West Bengal SIR: सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, चुनाव आयोग एक हफ्ते में बताए आखिर क्या है सच

खलबली! पश्चिम बंगाल में 58 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम कटने और 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' के नाम पर करोड़ों लोगों को नोटिस भेजने पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है। क्या यह प्रक्रिया पारदर्शी है या विपक्ष का दावा सही है? जानिए कोर्ट के उस आदेश के बारे में जिसने बंगाल की राजनीति गर्मा दी है।

West Bengal SIR

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 12, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में SIR (Systematic Identification and Response) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग से जवाब मांगा। यह याचिकाएँ टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेना द्वारा दायर की गई थीं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमलिया बागची की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग को नोटिस जारी किया और जल्द जवाब देने को कहा।

West Bengal SIR: अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने बताया कि आयोग द्वारा SIR से जुड़े निर्देश अक्सर व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से भेजे जाते हैं। उनका आरोप था कि BLOs (बुनियादी स्तर के अधिकारी) बिना औपचारिक आदेशों के कार्रवाई करने को मजबूर हैं, जिससे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और वैधता पर सवाल उठते हैं।

टीएमसी ने लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी श्रेणी पर आपत्ति जताई

टीएमसी ने चुनाव आयोग द्वारा लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी श्रेणी शुरू करने पर भी आपत्ति जताई। वकील कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि आयोग द्वारा पहचानी गई कई विसंगतियां वास्तविकता में अतार्किक हैं और इनमें मतदाताओं की पहचान के मामले में अनुचित कार्रवाई शामिल है। उनका कहना था कि ऐसे निर्देश और कार्यवाही लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं।

सोशल मीडिया के माध्यम से आदेश देने पर उठे गंभीर सवाल

कपिल सिब्बल ने कहा कि चुनाव आयोग अपने अधिकांश निर्देश व्हाट्सएप या अन्य डिजिटल माध्यमों से देता है। उनका आरोप था कि यह तरीका उचित नहीं है और इससे BLOs पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। उन्होंने अदालत को बताया कि कई मतदाताओं को बिना पर्याप्त जांच और औपचारिक प्रक्रिया के सुनवाई के लिए बुलाया गया, जिससे प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए तर्कों के आधार पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा। इस संबंध में आयोग को नोटिस जारी किया गया। चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि उन्हें जवाब तैयार करने के लिए दो सप्ताह का समय चाहिए, लेकिन चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि हलफनामा इसी सप्ताह के भीतर दाखिल किया जाए।सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आयोग को त्वरित रूप से जवाब देना होगा। इस प्रक्रिया में आयोग द्वारा पेश किए जाने वाले हलफनामे और दस्तावेजों का विश्लेषण किया जाएगा। अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई है, जिसमें अदालत मामले की गंभीरता और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए निर्णय ले सकती है।

चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल

इस मामले से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और तकनीकी माध्यमों के उपयोग पर सवाल उठते हैं। SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं में यह देखा जा रहा है कि मतदाताओं की पहचान और BLOs की भूमिका में त्रुटियाँ हो रही हैं। सुप्रीम कोर्ट का नोटिस और आयोग को दिए गए कड़े निर्देश यह दर्शाते हैं कि अदालत लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की रक्षा के लिए सजग है।

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