Malda Violence: निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में आपराधिक मामलों का सामना कर रहे राजनेताओं और व्यक्तियों के लिए राज्य की ओर से मिल रही सुरक्षा तत्काल हटाने के आदेश दिए हैं।जिला अधिकारियों को जारी निर्देश में ऐसे नेताओं और व्यक्तियों के पद और खतरे की आशंका का आकलन करके मिल रही सुरक्षा के लिए अयोग्य ठहराने का निर्णय लेने को कहा गया है।
चुनाव आयोग ने TMC नेताओं पर दिखाई सख्ती
यह कदम सरकारी सुरक्षा का दुरुपयोग रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।जिला अधिकारियों और पुलिस को त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।इसके अलावा गैर-जमानती मामलों में आरोपियों को 10 दिन के भीतर गिरफ्तार करने का आदेश भी दिया गया है।पत्र में कहा गया कि,प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र और जिले में वर्तमान में सुरक्षा प्राप्त कर रहे सभी व्यक्तियों के नाम और पदनाम सहित विस्तृत सूची तत्काल प्रस्तुत की जाए।
TMC नेताओं की सुरक्षा हटाने का आदेश
निर्वाचन आयोग तक यह जानकारी भेजने के लिए समय सीमा निर्धारित की गई है।इसके अलावा,राज्य पुलिस नोडल अधिकारी को 4 अप्रैल तक व्यापक सुरक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।यह निर्णय मालदा और अन्य जिलों में हाल ही में हुई हिंसक घटनाओं के बाद लिया गया है।
मालदा में बवाल के बाद एक्शन
पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के 36 नेताओं को दी जा रही भारी पुलिस सुरक्षा पर कड़ी आपत्ति जताई है।आयोग ने इसे पक्षपातपूर्ण बताते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक सिद्धनाथ गुप्ता को 2-3 दिनों में निष्पक्ष समीक्षा करने का निर्देश दिया है।सूत्रों के अनुसार,चुनाव घोषणा से पहले 832 TMC नेताओं और 144 अन्य लोगों की सुरक्षा में 2,185 पुलिसकर्मी तैनात थे, जो आयोग की अनुमति के बिना जारी है।
बंगाल पुलिस को चुनाव आयोग की फटकार
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि,आपराधिक मामलों वाले,जमानत या पैरोल पर बाहर नेताओं और नियमों के विरुद्ध सुरक्षा पाने वालों की सुरक्षा हटाई जाए।साथ ही लंबित गैर-जमानती वारंटों को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।अब तक बंगाल पुलिस की ओर से अनुपालन रिपोर्ट न मिलने पर आयोग नाराज़ है।










