LPG Cylinder Shortage: मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में समुद्री यातायात की बाधाओं ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर बहस छेड़ दी है। विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) ने केंद्र सरकार पर वास्तविक स्थिति छिपाने का आरोप लगाया है, जबकि पेट्रोलियम मंत्रालय ने आपूर्ति सुचारू रखने के लिए नए निर्देश जारी किए हैं।
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राम गोपाल यादव का बड़ा दावा
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ सांसद राम गोपाल यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार ईंधन संकट को लेकर जनता को अंधेरे में रख रही है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है, लेकिन भारत सरकार दावों के उलट पर्याप्त स्टॉक होने की बात कर रही है। यादव ने तकनीकी पक्ष रखते हुए कहा कि भारत की जरूरत का लगभग 80% कच्चा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है, जो वर्तमान में गंभीर बाधाओं का सामना कर रहा है।
सपा सांसद की चेतावनी
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने भी आपूर्ति श्रृंखला में आई दरारों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कथित LPG सिलेंडरों की कमी को देखते हुए देश में रिकॉर्ड तोड़ महंगाई की चेतावनी दी। अवधेश प्रसाद के अनुसार, सरकार द्वारा गठित जांच पैनल इस संकट को रोकने में विफल रहेगा। उन्होंने तर्क दिया कि यह कमी केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था को अपनी चपेट में ले लेगी, जिससे आम आदमी की जेब पर भारी बोझ पड़ेगा और सरकार बेबस नजर आएगी।
पेट्रोलियम मंत्रालय का मास्टर प्लान
विपक्ष के हमलों के बीच, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) सुनिश्चित करने के लिए कमर कस ली है। मंत्रालय ने सभी तेल रिफाइनरियों को स्पष्ट आदेश जारी किए हैं कि वे लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) के उत्पादन में तत्काल वृद्धि करें। सरकार का मुख्य उद्देश्य इस अतिरिक्त उत्पादन को पूरी तरह से घरेलू उपभोक्ताओं की ओर मोड़ना है, ताकि आम घरों की रसोई पर कोई आंच न आए।
25 दिनों का ‘इंटर-बुकिंग’ नियम लागू
मौजूदा भू-राजनीतिक उथल-पुथल और सप्लाई चेन में आई बाधाओं को देखते हुए, मंत्रालय ने ग्राहकों के लिए एक नया नियम पेश किया है। अब दो रिफिल बुकिंग के बीच 25 दिन का अनिवार्य अंतराल (Inter-booking period) होगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से ईंधन की कालाबाजारी और अनावश्यक जमाखोरी पर प्रभावी ढंग से रोक लगेगी। मंत्रालय ने सोशल मीडिया के माध्यम से स्पष्ट किया कि उनकी पहली प्राथमिकता ‘घरेलू उपयोग’ है, ताकि संकट के समय भी नागरिकों को परेशानी न हो।
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