West Bengal Politics: TMC बागियों पर महुआ मोइत्रा का बड़ा हमला, 91वें संविधान संशोधन का किया जिक्र

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) इतिहास के सबसे बड़े आंतरिक संकट और बिखराव के दौर से गुजर रही है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 12, 2026

West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर छिड़ा आंतरिक घमासान अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। पार्टी में मची इस ऐतिहासिक कलह के बीच तेजतर्रार टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने शुक्रवार (12 जून 2026) को बागी गुट पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। महुआ मोइत्रा ने बागी सांसदों को सीधे तौर पर ‘गद्दार’ करार देते हुए संविधान के कड़े नियमों की याद दिलाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बागी सांसदों को कानून की समझ नहीं है, और वे किसी भी कीमत पर संसद में अपना अलग गुट नहीं बना सकते।

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महुआ मोइत्रा का ‘एक्स’ पर कड़ा रुख

महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक बेहद आक्रामक पोस्ट साझा करते हुए बागी धड़े के दावों की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अलग गुट बनाकर सदस्यता बचाने का दौर बहुत पहले खत्म हो चुका है और अब इन बागियों के पास केवल इस्तीफा देने का ही रास्ता बचा है।

महुआ मोइत्रा ने अपनी पोस्ट में लिखा, “पूर्व टीएमसी सांसदों को भारतीय कानून के बारे में बुनियादी जानकारी भी नहीं है। संविधान के 91वें संशोधन (2003) के तहत यह पूरी तरह साफ किया जा चुका है कि सदन के भीतर अब कोई भी अलग गुट (Split Group) नहीं बनाया जा सकता, इसके लिए बागी सांसदों की संख्या चाहे कितनी भी क्यों न हो। यदि अपनी सदस्यता बचानी है, तो मूल राजनीतिक दल के कम से कम दो-तिहाई निर्वाचित सदस्यों को किसी दूसरे राजनीतिक दल में अपना ‘विलय’ (Merge) करना होगा। इसलिए संसद में अलग पहचान का दावा खोखला है, इन सभी 19 गद्दारों को अपनी सदस्यता से इस्तीफा देना होगा और फिर से भाजपा के टिकट पर उपचुनाव लड़ना होगा।”

कलह और इस्तीफों के भंवर में फंसी टीएमसी

विधानसभा चुनावों में मिली करारी शिकस्त के बाद से ही ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी एक के बाद एक बड़े झटकों से जूझ रही है। पार्टी के तीन वरिष्ठ राज्यसभा सांसद पहले ही अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं। इसी बीच शुक्रवार को लोकसभा में भी बगावत की एक बड़ी और प्रामाणिक लिस्ट सामने आने से सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया।

सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा के 19 बागी सांसदों के हस्ताक्षर (Signatures) वाली एक आधिकारिक सूची सीधे लोकसभा स्पीकर के कार्यालय को भेजी गई है। बताया जा रहा है कि यह गोपनीय पत्र 18 मई 2026 को ही स्पीकर दफ्तर में रिसीव करा दिया गया था, जो अब जाकर सार्वजनिक हुआ है।

सायोनी घोष, यूसुफ पठान और शताब्दी रॉय के नामों ने सबको चौंकाया

इस बागी सूची में जो नाम सामने आए हैं, उन्होंने राजनीतिक विश्लेषकों को हैरान कर दिया है। सबसे बड़ा और चौंकाने वाला नाम सायोनी घोष का है, जिन्हें अब तक ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी का धुर वफादार और पार्टी का युवा चेहरा माना जाता था। सायोनी जादवपुर संसदीय सीट से टीएमसी की सांसद हैं और उनका बागी होना पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की साख पर बड़ा सवालिया निशान है। इसके अलावा पूर्व भारतीय क्रिकेटर यूसुफ पठान और वरिष्ठ नेता शताब्दी रॉय के नामों ने बगावत की गहराई को उजागर कर दिया है।

टीएमसी के उन 19 बागी लोकसभा सांसदों की पूरी सूची जो रडार पर हैं:

काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हलदर, डॉ. शर्मिला सरकार और प्रसून बंद्योपाध्याय।

जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार मल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी और सायोनी घोष।

खलीलुर्रहमान, अबू ताहिर खान, यूसुफ़ पठान, मिताली बैग और माला रॉय।

कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी (देव), जून मालिया और पार्थ भौमिक।

इस अभूतपूर्व संकट से निपटने के लिए दिल्ली से लेकर कोलकाता तक टीएमसी का कानूनी और राजनीतिक सेल पूरी तरह सक्रिय हो गया है, जबकि विपक्षी खेमे इस दलबदल के बाद पैदा होने वाली स्थिति पर पैनी नजरें गड़ाए हुए हैं।

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