West Bengal Result : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी है। दशकों तक बंगाल की सत्ता पर काबिज रहने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) का किला इस बार पूरी तरह ढह गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने न केवल बहुमत हासिल किया, बल्कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके अपने ही गढ़ में परास्त कर राज्य में पहली बार सरकार बनाने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। 15 साल के लंबे शासन के बाद ममता बनर्जी का सत्ता से बाहर होना इस दशक की सबसे बड़ी राजनीतिक घटना मानी जा रही है।
भवानीपुर में ममता की हार: शुभेंदु अधिकारी बने ‘जायंट किलर’
इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला और बड़ा परिणाम भवानीपुर विधानसभा सीट से आया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके पूर्व सहयोगी और वर्तमान में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने 15,501 वोटों के अंतर से करारी शिकस्त दी। चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, शुभेंदु अधिकारी को 73,917 मत प्राप्त हुए, जबकि ममता बनर्जी 58,801 वोटों पर ही सिमट गईं। यह लगातार दूसरी बार है जब ममता बनर्जी को शुभेंदु अधिकारी के हाथों हार झेलनी पड़ी है; इससे पहले 2021 में नंदीग्राम की ऐतिहासिक लड़ाई में भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। भवानीपुर की यह हार ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य पर बड़े सवाल खड़े कर रही है।
तृणमूल के ‘दिग्गज’ धराशायी: मंत्रियों की लंबी हार की सूची
भाजपा की इस प्रचंड लहर में केवल ममता बनर्जी ही नहीं, बल्कि उनकी कैबिनेट के कई कद्दावर मंत्री और पार्टी के बड़े चेहरे भी अपनी साख नहीं बचा पाए। दमदम उत्तर से वित्त राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य 16,000 वोटों से चुनाव हार गईं, जबकि शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु को दमदम सीट पर 25,000 से अधिक मतों के अंतर से शिकस्त मिली। हाबड़ा से ज्योतिप्रिय मल्लिक (31,000 वोट), रासबिहारी से देबाशीष कुमार (21,000 वोट) और टॉलीगंज से अरूप बिस्वास जैसे नेताओं की हार यह दर्शाती है कि जनता में सरकार के प्रति गहरा असंतोष था। श्यामपुकुर से शशि पांजा की हार भी टीएमसी के लिए एक बड़ा झटका साबित हुई है।
भ्रष्टाचार के आरोपों और घोटालों का पड़ा गहरा असर
चुनाव परिणामों का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर पता चलता है कि शिक्षक भर्ती घोटाला और भ्रष्टाचार के आरोपों ने तृणमूल कांग्रेस की जड़ें खोखली कर दी थीं। शिक्षक भर्ती मामले में फंसे परेश चंद्र अधिकारी को करीब 30,000 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। इसी तरह, सिंगूर जैसे ऐतिहासिक क्षेत्र से कृषि मंत्री बेचराम मन्ना 21,000 से अधिक वोटों से हार गए। सिलीगुड़ी में गौतम देब की 73,000 वोटों की विशाल हार और बिधाननगर में सुजीत बसु की 37,000 वोटों से पराजय ने यह साफ कर दिया कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मतदाताओं ने बदलाव के पक्ष में वोट दिया है। भांगड़ में आईएसएफ के नौशाद सिद्दीकी ने ममता के करीबी शौकत मोल्ला को 32,000 वोटों से हराकर अपनी ताकत दिखाई।
रिकॉर्ड 92.47% मतदान: जनता ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला
पश्चिम बंगाल 2026 के चुनावों की सबसे बड़ी विशेषता वहां हुआ रिकॉर्ड तोड़ मतदान रहा। दो चरणों में हुए चुनाव में कुल 92.47 प्रतिशत वोटिंग हुई, जिसने 2011 के पिछले रिकॉर्ड को भी ध्वस्त कर दिया। पहले चरण में 93.13 प्रतिशत और दूसरे चरण में 91.66 प्रतिशत मतदान यह साबित करता है कि जनता इस बार बदलाव के लिए पूरी तरह संकल्पित थी। भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और कथित प्रशासनिक विफलता जैसे मुद्दों ने मतदाताओं को पोलिंग बूथ तक खींचने का काम किया। कुल 294 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा का यह प्रदर्शन न केवल बंगाल बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी विपक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है।










