्वारा किए जा रहे विरोध पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं और विपक्ष को भी अपना पक्ष रखने का अधिकार है, लेकिन यह पहल महिला सशक्तिकरण के लिए अनिवार्य है।

ललन सिंह की अपील

दूसरी ओर, जेडीयू नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने इस मुद्दे पर विपक्ष से विरोध की राजनीति छोड़कर सहयोग करने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है कि वर्ष 2029 के चुनावों तक महिलाओं को 33% आरक्षण का लाभ हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। ललन सिंह ने इसे एक ऐतिहासिक, दूरदर्शी और परिवर्तनकारी पहल करार दिया। उनके अनुसार, यह कदम देश की लोकतांत्रिक संरचना को अधिक संतुलित, समावेशी और मजबूत बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

निर्णय प्रक्रिया में आधी आबादी की भागीदारी

केंद्रीय मंत्री ने तर्क दिया कि देश की लगभग 50% आबादी महिलाओं की है। ऐसे में उन्हें उचित प्रतिनिधित्व देना और निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करना केवल एक राजनीतिक नीति नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा में एक आवश्यक कदम है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जब देश की आधी आबादी को उनका अधिकार देने की बात हो रही है, तो ऐसे में विरोध करने का कोई तर्कसंगत औचित्य नहीं बनता। यह समय दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका को स्वीकार करने का है।

2029 के लिए तैयार होता नया खाका

इस विधेयक के पारित होने से भारतीय राजनीति का परिदृश्य पूरी तरह बदलने की उम्मीद है। जहाँ एक तरफ बीजेपी और उसके सहयोगी दल इसे मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं, वहीं विपक्ष सीटों के आवंटन और लागू होने की समयसीमा को लेकर सवाल उठा रहा है। हालांकि, मैथिली ठाकुर और ललन सिंह जैसे नेताओं के बयानों ने साफ कर दिया है कि सरकार इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है और 2029 के चुनाव तक इसे धरातल पर उतारने की पूरी तैयारी है।