जब दूरदर्शन ने नहीं दिया ‘श्री कृष्णा’ को स्लॉट, विदेश में मिला सम्मान और फिर पहुंचा सुप्रीम कोर्ट तक मामला

4 सितंबर को देशभर में जन्माष्टमी का त्योहार धूमधाम से मनाया गया. ऐसे में टीवी की उस यादगार कहानी को याद करना बनता है, जब भगवान श्रीकृष्ण छोटे पर्दे पर आए तो देखते ही देखते घर-घर का हिस्सा बन गए. रामानंद सागर का ‘श्री कृष्णा’ आज भी पौराणिक टीवी सीरियलों की सबसे यादगार पेशकशों में गिना जाता है. लेकिन कम लोग जानते हैं कि इस सीरियल को देश के सबसे बड़े सरकारी चैनल पर जगह मिलने की कहानी इतनी आसान नहीं थी l बल्कि मामला इतना उलझा कि कृष्ण की कहानी को पहले भारत में ही स्लॉट नहीं मिला, फिर

Wrriten By :

Editor

Published On :

सितम्बर 4, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

4 सितंबर को देशभर में जन्माष्टमी का त्योहार धूमधाम से मनाया गया. ऐसे में टीवी की उस यादगार कहानी को याद करना बनता है, जब भगवान श्रीकृष्ण छोटे पर्दे पर आए तो देखते ही देखते घर-घर का हिस्सा बन गए. रामानंद सागर का ‘श्री कृष्णा’ आज भी पौराणिक टीवी सीरियलों की सबसे यादगार पेशकशों में गिना जाता है. लेकिन कम लोग जानते हैं कि इस सीरियल को देश के सबसे बड़े सरकारी चैनल पर जगह मिलने की कहानी इतनी आसान नहीं थी l

बल्कि मामला इतना उलझा कि कृष्ण की कहानी को पहले भारत में ही स्लॉट नहीं मिला, फिर विदेश से शुरुआत हुई, पुरस्कार मिला और आखिरकार मामला अदालत तक पहुंच गया. यही वजह है कि जन्माष्टमी के इस खास मौके पर ‘श्री कृष्णा’ का ये किस्सा किसी थ्रोबैक फिल्म से कम नहीं लगता l

दूरदर्शन ने नहीं दिया स्लॉट, विदेश में हुआ पहला पड़ाव
रामानंद सागर के बेटे प्रेम सागर ने 2020 में एक इंटरव्यू में दावा किया था कि उस दौर की राजनीतिक खींचतान की वजह से ‘श्री कृष्णा’ को दूरदर्शन पर स्लॉट नहीं मिल पाया. उनके मुताबिक, सीरियल का प्रीमियर मॉरीशस में हुआ और इसके बाद इसे कनाडा में भी प्रसारित किया गया l

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई…
प्रेम सागर के मुताबिक, इटली के रिमिनी सिनेमा फेस्टिवल में सीरियल को ब्रॉन्ज मेडल भी मिला और इसके बाद भारत में इस बात को लेकर हलचल मच गई. उनका दावा है कि मामला संसद तक में चर्चा का विषय बना. यानी जिस कृष्ण कथा को भारतीय दर्शकों के सामने लाने के लिए दरवाजे बंद नजर आ रहे थे, वही कहानी विदेश में अपनी पहचान बना रही थी l

इसके बाद 1993 में कहानी ने नया मोड़ लिया. प्रेम सागर के अनुसार, विज्ञापन जगत के दिग्गज आरके स्वामी ने नए लॉन्च हुए DD2 पर ‘श्री कृष्णा’ के प्रसारण के लिए बोली लगाई और सीरियल को सीमित भारतीय दर्शकों तक पहुंच मिली. यही वह दौर था जब कृष्ण की कथा धीरे-धीरे भारतीय टीवी दर्शकों तक पहुंचने लगी l

उपलब्ध रिकॉर्ड भी बताते हैं कि सीरियल ने 1993 में डीडी मेट्रो से प्रसारण शुरू किया था और बाद में डीडी नेशनल पर भी आया l

‘श्री कृष्णा’ की कहानी में अगला बड़ा मोड़ तब आया, जब इसके प्रसारण को लेकर कानूनी लड़ाई भी सामने आई. प्रेम सागर के मुताबिक, उस समय वकील के तौर पर प्रैक्टिस कर रहे अरुण जेटली ने उनका मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाया. इसके बाद 1996 में ‘श्री कृष्णा’ को DD1 पर सुबह 9 बजे का स्लॉट मिला. प्रेम सागर ने दावा किया कि इस स्लॉट में सीरियल ने ‘चंद्रकांता’ की जगह ली थी l

