West Bengal SIR: ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र, SIR में ‘बीजेपी ऐप’ के इस्तेमाल का दावा

ममता का 'सुप्रीम' दांव: क्या बंगाल की मतदाता सूची में हो रही है बड़ी हेराफेरी? जानें SIR विवाद का पूरा सच! पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि SIR प्रक्रिया में भाजपा के IT सेल द्वारा विकसित ऐप्स का इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि लाखों वैध मतदाताओं के नाम 'बैकएंड' से हटाए जा रहे हैं। क्या यह 2026 के चुनावों को प्रभावित करने की साजिश है?

West Bengal SIR

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 10, 2026

West Bengal SIR: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त को दो पन्नों का एक विस्तृत पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने राज्य में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन – SIR) प्रक्रिया को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं। मुख्यमंत्री का आरोप है कि SIR के नाम पर आम नागरिकों को लगातार परेशान किया जा रहा है और यह पूरी प्रक्रिया मानवीय संवेदनशीलता से रहित है।

SIR प्रक्रिया से मौत और मानसिक दबाव का आरोप

ममता बनर्जी ने अपने पत्र में दावा किया कि SIR प्रक्रिया के कारण राज्य में अब तक 77 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा चार लोगों ने आत्महत्या करने की कोशिश की और 17 लोग गंभीर रूप से बीमार पड़े। उन्होंने लिखा कि इस प्रक्रिया के चलते आम लोगों में डर और मानसिक दबाव का माहौल बना हुआ है। मुख्यमंत्री के अनुसार, SIR बिना पर्याप्त तैयारी और योजना के लागू किया गया, जिससे अव्यवस्था और तनाव बढ़ा।

प्रतिष्ठित नागरिकों से भी मांगा गया पहचान प्रमाण

मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि SIR के दौरान बुजुर्ग और प्रतिष्ठित नागरिकों को भी बार-बार अपनी पहचान साबित करने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे सम्मानित व्यक्तियों से दस्तावेज मांगना अपमानजनक है। इसी तरह कवि जॉय गोस्वामी, अभिनेता-सांसद दीपक अधिकारी और भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी को भी इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में लाखों नाम हटाए गए

पत्र में बताया गया कि पश्चिम बंगाल में SIR की ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद 58.20 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। ड्राफ्ट सूची से पहले राज्य में कुल 7.66 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे, जो घटकर 7.08 करोड़ रह गए। इसका मतलब है कि करीब 7.6 प्रतिशत वोटर्स के नाम काटे गए, यानी हर 100 में से लगभग 8 मतदाता सूची से बाहर हो गए।

हटाए गए नामों के पीछे चुनाव आयोग का तर्क

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, हटाए गए 58.20 लाख नामों में से 24.17 लाख मतदाता मृत पाए गए। इसके अलावा 1.38 लाख नाम डुप्लीकेट या फर्जी थे। शेष 32.65 लाख मतदाता या तो स्थानांतरित हो चुके थे, लापता थे या अन्य कारणों से सूची में शामिल नहीं किए गए। हालांकि, ममता बनर्जी का कहना है कि इन आंकड़ों की आड़ में वास्तविक मतदाताओं को भी परेशान किया गया।

SIR को लेकर ममता बनर्जी के छह बड़े आरोप

1. महिलाओं के साथ भेदभाव का आरोप

मुख्यमंत्री ने कहा कि शादी के बाद उपनाम बदलने वाली महिला मतदाताओं को बार-बार बुलाया जा रहा है, जो महिलाओं और असली वोटर्स का अपमान है।

2. अप्रशिक्षित पर्यवेक्षकों की तैनाती

कई स्थानों पर बिना उचित प्रशिक्षण वाले पर्यवेक्षकों को लगाया गया। कुछ मामलों में आम नागरिकों को देशद्रोही तक कह दिया गया।

3. पुलिस की भूमिका पर सवाल

ममता ने लिखा कि पुलिस का काम जनता की सुरक्षा करना है, न कि पर्यवेक्षकों को संरक्षण देना।

4. चुनिंदा इलाकों में सुधार का आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि कथित गड़बड़ियों के नाम पर केवल कुछ इलाकों को निशाना बनाया जा रहा है, जो राजनीतिक पक्षपात को दर्शाता है।

5. अलग पोर्टल और नियमों में बदलाव

मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल में इस्तेमाल किया जा रहा पोर्टल अन्य राज्यों से अलग है और नियमों में बार-बार बदलाव किया जा रहा है।

6. छोटी गलतियों पर उत्पीड़न

नाम की मामूली वर्तनी, उम्र में हल्के अंतर या रिकॉर्ड की छोटी त्रुटियों पर भी लोगों को परेशान किया जा रहा है, जो पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बनाता है।

Read More: Ayodhya Ram Mandir: कौन है अब्दुल अहद शेख? राम मंदिर में नमाज पढ़ने की कोशिश पर बवाल