West Bengal Cabinet : सीएम शुभेंदु ने बांटे विभाग, स्वपन को वित्त और दिलीप को पंचायत

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल कैबिनेट के मंत्रियों के विभागों का ऐलान कर दिया है। स्वपन दासगुप्ता को वित्त और दिलीप घोष को पंचायत मंत्रालय सौंपकर बड़ा दांव खेला गया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गृह मंत्रालय और अन्य महत्वपूर्ण विभाग किसके पास गए? जानने के लिए देखें मंत्रियों की यह पूरी सीक्रेट लिस्ट...

West Bengal Cabinet

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 10, 2026

West Bengal Cabinet : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपनी नई कैबिनेट के मंत्रियों के बीच विभागों का अंतिम रूप से बंटवारा कर दिया है। सरकार के सुचारू संचालन और प्रशासनिक गति को बढ़ाने के लिए सीएम शुभेंदु ने सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली है। मुख्यमंत्री ने ‘गृह एवं पर्वतीय मामले’ विभाग को अपने पास सुरक्षित रखा है। इसके साथ ही, भूमि एवं भूमि सुधार, शरणार्थी राहत एवं पुनर्वास, विद्युत, सूचना एवं संस्कृति, तथा कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार जैसे अहम महकमों की कमान भी सीधे मुख्यमंत्री के हाथों में रहेगी। शासन व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए अन्य किसी मंत्री को आवंटित न किए गए विभाग भी सीएम खुद ही संभालेंगे।

प्रमुख वरिष्ठ नेताओं को मिली बड़ी जिम्मेदारियां

कैबिनेट विस्तार में पार्टी के कद्दावर और अनुभवी चेहरों को सबसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक मंत्रालयों का प्रभार सौंपा गया है। राज्य की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और वित्तीय नीतियों को सुदृढ़ करने के लिए वरिष्ठ नेता स्वपन दासगुप्ता को नया वित्त मंत्री नियुक्त किया गया है। वहीं, ग्रामीण इलाकों के विकास और कृषि क्षेत्र को मजबूती देने के लिए दिलीप घोष को एक साथ दो बड़ी जिम्मेदारियां दी गई हैं; उन्हें ‘पंचायत एवं ग्रामीण विकास’ के साथ-साथ ‘कृषि विपणन’ मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया है। इसके अलावा, औद्योगिक क्रांति को गति देने के लिए तपस रॉय को उद्योग, वाणिज्य एवं उद्यम, सार्वजनिक उपक्रम एवं औद्योगिक पुनर्निर्माण तथा गैर-पारंपरिक एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत विभाग का जिम्मा मिला है।

क्षेत्रीय संतुलन और शहरी विकास पर विशेष ध्यान

नई कैबिनेट में क्षेत्रीय विकास और शहरीकरण की चुनौतियों से निपटने के लिए युवा और ऊर्जावान नेताओं को आगे बढ़ाया गया है। उत्तर बंगाल के समग्र विकास को प्राथमिकता देते हुए निशीथ प्रमाणिक को ‘उत्तर बंगाल विकास’ तथा ‘जल संसाधन जांच एवं विकास’ मंत्रालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। महानगरों और नगर पालिकाओं के आधुनिकरण के उद्देश्य से अग्निमित्रा पॉल को ‘शहरी विकास एवं नगर निकाय मामले’ का कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अशोक किर्तनिया को खाद्य एवं आपूर्ति तथा सहकारिता विभाग दिया गया है, जबकि जनजातीय समुदायों और अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए क्षुदिराम टुडू को जनजातीय विकास, अल्पसंख्यक मामले एवं मदरसा शिक्षा मंत्रालय सौंपा गया है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर

कैबिनेट में तकनीकी और सामाजिक क्षेत्रों के लिए शिक्षित और विशेषज्ञ चेहरों को तरजीह दी गई है। राज्य के बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए डॉ. शरद्वत मुखर्जी को ‘स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण’ मंत्रालय की अत्यंत संवेदनशील जिम्मेदारी दी गई है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए दीपक बर्मन को स्कूल शिक्षा, आवास, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम और वस्त्र मंत्रालय मिला है, जबकि जगन्नाथ चट्टोपाध्याय को उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग की कमान सौंपी गई है। इसके अतिरिक्त, डॉ. शंकर घोष को संसदीय कार्य एवं पर्यटन, डॉ. कल्याण चक्रवर्ती को सूचना प्रौद्योगिकी, विज्ञान एवं जैव प्रौद्योगिकी और बागवानी, तथा दूध कुमार मंडल को कृषि मंत्रालय का प्रभार मिला है।

स्वतंत्र प्रभार और राज्यमंत्रियों की फौज

प्रशासनिक कार्यों में मंत्रियों की सहायता और जमीनी स्तर पर नीतियों को लागू करने के लिए राज्यमंत्रियों (स्वतंत्र प्रभार) और राज्यमंत्रियों की एक बड़ी टीम को मैदान में उतारा गया है।

  • राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार): मालती रावा रॉय को महिला एवं बाल विकास, राजेश महाता को पशु संसाधन एवं मत्स्य पालन, और डॉ. इंद्रनील खान को युवा सेवाएं, खेल एवं उपभोक्ता मामले विभाग की स्वतंत्र जिम्मेदारी मिली है।

  • राज्यमंत्री: जोयेल मुर्मू, डॉ. हरे कृष्ण बेरा, आनंदमय बर्मन (परिवहन, वित्त), अशोक डिंडा, और बिशाल लामा (गृह, अल्पसंख्यक मामले) सहित कुल 20 राज्यमंत्रियों को वरिष्ठ मंत्रियों के साथ संबद्ध किया गया है ताकि पश्चिम बंगाल के हर क्षेत्र में विकास कार्यों को तेजी से पूरा किया जा सके।

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