West Bengal Politics : बंगाल के पुस्तकालयों से हटेंगी ममता बनर्जी की किताबें? कैबिनेट मंत्री ने दिया बड़ा बयान

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद जनशिक्षा प्रसार और पुस्तकालय सेवा मंत्री गौरीशंकर घोष ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि राज्य के सरकारी पुस्तकालयों से ममता बनर्जी की 'अर्थहीन' और 'अनावश्यक' रचनाएं हटा दी जाएंगी; जानिए 'एपांग ओपांग झपांग' जैसी कविताओं पर मंत्री ने क्या तंज कसा है और इस फैसले पर टीएमसी की क्या प्रतिक्रिया आई है?

West Bengal Politics

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 12, 2026

West Bengal Politics : पश्चिम बंगाल के सार्वजनिक शिक्षा और पुस्तकालय विभाग में इन दिनों एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है. राज्य के पुस्तकालय मामलों के मंत्री गौरीशंकर घोष ने सरकारी सहायता प्राप्त पुस्तकालयों (लाइब्रेरियों) में रखी जाने वाली किताबों को लेकर एक बेहद कड़ा और महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है. मंत्री ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा है कि अब बंगाल की सरकारी और सरकारी अनुदान प्राप्त लाइब्रेरियों में केवल उन्हीं किताबों को स्थान दिया जाएगा, जो पाठकों के ज्ञानवर्धन में वास्तविक रूप से सहायक हों. इसके साथ ही, उन्होंने ऐसी पुस्तकों को प्राथमिकता देने की बात कही है जो पाठकों के भीतर राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति की भावना का प्रभावी ढंग से विकास कर सकें.

ममता बनर्जी की रचनाओं पर कैंची, ‘एपांग ओपांग झपांग’ भी बाहर

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचाने वाली बात यह है कि इस नए सरकारी आदेश के बाद राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कई कविताओं और साहित्यिक रचनाओं को पुस्तकालयों से हटाने की तैयारी कर ली गई है. मंत्री के इस फैसले की जद में ममता बनर्जी की बेहद चर्चित और विवादित कविता ‘एपांग ओपांग झपांग’ भी आ गई है. वर्तमान शुभेंदु अधिकारी सरकार के इस फैसले के पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि पुस्तकालयों से ऐसी सभी निरर्थक किताबों को पूरी तरह से बाहर किया जाएगा, जो पढ़ने वालों—विशेषकर बच्चों—के मानसिक और बौद्धिक विकास में किसी भी प्रकार से योगदान नहीं देती हैं.

बौद्धिक विकास में बाधक किताबों की जगह महापुरुषों की जीवनियों को तरजीह

एक प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान (इंडिया टुडे) के साथ हुई विशेष बातचीत में बंगाल सरकार के मंत्री गौरीशंकर घोष ने अपने इस नीतिगत फैसले का पुरजोर समर्थन किया. उन्होंने कहा कि आम जनता और छात्र पुस्तकालयों का रुख इसलिए करते हैं ताकि वे अपनी ज्ञान की सीमा को बढ़ा सकें. ऐसे में यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह लाइब्रेरियों में केवल उत्कृष्ट और प्रासंगिक अध्ययन सामग्री ही उपलब्ध कराए. मंत्री ने दोटूक शब्दों में कहा कि ‘एपांग ओपांग झंपाग’ जैसी बचकानी और निरर्थक रचनाओं को पुस्तकालयों में रखने का कोई औचित्य नहीं है, इसलिए इन्हें हटाने का निर्णय लिया गया है.

रवींद्रनाथ टैगोर, शिवाजी महाराज और महाराणा प्रताप के साहित्य से सजेगी लाइब्रेरी

जब मंत्री गौरीशंकर घोष से सीधा सवाल किया गया कि क्या राज्य भर की लाइब्रेरियों से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा लिखित सभी पुस्तकों को पूरी तरह से हटा दिया जाएगा? इस पर शुभेंदु सरकार के मंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए जवाब दिया कि जिन किताबों से बच्चों के चरित्र निर्माण, व्यक्तित्व विकास और बौद्धिक क्षमता में कोई सुधार नहीं होता, उन्हें अलमारियों में सजाकर जगह बर्बाद करने का कोई फायदा नहीं है. उन्होंने घोषणा की कि इन अनुपयोगी किताबों को हटाकर अब पुस्तकालयों में रवींद्रनाथ टैगोर, काजी नजरुल इस्लाम और स्वामी विवेकानंद जैसे महान विचारकों के साहित्य को सहेजा जाएगा. इसके साथ ही छत्रपति शिवाजी महाराज और महाराणा प्रताप जैसी महान ऐतिहासिक विभूतियों की प्रेरणादायक जीवनियों को प्रमुखता से स्थान दिया जाएगा ताकि युवा पीढ़ी को सही दिशा मिल सके.

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