WhatsApp Username Controversy: Usernames फीचर पर WhatsApp को नोटिस, सरकार ने जताई सुरक्षा चिंता

व्हाट्सऐप यूजरनेम फीचर पर रोक: केंद्र सरकार ने व्हाट्सऐप के प्रस्तावित 'यूजरनेम' फीचर पर रोलआउट से पहले ही पाबंदी लगा दी है।

WhatsApp Username Controversy

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 2, 2026

WhatsApp Username Controversy: व्हाट्सएप द्वारा पेश किए जा रहे नए ‘यूजरनेम’ फीचर ने रोलआउट होने से पहले ही तकनीकी और सुरक्षा गलियारों में खलबली मचा दी है। इस फीचर के जरिए व्हाट्सएप अपनी दशकों पुरानी मोबाइल नंबर-आधारित पहचान प्रणाली को बदलने की तैयारी में है। हालांकि, मेटा के इस प्रस्तावित कदम पर भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कंपनी को नोटिस जारी किया है और तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा है। सरकार ने फिलहाल भारत में इस फीचर को लागू करने पर रोक लगा दी है।

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क्या है व्हाट्सएप का यूजरनेम फीचर?

वर्तमान में, व्हाट्सएप पर किसी से संपर्क करने के लिए मोबाइल नंबर अनिवार्य है। इस नए फीचर का उद्देश्य यूजर को अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना बातचीत करने की सुविधा देना है। यूजरनेम के माध्यम से लोग एक-दूसरे को ढूंढ सकेंगे और संदेश भेज सकेंगे। हालांकि, अकाउंट बनाने और वेरिफिकेशन के लिए मोबाइल नंबर की आवश्यकता बनी रहेगी, लेकिन ‘प्रोफाइल विजिबिलिटी’ के स्तर पर नंबर की अनिवार्यता खत्म हो जाएगी। मेटा का दावा है कि यह फीचर यूजर की निजता (Privacy) बढ़ाने के लिए है, लेकिन यह सुविधा टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर पहले से मौजूद है।

सुरक्षा और साइबर धोखाधड़ी का खतरा

सरकार और सुरक्षा विशेषज्ञों की मुख्य चिंता ‘पहचान की गोपनीयता’ को लेकर है। विशेषज्ञों का तर्क है कि मोबाइल नंबर के बिना किसी को ट्रैक करना या उसकी असली पहचान जानना नामुमकिन हो जाएगा। इसका सीधा लाभ उन साइबर अपराधियों को मिलेगा जो फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट, और ऑनलाइन स्कैम जैसे अपराधों में लिप्त रहते हैं।

यदि कोई अपराधी किसी सरकारी विभाग, बैंक अधिकारी या किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति के नाम से मिलता-जुलता यूजरनेम बना लेता है, तो आम जनता के लिए असली और नकली की पहचान करना लगभग असंभव होगा। इससे डिजिटल ठगी के मामलों में अभूतपूर्व वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ‘गुमनामी’ (Anonymity) के इस स्तर से अपराधी खुद को सुरक्षित महसूस करेंगे और वे अधिक दुस्साहस के साथ अपराध को अंजाम दे पाएंगे।

जांच एजेंसियों के लिए बढ़ेंगी मुश्किलें

यह फीचर केवल आम जनता के लिए ही नहीं, बल्कि कानून प्रवर्तन और जांच एजेंसियों के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अरुण बोथरा सहित कई साइबर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यूजरनेम-बेस्ड आइडेंटिटी फीचर आपराधिक जांच को जटिल बना सकता है।

वर्तमान में, मोबाइल नंबर के माध्यम से पुलिस और एजेंसियां अपराधी की लोकेशन और पहचान तक आसानी से पहुंच जाती हैं। टेलीग्राम का उदाहरण देते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि इसी प्रकार की सुविधा के कारण वह अक्सर निवेश धोखाधड़ी और साइबर अपराधों का गढ़ बना रहता है। व्हाट्सएप के पास अरबों की संख्या में यूजर्स हैं, ऐसे में यह छोटी सी डिजाइन चॉइस न केवल पब्लिक सेफ्टी के लिए बड़ा खतरा बन सकती है, बल्कि जांच एजेंसियों के लिए साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया को भी बेहद कठिन बना देगी।

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