Satua Baba Magh Mela: माघ मेले में सतुआ बाबा का जलवा! ब्रांडेड चश्मे और करोड़ों की स्पोर्ट्स कार देख लोग रह गए दंग

प्रयागराज माघ मेले में इन दिनों 'सतुआ बाबा' अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल और 5 करोड़ की महंगी कारों (पोर्श और लैंड रोवर) को लेकर सुर्खियों में हैं। साधारण संतोष तिवारी से लेकर विष्णुस्वामी संप्रदाय के पीठाधीश्वर बनने तक का उनका सफर काफी दिलचस्प है। ब्रांडेड एक्सेसरीज और चार्टर्ड प्लेन के शौकीन इस आधुनिक संत के बारे में विस्तार से जानें।

Satua Baba Magh Mela

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जनवरी 15, 2026

Satua Baba Magh Mela: प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में इन दिनों भक्ति के साथ-साथ आधुनिक विलासिता का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। इस चर्चा के केंद्र में हैं सतुआ बाबा, जिनकी जीवनशैली किसी फिल्मी सितारे या बड़े कॉर्पोरेट दिग्गज से कम नहीं है। उनके शिविर के बाहर भक्तों की भीड़ केवल आशीर्वाद लेने के लिए ही नहीं, बल्कि बाबा की महंगी कारों के साथ सेल्फी लेने के लिए भी उमड़ रही है। ब्रांडेड चश्मों और लग्जरी एक्सेसरीज के शौकीन यह संत पारंपरिक वैराग्य की परिभाषा को चुनौती देते नजर आ रहे हैं।

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लैंड रोवर और पोर्श के साथ आध्यात्मिक वैभव

बताते चले कि, सतुआ बाबा के माघ मेले में आगमन ने तब सुर्खियां बटोरी, जब वे अपनी लैंड रोवर डिफेंडर के साथ पहुंचे। लेकिन आश्चर्य का सिलसिला यहीं नहीं रुका; हाल ही में उनके बेड़े में पोर्श 911 टर्बो भी शामिल हो गई है। इन दोनों गाड़ियों की संयुक्त कीमत 5 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है। जब यह स्पोर्ट्स कार मेले में उनके शिविर पहुंची, तो बाकायदा वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ इसका पूजन किया गया। बाबा के इस ‘रॉयल’ अंदाज ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है।

संतोष तिवारी से सतुआ बाबा तक का सफर

आपको बता दे कि, अध्यात्म की चकाचौंध के पीछे एक साधारण बालक की कहानी छिपी है। सतुआ बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के मसौरा गांव में हुआ था। उनके बचपन का नाम संतोष तिवारी है। पिता शभाराम तिवारी और माता राजा बेटी के घर जन्मे संतोष ने महज 11 वर्ष की अल्पायु में ही सांसारिक मोह-माया का त्याग कर दिया था। घर छोड़ने के बाद वे काशी और अन्य धार्मिक केंद्रों पर रहकर ज्ञानार्जन करने लगे और अंततः विष्णुस्वामी संप्रदाय से जुड़ गए।

पीठाधीश्वर की उपाधि और सतुआ बाबा नाम का रहस्य

विष्णुस्वामी संप्रदाय की परंपरा के अनुसार, इस पीठ के मुखिया को ‘सतुआ बाबा’ के नाम से संबोधित किया जाता है। ब्रह्मलीन यमुनाचार्य महाराज के देवलोक गमन के बाद, संतोष तिवारी को इस प्रतिष्ठित पीठ का उत्तराधिकारी और मुखिया नियुक्त किया गया। तब से वे इसी नाम से देश-दुनिया में विख्यात हैं। वर्तमान में वे सतुआ बाबा पीठ के पीठाधीश्वर के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं और संप्रदाय की धार्मिक गतिविधियों का संचालन करते हैं।

राजनीतिक गलियारों में रसूख और चार्टर्ड प्लेन वाली लाइफस्टाइल

सतुआ बाबा की लोकप्रियता केवल भक्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी उनका काफी प्रभाव है। उन्हें कई महत्वपूर्ण अवसरों पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ देखा गया है, जिससे गलियारों में चर्चा रहती है कि वे सीएम के करीबी हैं। इतना ही नहीं, इंटरनेट पर उनकी ऐसी तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं जिनमें वे चार्टर्ड प्लेन में यात्रा करते और आराम फरमाते दिख रहे हैं। उनकी यह हाई-फाई लाइफस्टाइल उन्हें पारंपरिक साधुओं से बिल्कुल अलग और ‘मॉडर्न संत’ के रूप में स्थापित करती है।

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