Women Reservation Bill: महिला आरक्षण पर गरमाई सियासत, उपेंद्र कुशवाहा ने विपक्ष को घेरा

क्या महिला आरक्षण बिल को लेकर देश की राजनीति में बड़ा टकराव देखने को मिल रहा है, जहां उपेंद्र कुशवाहा ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जानिए कैसे यह मुद्दा बिहार से लेकर संसद तक राजनीतिक माहौल को गर्म कर रहा है और आगे क्या बड़ा फैसला हो सकता है

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अप्रैल 20, 2026

Women Reservation Bill: संसद में महिला आरक्षण विधेयक पारित न होने के बाद राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो गया है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष लगातार विपक्ष को घेर रहा है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख और राज्यसभा सांसद Upendra Kushwaha ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है।

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सासाराम में कार्यक्रम के दौरान बयान

रविवार (19 अप्रैल 2026) को उपेंद्र कुशवाहा सासाराम में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में महिला आरक्षण बिल और परिसीमन जैसे अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि यदि यह विधेयक संसद से पारित हो जाता, तो देश की महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का सीधा लाभ मिलता और यह महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होता।

विपक्ष पर गंभीर आरोप

उपेंद्र कुशवाहा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी भूमिका के कारण यह महत्वपूर्ण विधेयक पारित नहीं हो सका। उनके अनुसार, विपक्ष ने महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने वाले इस कदम का समर्थन नहीं किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि संसद में विपक्ष के रवैये को जनता ने बारीकी से देखा है और इससे उनकी सोच और नीयत स्पष्ट हो गई है।

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परिसीमन को लेकर पुरानी मांग

कुशवाहा ने परिसीमन के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से इस विषय पर अभियान चला रहे हैं। उनके अनुसार, यदि परिसीमन लागू होता है तो बिहार में लोकसभा सीटों की संख्या 40 से बढ़कर 60 हो सकती है, जबकि विधानसभा सीटें 243 से बढ़कर 365 तक पहुंच सकती हैं। उन्होंने कहा कि इससे जनप्रतिनिधित्व और अधिक प्रभावी होगा और राज्यों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में उचित राजनीतिक भागीदारी मिल सकेगी।

महिला आरक्षण से जुड़ा लाभ

उन्होंने यह भी कहा कि अगर महिला आरक्षण विधेयक लागू हो जाता और परिसीमन भी होता, तो बढ़ी हुई सीटों पर महिलाओं की भागीदारी और अधिक बढ़ जाती। इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की भूमिका मजबूत होती और उन्हें राजनीति में अधिक अवसर मिलते।

22 अप्रैल को विरोध मार्च का ऐलान

राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने घोषणा की है कि वह 22 अप्रैल को पूरे बिहार में जिला मुख्यालयों पर विरोध मार्च आयोजित करेगा। इस आंदोलन का उद्देश्य महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष दोनों पर दबाव बनाना है।

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