West Bengal Election 2026 : लेफ्ट-ISF में ’29 सीटों’ का खेल! नौशाद सिद्दीकी और विमान बोस की डील ने बढ़ाई दीदी की टेंशन

पश्चिम बंगाल 2026 के रण में लेफ्ट फ्रंट ने ISF के लिए 29 सीटें छोड़ने का फैसला किया है। कांग्रेस के अलग होने के बाद विमान बोस और नौशाद सिद्दीकी की इस जुगलबंदी ने दक्षिण बंगाल के समीकरण बदल दिए हैं। क्या यह 'अल्पसंख्यक-वाम' गठबंधन ममता बनर्जी की राह मुश्किल करेगा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 20, 2026

West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए वामपंथी दलों (लेफ्ट फ्रंट) के साथ आधिकारिक तौर पर सीटों का समझौता कर लिया है। नौशाद सिद्दीकी की पार्टी ISF इस बार 29 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। हालांकि, गौर करने वाली बात यह है कि इस गठबंधन में कांग्रेस शामिल नहीं है। हुगली के फुरफुरा शरीफ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नौशाद सिद्दीकी ने इस चुनावी तालमेल की औपचारिक घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल 29 सीटों पर सहमति बनी है और चार अतिरिक्त सीटों के लिए बातचीत का दौर जारी है।

73 सीटों की मांग और 29 पर बनी सहमति

गठबंधन की प्रक्रिया काफी उतार-चढ़ाव भरी रही। नौशाद सिद्दीकी काफी समय से गठबंधन को लेकर सक्रिय थे और उन्होंने लेफ्ट फ्रंट के चेयरमैन बिमान बसु को पत्र लिखकर सीटों के तालमेल का अनुरोध किया था। शुरुआत में ISF ने 73 सीटों पर बातचीत का प्रस्ताव रखा था, लेकिन लंबी चर्चा के बाद अंततः 29 सीटों पर सौदा तय हुआ। ISF जिन प्रमुख सीटों पर चुनाव लड़ेगी उनमें खानकुल, हरिपाल, मोथाबारी, सुजापुर, शमशेरगंज, रघुनाथगंज, हरिहरपारा, नकाशीपारा, अशोकनगर, मध्यमग्राम, आमडांगा, देगंगा, हरोआ, मीनाखान, बशीरहाट उत्तर, बादुड़िया, बसंती, कुलपी, मगराहाट, भांगर, उलुबेरिया पूर्व और जगतबल्लभपुर जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

नंदीग्राम समेत चार सीटों पर फंसा पेंच

गठबंधन फाइनल होने के बावजूद चार सीटों—नंदीग्राम, पांशकुड़ा पश्चिम, भगवानगोला और मुरारई—को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। ISF इन सीटों पर भी अपने उम्मीदवार उतारना चाहती है, जबकि लेफ्ट फ्रंट ने इन क्षेत्रों के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची पहले ही जारी कर दी है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वामपंथी दल इन सीटों से अपने नाम वापस लेते हैं या फिर इन जगहों पर दोस्ताना संघर्ष देखने को मिलेगा। नौशाद सिद्दीकी ने कहा है कि इन सीटों पर अंतिम फैसला जल्द लिया जाएगा और इसके तुरंत बाद ही उम्मीदवारों के नामों का आधिकारिक एलान किया जाएगा।

कांग्रेस से दूरी और 2021 के ‘संयुक्त मोर्चा’ की सीख

साल 2021 के विधानसभा चुनाव में लेफ्ट, कांग्रेस और ISF ने मिलकर ‘संयुक्त मोर्चा’ बनाया था, जिसका नेतृत्व बिमान बसु कर रहे थे। हालांकि, वह गठबंधन चुनावी मैदान में पूरी तरह विफल रहा था। कांग्रेस और लेफ्ट का खाता तक नहीं खुल सका था, जबकि ISF ने भांगर सीट जीतकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। नौशाद सिद्दीकी उस समय संयुक्त मोर्चा के इकलौते विधायक बने थे। इस बार कांग्रेस को इस गठबंधन से बाहर रखा गया है। ISF अब वामपंथियों के साथ मिलकर अपने आधार को मजबूत करने और चुनावी वैतरणी पार करने की कोशिश कर रही है।

अकेले दम पर विस्तार की कोशिश में ISF

ISF का मुख्य ध्यान उन क्षेत्रों पर है जहाँ अल्पसंख्यक आबादी का प्रभाव अधिक है। पार्टी का मानना है कि लेफ्ट के साथ मिलकर वे तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों को चुनौती दे सकते हैं। नौशाद सिद्दीकी ने संकेत दिए हैं कि वे केवल मुस्लिम वोट बैंक तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि शोषित और वंचित वर्गों को भी साथ जोड़ रहे हैं। उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक विविधता का ध्यान रखा जाएगा। बंगाल की राजनीति के जानकारों का मानना है कि कांग्रेस की अनुपस्थिति में ISF और लेफ्ट का यह गठबंधन सत्तारूढ़ दल के वोट बैंक में सेंध लगा सकता है।

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