Who is Agnimitra Paul : कौन हैं अग्निमित्रा पॉल? ममता जैसी फायरब्रांड नेता, बंगाल BJP में सीएम पद की दावेदार

पश्चिम बंगाल 2026 के नतीजों में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री के नाम पर सस्पेंस गहरा गया है। आसनसोल दक्षिण से 40,000 से अधिक वोटों से जीतने वाली अग्निमित्रा पॉल का नाम रेस में सबसे ऊपर है। आखिर एक फैशन डिजाइनर कैसे बनी बंगाल बीजेपी की सबसे ताकतवर महिला नेता?

Who is Agnimitra Paul

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 5, 2026

Who is Agnimitra Paul : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने पूरे देश को चौंका दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की सत्ता से ममता बनर्जी को बेदखल कर पहली बार ‘सोने का बांग्ला’ बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। इस धमाकेदार जीत के बाद अब कोलकाता के गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह तैर रहा है कि आखिर बंगाल का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? मुख्यमंत्री पद की इस रेस में कई दिग्गज नाम शामिल हैं, जिनमें सुवेंदु अधिकारी का पलड़ा सबसे भारी नजर आ रहा है, लेकिन दिलीप घोष, समीक भट्टाचार्य और अग्निमित्रा पॉल जैसे नाम भी मजबूती से उभर रहे हैं।

सुवेंदु अधिकारी: बंगाल की सियासत के नए ‘दादा’ और सबसे प्रबल दावेदार

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय सुवेंदु अधिकारी का नाम सबसे ऊपर है। महिष्य समुदाय से ताल्लुक रखने वाले सुवेंदु ने इस चुनाव में वह कर दिखाया जो कभी असंभव माना जाता था। उन्होंने ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर में जाकर उन्हें पटखनी दी। यह लगातार दूसरी बार है जब उन्होंने ममता बनर्जी को चुनाव हराया है। मेदिनीपुर क्षेत्र में अपने परिवार के जबरदस्त राजनीतिक प्रभाव और जमीनी पकड़ के कारण उन्हें ‘मास लीडर’ माना जाता है। 2020 में टीएमसी छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले सुवेंदु ने घुसपैठ, भ्रष्टाचार और संदेशखाली जैसे मुद्दों पर टीएमसी को रक्षात्मक होने पर मजबूर कर दिया। उनके पास प्रशासनिक अनुभव भी है और संगठन पर पकड़ भी, जो उन्हें मुख्यमंत्री पद का सबसे स्वाभाविक दावेदार बनाता है।

अग्निमित्रा पॉल: ममता की काट के रूप में उभरती ‘फायरब्रांड’ नेत्री

मुख्यमंत्री पद की दौड़ में अग्निमित्रा पॉल का नाम एक बड़े ‘सरप्राइज’ के तौर पर उभरा है। आसनसोल दक्षिण से विधायक अग्निमित्रा को बंगाल की राजनीति में एक लड़ाकू और तेजतर्रार नेता के तौर पर देखा जाता है। उन्होंने टीएमसी के तापस बनर्जी को 40,000 से अधिक वोटों के विशाल अंतर से हराकर अपनी ताकत दिखाई है। उनकी छवि एक ऐसी महिला नेता की है जो ममता बनर्जी की आक्रामक शैली का मुकाबला उसी की भाषा में कर सकती हैं। वर्तमान में बंगाल भाजपा की उपाध्यक्ष अग्निमित्रा ने फैशन डिजाइनिंग का सफल करियर छोड़कर राजनीति में अपनी जगह बनाई है। उन्होंने श्रीदेवी और हिलेरी क्लिंटन जैसी हस्तियों के लिए कपड़े डिजाइन किए हैं, लेकिन आज वह बंगाल के भविष्य की डिजाइन तैयार करने की रेस में हैं।

दिलीप घोष: संगठन को शून्य से शिखर तक ले जाने वाले ‘सूरमा’

