UP News: मायावती ने रखी ‘आरक्षण के अंदर आरक्षण’ की मांग, नीले रंग को बताया बसपा की असली पहचान
उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में सीटों का संभावित गणित
2011 की जनगणना के आधार पर जो संभावित आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे चौंकाने वाले हैं। परिसीमन के बाद सबसे बड़ा बदलाव उत्तर प्रदेश में देखने को मिल सकता है।
उत्तर प्रदेश: यहाँ लोकसभा की मौजूदा 80 सीटें बढ़कर 140 तक पहुँच सकती हैं। खास बात यह है कि महिला आरक्षण लागू होने के बाद इनमें से 46 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होने की संभावना है।
महाराष्ट्र: यहाँ सीटों की संख्या 48 से बढ़कर 79 हो सकती है, जिसमें महिलाओं के पास 26 सीटें होंगी।
बिहार: वर्तमान में 40 सीटों वाला बिहार 73 सीटों का प्रतिनिधित्व कर सकता है, जिसमें 24 महिला सांसद चुनी जा सकेंगी।
अन्य राज्य: मध्य प्रदेश (51 सीटें/17 महिला), राजस्थान (48 सीटें/16 महिला), गुजरात (43 सीटें/14 महिला) और झारखंड (23 सीटें/8 महिला) में भी सीटों की संख्या में बड़ा इजाफा होगा।
संसद में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
बीते कुछ चुनावों के आंकड़ों पर नजर डालें तो संसद में महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ी है। 2004 में जहाँ केवल 45 महिला सांसद थीं, वहीं 2019 में यह संख्या 78 और 2024 में 74 रही। नए परिसीमन और आरक्षण के बाद अनुमान है कि 2029 तक लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या बढ़कर 281 हो सकती है, जो भारतीय लोकतंत्र के लिए एक क्रांतिकारी मोड़ होगा।
सरकार के तीन प्रमुख विधेयक और विपक्षी विरोध
मोदी सरकार इस बदलाव को अमली जामा पहनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण बिल लेकर आई है:
संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026: यह महिला आरक्षण के संवैधानिक आधार को पुख्ता करेगा।
संघ राज्यक्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2026: केंद्र शासित प्रदेशों में इसके क्रियान्वयन के लिए।
परिसीमन विधेयक, 2026: इसके जरिए जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा।
राजनीतिक घमासान
‘इंडिया ब्लॉक’ (I.N.D.I.A. Block) के नेताओं ने इन विधेयकों का सामूहिक विरोध करने का फैसला किया है। विपक्ष का मुख्य मुद्दा परिसीमन के समय और उसके प्रभाव को लेकर है। दूसरी ओर, बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) ने विपक्ष से अपील की है कि इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दे पर राजनीति न की जाए और महिला सशक्तिकरण के हित में विधेयकों को सर्वसम्मति से पास कराया जाए।









