
Wholesale Price Index : देश में थोक महंगाई का दबाव सितंबर 2026 में और बढ़ गया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर अगस्त के 9.92 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 11.39 प्रतिशत हो गई। जुलाई के अंतिम आंकड़ों में यह दर 9.78 प्रतिशत दर्ज की गई थी। थोक मूल्य सूचकांक भी अगस्त के 110.8 से बढ़कर सितंबर में 112.5 पर पहुंच गया। ईंधन, बिजली, खाद्य पदार्थों और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी को इस उछाल की प्रमुख वजह बताया गया है।
ईंधन और बिजली श्रेणी में सबसे ज्यादा दबाव
महंगाई बढ़ने में ईंधन और बिजली क्षेत्र की अहम भूमिका रही। इस श्रेणी की महंगाई दर अगस्त के 22.93 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 25.85 प्रतिशत हो गई। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की महंगाई दर में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। यह अगस्त के 34.41 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 57.32 प्रतिशत तक पहुंच गई। खनिज तेलों में महंगाई दर 40.02 प्रतिशत रही, जबकि कोयले और लिग्नाइट की दर 1.57 प्रतिशत से बढ़कर 9.31 प्रतिशत हो गई। बिजली की कीमतों में हालांकि मामूली राहत रही और महंगाई दर माइनस 0.43 प्रतिशत दर्ज की गई।

खाद्य वस्तुओं की महंगाई ने बढ़ाई चिंता
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का असर भी थोक महंगाई के आंकड़ों में दिखाई दिया। खाद्य पदार्थों और विनिर्मित खाद्य उत्पादों को शामिल करने वाला WPI फूड इंडेक्स अगस्त के 7.05 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 8.66 प्रतिशत हो गया। खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर भी 5.67 प्रतिशत से बढ़कर 8.14 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके विपरीत, विनिर्मित खाद्य उत्पादों की महंगाई दर में मामूली गिरावट आई और यह 9.65 प्रतिशत से घटकर 9.44 प्रतिशत रही। प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई दर भी बढ़कर 8.67 प्रतिशत पर पहुंच गई।
विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी
औद्योगिक क्षेत्र में भी महंगाई का दबाव बढ़ा है। थोक मूल्य सूचकांक में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखने वाले विनिर्मित उत्पादों की महंगाई दर अगस्त के 8.37 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 9.76 प्रतिशत हो गई। बुनियादी धातुओं की महंगाई दर 10.88 प्रतिशत से बढ़कर 16.96 प्रतिशत दर्ज की गई। रसायनों और रासायनिक उत्पादों में यह दर 16.74 प्रतिशत रही। कपड़ा उद्योग में 13.85 प्रतिशत, रबर और प्लास्टिक उत्पादों में 13.47 प्रतिशत तथा बिजली के उपकरणों में 11.93 प्रतिशत महंगाई दर्ज की गई। कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की महंगाई दर भी नकारात्मक स्तर से निकलकर 4 प्रतिशत पर पहुंच गई।

वित्त वर्ष की पहली छमाही में भी दबाव
अप्रैल से सितंबर 2026 तक चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में संचयी थोक महंगाई दर 9.85 प्रतिशत रही। इसी अवधि में ईंधन और बिजली श्रेणी की संचयी महंगाई 25.31 प्रतिशत तथा विनिर्मित उत्पादों की 8.08 प्रतिशत दर्ज की गई। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में थोक महंगाई में 0.20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।
उत्पादन लागत बढ़ने का क्या होगा असर?
सरकार की ओर से जारी शुरुआती उत्पादक मूल्य सूचकांक आंकड़ों के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र का ट्रायल इनपुट PPI अगस्त के 104.2 से बढ़कर सितंबर में 106.1 हो गया। इससे संकेत मिलता है कि उत्पादकों की इनपुट लागत बढ़ रही है। इसका असर आगे वस्तुओं की कीमतों और उद्योगों की लागत पर पड़ सकता है। अक्टूबर 2026 के थोक महंगाई के आंकड़े 16 नवंबर को जारी किए जाने निर्धारित हैं।
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