अगर बंगाल में आज भाजपा सत्ता के शिखर पर है, तो इसका एक बड़ा श्रेय दिलीप घोष को जाता है। 2015 से 2021 तक प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए घोष ने भाजपा के कैडर का विस्तार किया और 2019 में पार्टी को 18 लोकसभा सीटें दिलाईं। आरएसएस की पृष्ठभूमि से आने वाले दिलीप घोष को संगठन का ‘लौह पुरुष’ माना जाता है। खड़गपुर सदर सीट से जीत दर्ज करने वाले घोष की कार्यकर्ताओं के बीच जबरदस्त लोकप्रियता है। हालांकि वह कई बार अपने बयानों को लेकर विवादों में रहे, लेकिन उनकी निष्ठा और कड़ी मेहनत ने ही बंगाल में भाजपा को एक विकल्प के रूप में खड़ा किया। मुख्यमंत्री की रेस में उन्हें नजरअंदाज करना नामुमकिन है।

समीक भट्टाचार्य: ‘भद्रलोक’ के बीच भाजपा का बौद्धिक चेहरा

मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद समीक भट्टाचार्य को भाजपा का सबसे शालीन और रणनीतिक चेहरा माना जाता है। 1971 से आरएसएस से जुड़े समीक भट्टाचार्य वैचारिक रूप से बेहद प्रखर हैं और बंगाली ‘भद्रलोक’ (सभ्य समाज) में उनकी स्वीकार्यता बहुत अधिक है। उन्हें पार्टी के भीतर गुटबाजी को खत्म करने और सभी नेताओं को एक साथ लाने का श्रेय दिया जाता है। उनकी मृदुभाषी छवि और तार्किक भाषण शैली उन्हें एक आदर्श मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाती है, जो राज्य की कानून-व्यवस्था को सुधारने के साथ-साथ राज्य की गरिमा को भी पुनर्जीवित कर सके।

रूपा गांगुली: द्रौपदी की भूमिका से बंगाल की राजनीति के केंद्र तक

‘महाभारत’ की द्रौपदी के रूप में घर-घर में पहचानी जाने वाली रूपा गांगुली ने भी सोनारपुर दक्षिण सीट से जीत दर्ज कर अपनी दावेदारी पेश की है। वह लंबे समय से बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के लिए लड़ती रही हैं। विशेष रूप से आरजी कर मेडिकल कॉलेज जैसे मामलों में उन्होंने जिस तरह सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया, उसने महिलाओं के बीच भाजपा की साख बढ़ाई। राज्यसभा सांसद के रूप में उनका अनुभव और उनकी बेबाकी उन्हें एक महत्वपूर्ण दावेदार बनाती है। महिला मतदाताओं के बीच उनकी लोकप्रियता को देखते हुए पार्टी उन पर बड़ा दांव खेल सकती है।

दिल्ली दरबार और संसदीय दल का अंतिम फैसला

बंगाल में भाजपा की यह जीत जितनी ऐतिहासिक है, मुख्यमंत्री का चयन उतना ही पेचीदा। पार्टी के सामने चुनौती यह है कि वह एक ऐसे नेता को चुने जो सुवेंदु अधिकारी की तरह आक्रामक भी हो और समीक भट्टाचार्य की तरह वैचारिक रूप से संतुलित भी। फिलहाल सुवेंदु अधिकारी रेस में सबसे आगे चल रहे हैं, लेकिन भाजपा अक्सर अपने फैसलों से चौंकाती रही है। क्या बंगाल को पहली बार कोई भाजपाई ‘भूमिपुत्र’ मुख्यमंत्री मिलेगा या फिर कोई महिला चेहरा राज्य की कमान संभालेगी? इसका फैसला जल्द ही भाजपा संसदीय दल की बैठक में होगा। फिलहाल, बंगाल की जनता एक नए सूर्योदय की प्रतीक्षा कर रही है।