Bengal Madrasa Action : बिना मान्यता चल रहे मदरसों पर कार्रवाई, बंगाल सरकार के फैसले से मचा हड़कंप

पश्चिम बंगाल में मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। 252 मदरसों को बंद किया गया, जबकि 100 अन्य को कारण बताओ नोटिस जारी हुए। निरीक्षण में बुनियादी सुविधाओं और निर्धारित पाठ्यक्रम से जुड़ी कमियां सामने आईं। आखिर किन नियमों का उल्लंघन मिला और आगे कितने संस्थानों पर कार्रवाई होगी?

Bengal Madrasa Action

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 13, 2026

Bengal Madrasa Action : पश्चिम बंगाल सरकार ने बिना सरकारी अनुमति और निर्धारित मान्यता के संचालित किए जा रहे मदरसों के खिलाफ बड़ा प्रशासनिक अभियान शुरू किया है। कार्रवाई के पहले चरण में राज्य सरकार ने 252 मदरसों को बंद करने का नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही 100 अन्य संस्थानों को कारण बताओ नोटिस भी भेजा गया है। सरकार के अनुसार, कार्रवाई का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और नियमों के अनुरूप संस्थानों का संचालन सुनिश्चित करना है।

252 मदरसों पर बंदी की कार्रवाई

सरकारी जांच के दायरे में आए 252 मदरसों में बड़ी संख्या ऐसे संस्थानों की बताई जा रही है, जिन्हें कथित तौर पर ‘खारिजी मदरसा’ के तौर पर संचालित किया जा रहा था। इन संस्थानों के पास संचालन के लिए आवश्यक सरकारी अनुमति या मान्यता नहीं होने की बात सामने आई है। वहीं, 100 अन्य मदरसों को नोटिस जारी कर उनसे उनकी स्थिति और संचालन से जुड़े जरूरी दस्तावेजों के संबंध में जवाब मांगा गया है। आगे की कार्रवाई संबंधित जांच और जवाब के आधार पर तय की जाएगी।

मान्यता नहीं होने की जानकारी

पश्चिम बंगाल के अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग की ओर से 22 जुलाई को व्यापक सर्वेक्षण कराया गया था। कोलकाता समेत राज्य के अलग-अलग जिलों में किए गए इस सर्वे का उद्देश्य मदरसों की वास्तविक स्थिति और उनके संचालन से संबंधित जानकारी जुटाना था। सर्वे के दौरान करीब 2,396 ऐसे मदरसों की पहचान किए जाने की बात सामने आई है, जिनके पास आवश्यक सरकारी मंजूरी या मान्यता नहीं थी। इसके बाद विभाग ने चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई शुरू की।

सभी प्रकार के मदरसों का हुआ सर्वे

सरकार ने सर्वेक्षण को व्यापक बनाते हुए मदरसों की विभिन्न श्रेणियों को इसमें शामिल किया था। इसमें सरकारी सहायता प्राप्त, निजी, सामुदायिक स्तर पर संचालित, पंजीकृत और बिना पंजीकरण वाले संस्थान भी शामिल रहे। जिलाधिकारियों को इस संबंध में विशेष दिशा-निर्देश भेजे गए थे। अधिकारियों को मदरसों की इमारत, उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं, पढ़ाई जाने वाली पाठ्यचर्या और विद्यार्थियों की संख्या समेत कई महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने को कहा गया था।

पारदर्शिता पर दिया जोर

राज्य सरकार की इस कार्रवाई को मदरसा शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार का जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि शैक्षणिक संस्थान निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित हों और विद्यार्थियों को उचित शैक्षणिक सुविधाएं मिलें। प्रशासन की ओर से जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर अब संबंधित संस्थानों की स्थिति का मूल्यांकन किया जा रहा है।

मंत्री अग्निमित्रा ने उठाए सवाल

मामले पर मंत्री अग्निमित्रा ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए उन्होंने मदरसों को मिलने वाली सरकारी सहायता और उसके उपयोग को लेकर सवाल उठाए थे। उनका कहना है कि यह जानना जरूरी है कि सरकारी धन का वास्तविक लाभ कितने विद्यार्थियों तक पहुंच रहा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को आधुनिक शिक्षा और बेहतर अवसर मिलना चाहिए।

अल्पसंख्यक बच्चों के विकास पर जोर

मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को शिक्षा के आधुनिक अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे राज्य के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें। उनका जोर सरकारी संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर है। पश्चिम बंगाल सरकार की मौजूदा कार्रवाई के बाद अब बिना मान्यता वाले अन्य मदरसों पर भी प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई होने की संभावना है।

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