Health Tips: अक्सर ऐसा होता है कि दिन में थकान के बावदूद रात में नींद नहीं आती, ऐसे में सवाल ये आता है कि अगर नींद नहीं तो क्या बिस्तर से उठ जाना चाहिए या लेटे रहना चाहिए? ज्यादातर लोग नींद न आने की वजह से रात में उठकर घूमते रहते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार जागते हुए नींद को लगातार जागते हुए नींद को जबरदस्ती बुलाने की कोशिश उल्टा असर डाल सकती है। ऐसी स्थिति में कुछ देर के लिए बिस्तर छोड़ना एक उपयोगी तरीका हो सकता है।
Health Tips: बच्चे के जन्म के बाद क्यों बढ़ती है मानसिक परेशानी? महिलाओं
क्या है स्टिमुलस कंट्रोल तकनीक?
बताते चलें कि, इस तरीक ते स्टिमुलस कंट्रोल कहा जता है। इसका उद्देश्य दिमाग में बिस्तर और नींद के बीच सकारात्मक संबंध बनाए रखना है। मनोवैज्ञानिक रिचर्ड बूटज़िन ने 1972 में इस तकनीक को प्रस्तुत किया था। यह अनिद्रा के लिए इस्तेमाल होने वाली संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा यानी सीबीटी-आई का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस पद्धति में व्यक्ति को सलाह दी जाती है कि जब बिस्तर पर लेटे रहने से बेचैनी बढ़ने लगे, तो वह उठकर कोई शांत गतिविधि करे और नींद आने पर वापस बिस्तर पर लौटे।
नींद को जबरदस्ती लाने की कोशिश क्यों पड़ सकती है भारी?
व्यवहारिक नींद विशेषज्ञों के अनुसार, नींद ऐसी प्रक्रिया नहीं है जिसे केवल इच्छाशक्ति से तुरंत हासिल किया जा सके। जब व्यक्ति बार-बार सोचता है कि उसे अभी सोना ही है, तो वह अपनी नींद को लेकर तनावग्रस्त हो सकता है। इससे दिमाग अधिक सतर्क हो जाता है और सोना कठिन लगने लगता है। अगली सुबह कितनी थकान होगी, इसकी चिंता भी बेचैनी बढ़ा सकती है।
कितनी देर जागने के बाद बिस्तर छोड़ना चाहिए?
पहले अक्सर लगभग 20 मिनट तक नींद न आने पर बिस्तर छोड़ने की सलाह दी जाती थी। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि घड़ी देखकर समय नापना जरूरी नहीं है। आधी रात को बार-बार समय देखना तनाव बढ़ा सकता है। इसके बजाय अपने मन की स्थिति पर ध्यान दें। यदि आप शांत हैं और आराम महसूस कर रहे हैं, तो कुछ देर प्रतीक्षा कर सकते हैं। लेकिन यदि चिड़चिड़ापन बढ़ने लगे, विचार तेजी से चलने लगें या आप खुद को सोने के लिए मजबूर करने लगें, तो उठ जाना बेहतर हो सकता है।
बिस्तर छोड़ने से नींद में कैसे मिल सकती है मदद?

इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य बिस्तर को चिंता, बेचैनी और जागते रहने से जोड़ने से बचाना है। लगातार बिस्तर पर करवटें बदलने से व्यक्ति के मन में बिस्तर को लेकर निराशा पैदा हो सकती है। कुछ समय के लिए दूसरे स्थान पर जाने और शांत गतिविधि करने से यह चक्र टूट सकता है। जब दोबारा नींद महसूस होने लगे, तो बिस्तर पर लौटने की सलाह दी जाती है।
आधी रात को उठकर क्या करना चाहिए?
बिस्तर छोड़ने के बाद ऐसी गतिविधि चुनें जो शांत हो और जिसमें ज्यादा मेहनत न करनी पड़े। उदाहरण के लिए, किताब पढ़ना, खाना बनाने की पुरानी किताबें देखना, बुनाई करना या कोई साधारण कला गतिविधि करना उपयोगी हो सकता है। कमरे में हल्की रोशनी रखें और संभव हो तो मोबाइल तथा लैपटॉप से दूरी बनाए रखें। तेज रोशनी और डिजिटल सामग्री कुछ लोगों की नींद में बाधा डाल सकती है।
आधी रात को काम करने से बचें
नींद न आने पर उठकर ईमेल का जवाब देना, बिल भरना या कार्यालय का काम शुरू करना सही विकल्प नहीं है। इससे रात में जागने की आदत मजबूत हो सकती है। इसी तरह, सोफे पर सोने की आदत डालने के बजाय नींद आने पर अपने बिस्तर पर लौटें। यदि कमरे से बाहर निकलना संभव न हो, तो पास की कुर्सी पर बैठकर कोई शांत गतिविधि की जा सकती है।
पहले से तैयार रखें अपनी योजना
रात में नींद न आने पर क्या करना है, इसकी योजना दिन में ही बना लेना उपयोगी हो सकता है। बिस्तर के पास किताब, पत्रिका या अन्य सामग्री रख लें। ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े और चप्पल भी तैयार रखें। यदि आपको ऐसी दवाएं लेने की जरूरत पड़ती है जिनसे सुस्ती या गिरने का जोखिम बढ़ सकता है, तो उठते समय विशेष सावधानी बरतें और जरूरत के अनुसार बिस्तर पर बैठकर ही गतिविधि करें।
लगातार नींद की समस्या हो तो विशेषज्ञ से मिलें

यदि कुछ सप्ताह तक नियमित दिनचर्या और स्टिमुलस कंट्रोल अपनाने के बावजूद नींद में सुधार नहीं होता, तो नींद विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। विशेषज्ञ अनिद्रा के संभावित कारणों की जांच कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर सीबीटी-आई जैसी उपचार पद्धति की सलाह दे सकते हैं। लगातार नींद की कमी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।










