Operation Fateh-e-Khaiber: मध्य पूर्व में तनाव अब एक पूर्ण सैन्य संघर्ष का रूप ले चुका है। इजराइल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाइयों के जवाब में ईरान ने ‘ऑपरेशन फतह-ए-खैबर’ की औपचारिक घोषणा कर दी है। इस ऑपरेशन के तहत ईरान ने इजराइल की व्यावसायिक राजधानी तेल-अवीव सहित कई शहरों पर मिसाइलों की बौछार कर दी है। इजराइल डिफेंस फोर्स (IDF) ने इस हमले की पुष्टि करते हुए पूरे देश में आपातकाल (Emergency) लागू कर दिया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने चेतावनी दी है कि यह केवल शुरुआत है और इजराइल व अमेरिका को अपने कदमों के लिए भारी कीमत चुकानी होगी।
क्या है ‘फतह-ए-खैबर’ का ऐतिहासिक महत्व?
ईरान द्वारा चुने गए इस ऑपरेशन के नाम के पीछे गहरा धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भ छिपा है। अरबी भाषा में ‘फतह’ का अर्थ होता है ‘जीत’। वहीं, ‘खैबर’ सऊदी अरब में मदीना के पास स्थित एक प्राचीन और अभेद्य माना जाने वाला किला था। 7वीं शताब्दी में यहाँ यहूदियों और मुसलमानों के बीच एक ऐतिहासिक युद्ध लड़ा गया था। ईरान एक शिया बहुल देश है, इसलिए उसने इस नाम के जरिए अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को युद्ध के साथ जोड़ा है।
हजरत अली और खैबर की वीरता का किस्सा
इतिहास के पन्नों के अनुसार, खैबर की लड़ाई में पैगंबर मुहम्मद के चचेरे भाई और दामाद हजरत अली ने मुख्य भूमिका निभाई थी। कहा जाता है कि इस युद्ध में एक तरफ मरहब इब्न अल-हरिथ की 14,000 की विशाल सेना थी, जबकि दूसरी ओर हजरत अली के नेतृत्व में मात्र 1600 योद्धा थे। युद्ध के निर्णायक मोड़ पर हजरत अली ने खैबर के भारी लोहे के दरवाजे को अपने हाथों से उखाड़ फेंका था, जिससे उनकी जीत का मार्ग प्रशस्त हुआ। ईरान इस नाम का उपयोग करके प्रतीकात्मक रूप से इजराइल को चुनौती दे रहा है।
इजराइल का पलटवार: ‘ऑपरेशन लायन्स रोअर’
ईरान के ‘फतह-ए-खैबर’ के मुकाबले इजराइल ने भी अपनी सैन्य रणनीति का नाम घोषित कर दिया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पहल पर इस जवाबी कार्रवाई को ‘लायन्स रोअर’ (शेर की दहाड़) नाम दिया गया है। इससे पहले जून 2025 में इजराइल ने ‘रायजलिंग लायन्स’ नामक एक सफल ऑपरेशन चलाया था। इजराइल का स्पष्ट संकेत है कि वह ईरान के मिसाइल हमलों का जवाब अपनी पूरी वायु शक्ति और सैन्य ताकत के साथ देगा।
ईरान का घातक मिसाइल जखीरा और चीनी तकनीक
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की हालिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के पास वर्तमान में 2,000 से अधिक बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों का भंडार है। अपनी सैन्य क्षमता को और आधुनिक बनाने के लिए ईरान ने चीन के साथ CM-300 मिसाइल खरीदने का बड़ा सौदा किया है, जिसे दुनिया की खतरनाक मिसाइलों में गिना जाता है। इसके अतिरिक्त, ईरान के पास ‘शाहेद’ जैसे घातक आत्मघाती ड्रोन हैं, जिन्होंने हाल के संघर्षों में अपनी मारक क्षमता का लोहा मनवाया है।
बढ़ता वैश्विक संकट और संभावित परिणाम
ईरान की इस आक्रामक कार्रवाई ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों के लिए भी खतरा पैदा कर दिया है। जहाँ एक तरफ ईरान अपनी ‘अभेद्य’ मिसाइल शक्ति का प्रदर्शन कर रहा है, वहीं इजराइल अपने ‘लायन्स रोअर’ के जरिए तेहरान को नेस्तनाबूद करने की कसम खा चुका है। यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इन दोनों देशों के अगले कदमों पर टिकी हैं।









