Ebola Virus: दुनिया पर मंडराया महामारी का खतरा! ईबोला के नए स्ट्रेन से बढ़ी चिंता

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में तेजी से फैल रहे ईबोला वायरस को अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित कर दिया है। यह संक्रमण बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के कारण फैल रहा है, जिसके इलाज के लिए फिलहाल कोई विशेष वैक्सीन या प्रामाणिक दवा उपलब्ध नहीं है।

Ebola Virus

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मई 17, 2026

Ebola Virus: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अफ्रीकी देशों—डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में पैर पसार रहे ईबोला वायरस को ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ (PHEIC) घोषित कर दिया है। डब्ल्यूएचओ की यह आपातकालीन घोषणा इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्वास्थ्य के लिए खतरा बेहद गंभीर हो चुका है। मौजूदा समय में यह घातक संक्रमण ईबोला के ‘बुंडीबुग्यो वायरस स्ट्रेन’ के कारण तेजी से फैल रहा है, जिसे बेहद संक्रामक और जानलेवा माना जाता है। कांगो के इटुरी प्रांत में यह ईबोला का 17वां प्रकोप है, जिसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों और चिकित्सा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।

जानें इसका पुराना इतिहास

बताते चले कि, मौजूदा समय में तबाही मचा रहा बुंडीबुग्यो स्ट्रेन, पूर्व में तबाही मचाने वाले ज़ैरे वेरिएंट से काफी अलग है। अगर इसके इतिहास पर नजर डालें तो बुंडीबुग्यो वायरस का पहला मामला साल 2007-2008 में युगांडा के बुंडीबुग्यो जिले में दर्ज किया गया था। उस शुरुआती प्रकोप के दौरान इस खतरनाक स्ट्रेन ने 116 से अधिक लोगों को अपनी चपेट में ले लिया था, जिनमें से करीब 34 से 40 फीसदी मरीजों की जान चली गई थी। इस बार सबसे बड़ी और डराने वाली चुनौती यह है कि चिकित्सा विज्ञान के पास वर्तमान में इस विशिष्ट बुंडीबुग्यो वेरिएंट के इलाज के लिए न तो कोई स्वीकृत दवा है और न ही कोई विशेष वैक्सीन (टीका) उपलब्ध है।

इंसानों के लिए कितने घातक हैं ईबोला के विभिन्न स्ट्रेन

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, ईबोला संक्रमण के कई अलग-अलग प्रकार (Variants) होते हैं, लेकिन मानव आबादी में महामारी फैलाने के लिए मुख्य रूप से तीन स्ट्रेन जिम्मेदार माने जाते हैं—ज़ैरे, सूडान और बुंडीबुग्यो। इनमें से ‘ज़ैरे स्ट्रेन’ को दुनिया का सबसे खतरनाक वायरस माना जाता है, क्योंकि इसमें संक्रमित मरीजों की मृत्यु दर 60 से 90 प्रतिशत तक देखी गई है। इसके मुकाबले बुंडीबुग्यो स्ट्रेन में मृत्यु दर थोड़ी कम (32 से 40 फीसदी) आंकी गई है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में यह आंकड़ा भी 50 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि किसी भी मरीज की जान बचना उसकी उम्र, शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता और सही समय पर मिलने वाले सपोर्टिव ट्रीटमेंट पर निर्भर करता है।

उष्णकटिबंधीय जंगलों से इंसानों तक पहुंच रहा संक्रमण

विभिन्न अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य रिपोर्टों के मुताबिक, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) के घने और नमी वाले उष्णकटिबंधीय जंगलों (Tropical Rainforests) को इस वायरस का प्राकृतिक घर माना जाता है। वैज्ञानिकों और जीव विज्ञानियों का शोध बताता है कि जंगलों में रहने वाले फलभक्षी चमगादड़ (Fruit Bats) और कुछ अन्य जंगली जानवर इस जानलेवा वायरस के मुख्य वाहक या प्राकृतिक स्रोत हो सकते हैं। वन्यजीवों के संपर्क में आने से यह वायरस इंसानों में प्रवेश करता है और एक बार मानव शरीर में पहुंचने के बाद यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में अत्यधिक तीव्र गति से फैलने लगता है, जो समय पर चिकित्सा सहायता न मिलने पर देखते ही देखते महामारी का रूप ले लेता है।

शुरुआती लक्षण साधारण फ्लू जैसे

ईबोला वायरस के किसी भी स्ट्रेन से संक्रमित होने पर मरीजों में लगभग एक जैसे ही लक्षण दिखाई देते हैं। संक्रमण की शुरुआत में व्यक्ति को तेज बुखार, गंभीर सिरदर्द, मांसपेशियों व जोड़ों में तेज दर्द, अत्यधिक कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं होती हैं, जिन्हें लोग अक्सर सामान्य फ्लू समझ लेते हैं। हालांकि, बीमारी बढ़ने के साथ ही उल्टी, खूनी दस्त, पेट में ऐंठन और गले में तेज खराश शुरू हो जाती है। जब संक्रमण गंभीर स्थिति में पहुंचता है, तो मरीज की आंखों, मसूड़ों और त्वचा के रोमछिद्रों से आंतरिक रक्तस्राव (Internal Bleeding) होने लगता है। इस वायरस का इंक्यूबेशन पीरियड 2 से 21 दिनों का होता है, और अंतिम चरण में मरीज के महत्वपूर्ण अंग (Multiple Organ Failure) काम करना बंद कर देते हैं।