UP News: उत्तर प्रदेश में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग एक नई पहल की तैयारी कर रहा है। राज्य में पहली बार तेंदुओं यानी गुलदारों का बधियाकरण करने की योजना बनाई गई है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसकी शुरुआत बिजनौर के वन क्षेत्र से प्रस्तावित है। इस योजना को लागू करने के लिए राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार से अनुमति लेने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
महाराष्ट्र के जुन्नार क्षेत्र में इस तरह की पहल के बाद उत्तर प्रदेश ऐसा कदम उठाने वाला देश का दूसरा राज्य बनने की दिशा में है। वन विभाग ने इस पूरी योजना के लिए करीब 601 करोड़ रुपये का विस्तृत मास्टर प्लान तैयार किया है।
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बिजनौर में सबसे ज्यादा तेंदुओं की मौजूदगी
वन विभाग के अनुसार बिजनौर, मुरादाबाद, बरेली, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच और श्रावस्ती समेत कई जिलों में तेंदुओं की मौजूदगी बढ़ी है। कई जगह तेंदुए जंगलों से निकलकर खेतों और आबादी के आसपास के इलाकों में पहुंच रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अकेले बिजनौर में करीब 444 तेंदुए मौजूद हैं। अनुमान है कि मौजूदा रफ्तार से अगले पांच वर्षों में इनकी संख्या बढ़कर करीब 1,336 तक पहुंच सकती है। विभाग का दावा है कि प्रस्तावित बधियाकरण कार्यक्रम के जरिए संख्या को लगभग 755 के स्तर तक सीमित रखने में मदद मिल सकती है।
पांच साल में 75 प्रतिशत तेंदुओं को अभियान में शामिल करने की योजना
वन विभाग ने चरणबद्ध तरीके से पांच वर्षों में करीब 75 प्रतिशत तेंदुओं के बधियाकरण का लक्ष्य प्रस्तावित किया है। इसके साथ ही तेंदुओं की निगरानी और मानव आबादी में उनकी आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए कई तकनीकी उपाय भी किए जाएंगे। योजना के तहत करीब 310 किलोमीटर लंबी चेन-लिंक फेंसिंग लगाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा नदियों और प्रमुख रास्तों के आसपास थर्मल और नाइट विजन कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों की निगरानी कमांड सेंटर के जरिए की जाएगी।
रूहेलखंड में 900 से ज्यादा तेंदुओं की मौजूदगी
वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार रूहेलखंड क्षेत्र में तेंदुओं की संख्या 900 से अधिक है। बरेली और मुरादाबाद मंडल के अलग-अलग जिलों में इनकी संख्या लगभग 50 से 150 के बीच बताई गई है। बिजनौर को सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार 2019 से 2026 के बीच जिले में तेंदुओं के हमलों में 40 से अधिक लोगों की मौत हुई और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए। गन्ने के खेतों में काम करने वाले किसान और बच्चे इन घटनाओं में प्रभावित हुए हैं।
2.73 करोड़ रुपये में बनेगी विशेष वन्यजीव चिकित्सा इकाई

प्रस्तावित मास्टर प्लान में तेंदुओं के इलाज और बधियाकरण के लिए करीब 2.73 करोड़ रुपये की लागत से विशेष वन्यजीव पशु चिकित्सा इकाई बनाने की योजना है। इसमें ऑपरेशन थिएटर, सर्जिकल उपकरण, एनेस्थीसिया मशीन और मल्टीपैरामीटर मॉनिटर सहित प्री और पोस्ट-ऑपरेटिव सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।
कैमरा ट्रैप से होगी पहचान
प्रस्तावित मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार सबसे पहले संवेदनशील और हॉटस्पॉट क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे। इससे तेंदुओं की गतिविधियों और उनकी पहचान पर नजर रखी जाएगी। इसके बाद चिन्हित तेंदुओं को विशेष पिंजरों की मदद से पकड़ा जाएगा।
सर्जरी से पहले और बाद में उनकी निगरानी के लिए सुरक्षित व्यवस्था रखी जाएगी। बधियाकरण और आवश्यक उपचार पूरा होने के बाद तेंदुओं को निर्धारित रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में छोड़े जाने की योजना है। पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों के आधार पर आगे पूरे उत्तर प्रदेश के लिए विस्तृत योजना तैयार की जा सकती है।
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