Final Voter List West Bengal: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले निर्वाचन आयोग (EC) ने राज्य की फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर दी है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य भर में कुल 65 लाख मतदाताओं के नाम लिस्ट से हटा दिए गए हैं। इनमें से 58 लाख नाम पिछले साल दिसंबर में जारी ड्राफ्ट लिस्ट के दौरान ही हटाए गए थे, जबकि फाइनल लिस्ट में 7 लाख और नाम कम हो गए हैं। इसके अतिरिक्त, लगभग 60 लाख नाम अभी भी ‘अनसुलझे’ (Pending) श्रेणी में हैं, जिनके दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। आयोग का कहना है कि ये नाम मृत मतदाताओं, पते में बदलाव करने वालों या दोहरी प्रविष्टि वाले लोगों के हैं।
ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर में बड़ा फेरबदल
इस पूरी प्रक्रिया का सबसे रोचक और विवादित पहलू मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का अपना निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर है। फाइनल लिस्ट के अनुसार, भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से कुल 47,094 मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं। शुरुआत में यहाँ 2 लाख 6 हजार से अधिक मतदाता पंजीकृत थे, लेकिन दो चरणों की छंटनी के बाद अब संख्या काफी कम हो गई है। इतना ही नहीं, भवानीपुर में 14,154 नाम अभी भी पेंडिंग लिस्ट में हैं। यदि वेरिफिकेशन के बाद इन्हें भी हटा दिया जाता है, तो मुख्यमंत्री के क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी, जो चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है।
अक्टूबर से जारी SIR प्रक्रिया का पूरा घटनाक्रम
चुनाव आयोग ने पिछले साल अक्टूबर के अंत में राज्य में सत्यापन और शुद्धिकरण (SIR) प्रक्रिया शुरू की थी। 4 नवंबर से बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) ने घर-घर जाकर फॉर्म बांटने का काम शुरू किया था। 16 दिसंबर को जब ड्राफ्ट लिस्ट सामने आई, तभी से बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया था। बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी और सुकांत मजूमदार लगातार दावा कर रहे थे कि लाखों ‘फर्जी’ वोटरों के नाम काटे जाने चाहिए, जबकि टीएमसी ने इसे केंद्र के दबाव में की गई साजिश करार दिया था।
सुवेंदु अधिकारी की चुनौती और चुनावी समीकरण
वोटर लिस्ट जारी होने के बाद नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को सीधे चुनौती दी है। उन्होंने दावा किया कि भवानीपुर वास्तव में बीजेपी का मजबूत गढ़ है और इस बार के चुनाव में पासा पलट जाएगा। सुवेंदु ने कड़े शब्दों में कहा, “उन्हें पता है कि उन्होंने पिछले वोट कैसे जीते थे, मैं उन्हें चुनौती देता हूँ कि वे इस बार मैदान से भागें नहीं।” गौरतलब है कि 2021 के उपचुनाव में ममता बनर्जी ने यहाँ 58 हजार से अधिक मतों से जीत दर्ज की थी, लेकिन अब कटे हुए नामों और बीजेपी की सक्रियता ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
तृणमूल कांग्रेस का ‘पॉलिटिकल और लीगल’ मूवमेंट का अल्टीमेटम
दूसरी ओर, सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस ने इस कदम की कड़ी निंदा की है। टीएमसी के राज्य उपाध्यक्ष जयप्रकाश मजूमदार ने कहा कि अगर किसी वैध मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया है, तो उनके पास वापस नाम जुड़वाने का संवैधानिक अधिकार है। पार्टी नेता तन्मय घोष ने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर बंगालियों को निशाना बनाने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वैध वोटरों के नाम हटाए गए, तो पार्टी इसके खिलाफ व्यापक राजनीतिक और कानूनी आंदोलन शुरू करेगी। टीएमसी का मानना है कि बीजेपी नाम कटवाकर चुनाव जीतने का जो सपना देख रही है, वह कभी सफल नहीं होगा।









