West Bengal Politics: कोलकाता ED कार्रवाई पर सियासी संग्राम तेज, ममता बनर्जी पर BJP के गंभीर आरोप

कोलकाता में ED की रेड और मुख्यमंत्री की एंट्री: क्या ममता बनर्जी ने वाकई बचा लिए पार्टी के राज? कोलकाता की सड़कों पर उस वक्त हड़कंप मच गया जब ED की टीम ने आई-पैक प्रमुख के ठिकानों पर दस्तक दी। लेकिन असली ड्रामा तब शुरू हुआ जब खुद सीएम ममता बनर्जी वहां पहुंच गईं। ED का दावा है कि मुख्यमंत्री ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ की है, जबकि ममता इसे "लोकतंत्र की हत्या" बता रही हैं। क्या इन फाइलों में छिपे हैं 2026 के राज?

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Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 9, 2026

West Bengal Politics: कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में तीखा टकराव देखने को मिल रहा है। इस कार्रवाई में कथित रूप से बाधा डालने के आरोपों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोला है। BJP का कहना है कि ममता बनर्जी राज्य में किसी भी केंद्रीय जांच एजेंसी को स्वतंत्र रूप से काम नहीं करने देतीं और उन्होंने ED अधिकारियों को खुलेआम धमकाया है।

ममता बनर्जी पर BJP का सीधा हमला

BJP सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ममता बनर्जी को निशाने पर लेते हुए कहा कि बंगाल में जांच एजेंसियों को काम करने से रोका जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर बंगाल में ऐसा क्या है, जिसे छिपाने के लिए मुख्यमंत्री जांच से डर रही हैं। रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी को आशंका है कि जांच के दौरान उनके और उनकी सरकार से जुड़े कथित घोटालों का खुलासा हो सकता है।

“लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला कृत्य”

दिल्ली स्थित BJP कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में रविशंकर प्रसाद ने कहा कि बंगाल में जो घटनाक्रम सामने आया है, वह आज़ाद भारत के इतिहास में अभूतपूर्व है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री का व्यवहार न केवल अनैतिक और गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि पूरी तरह असंवैधानिक भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने लोकतांत्रिक मूल्यों और संस्थाओं की मर्यादा को ठेस पहुंचाई है।

निजी कंपनी पर छापे से ममता क्यों घबराईं?

BJP सांसद ने स्पष्ट किया कि ED की छापेमारी एक निजी राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म के कार्यालय पर हो रही थी। इसके बावजूद मुख्यमंत्री की सक्रियता और हस्तक्षेप कई सवाल खड़े करते हैं। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि किसी जांच को रोकना या उस पर दबाव डालना कानून का सीधा उल्लंघन है और अंततः जनता ही ममता बनर्जी से इसका हिसाब लेगी।

ED अधिकारियों को धमकाने का आरोप

BJP ने यह भी आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने ED अधिकारियों को धमकी दी और उन्हें कार्रवाई से रोकने की कोशिश की। पार्टी का दावा है कि बंगाल में केंद्रीय एजेंसियों के खिलाफ डर का माहौल बनाया जा रहा है ताकि सत्तारूढ़ दल से जुड़े मामलों की जांच आगे न बढ़ सके।

दिल्ली में TMC सांसदों का जोरदार प्रदर्शन

इस पूरे घटनाक्रम के बीच 9 जनवरी 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों ने दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में डेरेक ओ’ब्रायन, शताब्दी रॉय, महुआ मोइत्रा और कीर्ति आज़ाद जैसे प्रमुख नेता शामिल थे। TMC सांसदों ने कोलकाता में I-PAC कार्यालय और उसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर हुई ED छापेमारी का विरोध किया।

हिरासत में लिए गए TMC सांसद

प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी और हंगामे के चलते मौके पर पहुंची दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाया। इस दौरान TMC सांसद महुआ मोइत्रा और डेरेक ओ’ब्रायन को हिरासत में लिया गया, जिससे राजनीतिक तनाव और बढ़ गया।

क्या है I-PAC और क्यों है चर्चा में?

इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) एक प्रमुख राजनीतिक परामर्श फर्म है, जो चुनावी रणनीति, डेटा आधारित कैंपेन, मीडिया प्रबंधन और वोटर आउटरीच में राजनीतिक दलों की मदद करती है। इसकी स्थापना 2013 में प्रशांत किशोर और प्रतीक जैन ने की थी। पहले इसका नाम सिटीजंस फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस (CAG) था, जिसे बाद में I-PAC किया गया। प्रशांत किशोर के अलग होने के बाद इसकी जिम्मेदारी प्रतीक जैन संभाल रहे हैं।

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