Goa News: गोवा के किसानों की चमकेगी किस्मत? सरकार ने बनाया नया प्लान

Goa News: गोवा सरकार ने स्थानीय किसानों की उपज को नई पहचान दिलाने और उनकी कमाई बढ़ाने के लिए ‘गोवा फ्रेश’ नाम से एक नई पहल शुरू की है। इसके तहत गोवा में उगने वाली सब्जियां, फल, काजू, नारियल और फूल एक ब्रांड के तहत बाजार में बेचे जाएंगे। सरकार की कोशिश है कि स्थानीय किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बड़े बाजार मिलें और उन्हें उनकी फसल का बेहतर दाम मिल सके। इसके साथ ही दूसरे राज्यों से आने वाली कृषि उपज पर गोवा की निर्भरता कम करने की भी तैयारी है। क्या है Goa Fresh योजना ?

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 14, 2026

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Goa News: गोवा सरकार ने स्थानीय किसानों की उपज को नई पहचान दिलाने और उनकी कमाई बढ़ाने के लिए ‘गोवा फ्रेश’ नाम से एक नई पहल शुरू की है। इसके तहत गोवा में उगने वाली सब्जियां, फल, काजू, नारियल और फूल एक ब्रांड के तहत बाजार में बेचे जाएंगे। सरकार की कोशिश है कि स्थानीय किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बड़े बाजार मिलें और उन्हें उनकी फसल का बेहतर दाम मिल सके। इसके साथ ही दूसरे राज्यों से आने वाली कृषि उपज पर गोवा की निर्भरता कम करने की भी तैयारी है।

क्या है Goa Fresh योजना ?

क्या है Goa Fresh योजना ?

बताते चले कि, ‘गोवा फ्रेश’ राज्य सरकार के ‘स्वयंपूर्ण गोवा’ कार्यक्रम का हिस्सा है। इस पहल के जरिए स्थानीय कृषि उत्पादों की पैकेजिंग, गुणवत्ता और बाजार में पहचान को बेहतर बनाया जाएगा। सरकार चाहती है कि गोवा में पैदा होने वाली उपज को एक खास ब्रांड के तहत बेचा जाए, ताकि ग्राहक आसानी से स्थानीय उत्पादों को पहचान सकें। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के मुताबिक, इस योजना का मकसद स्थानीय किसानों और कारोबारियों को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर देना है।

किसानों को होटल और सुपरमार्केट तक मिलेगी सीधी पहुंच

आपको बता दे कि, सरकार ‘गोवा फ्रेश’ के जरिए किसानों को होटल, रेस्तरां, किराना दुकानों, बड़े सुपरमार्केट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने की योजना बना रही है। इसके लिए किसान उत्पादक संगठनों यानी FPOs और स्वयं सहायता समूहों की मदद ली जाएगी। राज्य के बागवानी निगम के बिक्री केंद्रों को भी इस व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए केवल स्थानीय मंडियों या बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वहीं, होटल और रेस्तरां जैसे बड़े खरीदारों को भी स्थानीय स्तर पर ताजा कृषि उत्पाद मिल सकेंगे।

दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियों पर निर्भरता घटाने की तैयारी

दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियों पर निर्भरता घटाने की तैयारी

गोवा में खाने-पीने की कई चीजों की आपूर्ति दूसरे राज्यों से होती है। कोरोना महामारी के दौरान सप्लाई में आई रुकावटों ने इस निर्भरता से जुड़ी चुनौतियों को सामने ला दिया था। इसके बाद स्थानीय स्तर पर कृषि उत्पादन और खरीद बढ़ाने पर जोर दिया गया। सरकार के मुताबिक, पिछले छह वर्षों में गोवा में उगाई जाने वाली सब्जियों की स्थानीय खरीद दोगुने से ज्यादा हो गई है। अब ‘गोवा फ्रेश’ के जरिए इस व्यवस्था को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

सब्जियां, फल, काजू और फूल होंगे Goa Fresh ब्रांड का हिस्सा

शुरुआती दौर में इस योजना के तहत मौसमी सब्जियों, स्थानीय फलों, नारियल, काजू और गेंदा जैसे फूलों की बिक्री पर ध्यान दिया जाएगा। खेती से तैयार होने वाले प्रसंस्कृत उत्पादों को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। गोवा में खेती करने वाले किसानों को छोटी जोत, मजदूरी की ऊंची लागत और बिचौलियों के कारण कई बार कम मुनाफा मिलता है। ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि बड़े खरीदारों से सीधा संपर्क होने पर किसानों को बेहतर कीमत मिल सकेगी।

किसानों को ₹27.8 करोड़ की मदद

किसानों को ₹27.8 करोड़ की मदद

गोवा सरकार के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में सुनिश्चित बाजार योजना के तहत किसानों को सीधे 27.8 करोड़ रुपये से ज्यादा की सहायता दी गई है। इसके अलावा, कोडार स्थित भारत-इजरायल उत्कृष्टता केंद्र से सब्जियों और गेंदा फूलों के तीन लाख से अधिक उन्नत पौधे वितरित किए गए हैं। कृषि उत्पादों की पैकेजिंग और बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने के लिए मोपा में APEDA मानकों के अनुरूप आधुनिक पैकहाउस भी विकसित किया जा रहा है।

Goa Fresh से किसानों की कमाई बढ़ाने पर सरकार का जोर

सरकार इस पहल के तहत बेहतर पैकेजिंग, गुणवत्ता के मानकों, भंडारण और परिवहन की सुविधाओं पर भी काम कर रही है। किसान समूहों को मजबूत बनाने और कृषि उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए कर्ज सहायता और आधुनिक सुविधाओं में निवेश की योजना है। आगे चलकर इस मॉडल को मत्स्य पालन जैसे अन्य स्थानीय क्षेत्रों तक भी बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। अब इस पहल का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि किसानों को बड़े खरीदारों से कितनी नियमित खरीद मिलती है और उनकी उपज के लिए कितना बेहतर दाम सुनिश्चित हो पाता है।