West Bengal Assembly Election 2026: विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल प्रशासन में बड़ा बदलाव, कई अधिकारी हटाए गए

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तारीखों के ऐलान के साथ ही भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने राज्य प्रशासन में बड़ी सर्जरी की है। आयोग ने निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को उनके पदों से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है।

West Bengal Assembly Election 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 16, 2026

West Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के तुरंत बाद प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने राज्य के दो शीर्ष अधिकारियों को उनके पद से हटा दिया है। इनमें पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा शामिल हैं।

निर्वाचन आयोग ने चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के उद्देश्य से यह फैसला लिया है। आयोग के निर्देश के अनुसार, इन दोनों अधिकारियों की जगह नए अधिकारियों की नियुक्ति कर दी गई है। इसके अलावा चुनाव से जुड़े सात सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (AERO) को भी निलंबित किया गया है।

भारत में IAS-IPS-IFS के 2834 पद खाली, SC-ST-OBC के कितने अधिकारी हैं?

दुष्यंत नारियाला बने नए मुख्य सचिव

निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आदेश के मुताबिक 1993 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी दुष्यंत नारियाला को पश्चिम बंगाल का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं 1997 बैच की IAS अधिकारी संगमित्रा घोष को राज्य का नया गृह सचिव और पहाड़ी मामलों का प्रधान सचिव बनाया गया है।

आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यह नियुक्तियां तुरंत प्रभाव से लागू की जाएं। साथ ही राज्य प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि नए अधिकारियों के कार्यभार ग्रहण करने की रिपोर्ट 16 मार्च को दोपहर 3 बजे तक आयोग को भेजी जाए।

निर्वाचन आयोग ने यह भी साफ किया है कि जिन अधिकारियों का तबादला किया गया है, उन्हें चुनाव से संबंधित किसी भी पद पर तैनात नहीं किया जाएगा। यह प्रतिबंध तब तक लागू रहेगा जब तक राज्य में चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाती।

चुनावी माहौल के बीच आयोग की सख्ती

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर पहले से ही राजनीतिक माहौल काफी गर्म है। ऐसे में निर्वाचन आयोग चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए लगातार सख्त कदम उठा रहा है। अधिकारियों के तबादले और निलंबन को भी इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव से पहले प्रशासनिक फेरबदल अक्सर इसलिए किए जाते हैं ताकि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह के पक्षपात या दबाव की संभावना को कम किया जा सके।

भाजपा नेता दिलीप घोष का बयान

इस पूरे घटनाक्रम के बीच भाजपा नेता दिलीप घोष ने भी चुनावी प्रक्रिया को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चुनाव की तारीखों के ऐलान पर कहा कि चुनाव आयोग को भरोसा है कि चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होंगे।

दिलीप घोष ने कहा कि उन्हें भी उम्मीद है कि चुनाव शांतिपूर्ण होंगे, क्योंकि निर्वाचन आयोग पहले भी कई बार निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराने में सफल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव चाहे एक बार हो या कई बार, उनकी पार्टी हर स्थिति में चुनाव लड़ने और जीतने के लिए तैयार है।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि चुनाव प्रक्रिया बहुत लंबी चलती है तो इससे चुनाव खर्च बढ़ जाता है और अधिकारियों तथा कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। उनके अनुसार सुरक्षा व्यवस्था के कारण चुनाव कई चरणों में आयोजित किए जाते हैं, लेकिन यदि पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध हो तो चुनाव कम समय में भी संपन्न हो सकते हैं।

दिलीप घोष ने तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन अधिकारियों पर उन्हें भरोसा नहीं होता, उन्हें बदल दिया जाता है। वहीं भाजपा का लक्ष्य केवल अधिकारियों को बदलना नहीं बल्कि पूरी सरकार को बदलना है। इस बीच पश्चिम बंगाल में चुनावी तैयारियां तेजी से चल रही हैं और प्रशासनिक बदलाव के बाद अब सभी की नजर आगामी चुनावी प्रक्रिया और उसके परिणामों पर टिकी हुई है।

1 अप्रैल से लागू होगा नया नियम, FASTag Annual Pass की कीमतों में वृद्धि