दिलचस्प बात यह है कि 1996 के दिल्ली हाई कोर्ट के एक फैसले में ‘चंद्रकांता’ के प्रसारण को अप्रैल 1996 में समाप्त करने और उसी समय ‘श्री कृष्णा’ को 28 अप्रैल से प्रसारित करने की अनुमति दिए जाने का रिकॉर्ड मिलता है. अदालत के दस्तावेज में ‘श्री कृष्णा’ के प्रसारण को लेकर दूरदर्शन की कार्रवाई का भी उल्लेख है l

कृष्ण की टीवी यात्रा सिर्फ कैमरे और सेट तक सीमित नहीं थी- इसके पीछे चैनल, स्लॉट और अदालत तक की पूरी कहानी थीl

जब DD ने आगे बढ़ाने से किया इनकार
‘श्री कृष्णा’ की कहानी आगे बढ़ी तो एक और दिलचस्प मोड़ आया. प्रेम सागर के मुताबिक, जब सीरियल को भगवद गीता और महाभारत से जुड़े हिस्सों तक ले जाने की बात आई, तो दूरदर्शन ने इसका रन आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया. इसके बाद 1999 में शो जी टीवी पर चला गया और वहां बाकी एपिसोड प्रसारित किए गए l

सागर वर्ल्ड के मुताबिक, जी टीवी ने 4 जुलाई 1999 से सीरियल को रविवार सुबह 9 से 10 बजे के स्लॉट में आगे बढ़ाया. उस समय शो की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया गया कि सागर वर्ल्ड ने ऑर्ग-मार्ग के हवाले से इसकी साप्ताहिक पहुंच 13.4 करोड़ दर्शकों तक बताई थी

फिर सोनी से लेकर 2000s तक चलता रहा कृष्ण का जादू
कहानी यहीं नहीं रुकी. पूरी सीरीज का बाद में सोनी पर भी री-टेलीकास्ट हुआ. 2001 में इसे दोबारा दिखाया गया और दूसरे क्षेत्रीय/भक्ति चैनलों पर भी इसका प्रसारण हुआ. फिर आया वो दौर जब पुरानी यादों ने नई पीढ़ी को भी पकड़ लिया l

2020 में कोरोना लॉकडाउन के दौरान जब रामायण और महाभारत के दोबारा प्रसारण ने टीवी पर तहलका मचाया, तब ‘श्री कृष्णा’ की भी वापसी हुई. दूरदर्शन ने इसे 3 मई 2020 से फिर प्रसारित किया l

सरवदमन बनर्जी बने कृष्ण, और चेहरा बन गया पहचान
रामानंद सागर के ‘श्री कृष्णा’ की सबसे बड़ी पहचान इसके कलाकार भी रहे. सर्वदमन डी. बनर्जी ने भगवान कृष्ण का किरदार निभाया, जबकि बाल कृष्ण की भूमिका में स्वप्निल जोशी नजर आए. कृष्ण के रूप में सर्वदमन बनर्जी की छवि ऐसी बनी कि उनके चेहरे को देखते ही आज भी कई दर्शकों के जेहन में वही 90s वाला कृष्ण उभर आता है l

यही इस सीरियल की असली ताकत थी- कम साधन, साधारण तकनीक और सीमित बजट के बावजूद उसने आस्था को स्क्रीन से जोड़ दिया.

जन्माष्टमी पर क्यों याद आता है ‘श्री कृष्णा’?
आज जब पौराणिक कहानियां बड़े बजट, VFX और भव्य सेट के साथ बनाई जाती हैं, तब ‘श्री कृष्णा’ को देखना एक अलग दौर में लौटने जैसा है. उस समय न आज जैसी तकनीक थी, न OTT का दौर. फिर भी जब टीवी पर कृष्ण बांसुरी लेकर आते थे, तो घरों का माहौल बदल जाता था l

और शायद यही वजह है कि ‘श्री कृष्णा’ की असली विरासत सिर्फ उसके एपिसोड या TRP में नहीं है. वो उन यादों में है, जब जन्माष्टमी के मौके पर टीवी स्क्रीन पर कान्हा आते थे और पूरा परिवार एक साथ बैठकर उनकी लीला देखा करता था l

दिलचस्प बात ये है कि जिस सीरियल को भारत में शुरुआत में प्रसारण स्लॉट हासिल करने के लिए संघर्ष  करना पड़ा, वही आगे चलकर इतना लोकप्रिय हुआ कि उसके प्रसारण का सफर डीडी मेट्रो से डीडी नेशनल, जी और सोनी तक पहुंचा l

यही ‘श्री कृष्णा’ का असली चमत्कार था- कृष्ण की कहानी को स्क्रीन पर आने से रोका जा सकता था, लेकिन दर्शकों के दिलों तक पहुंचने से नहीं.

2