Weather Update: उत्तर प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में बने सुस्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र और मानसूनी द्रोणी के दक्षिण की ओर खिसकने के कारण प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज हो गई हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यही प्रणाली अगले कुछ दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश का कारण बनेगी। इसके चलते कई जिलों में भारी वर्षा की संभावना जताई गई है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
Aaj Ka Mausam: 22 जुलाई तक नहीं थमेगी बारिश! दिल्ली, यूपी और बिहार समेत कई राज्यों के लिए अलर्ट
लखनऊ समेत कई जिलों में जारी बारिश
राजधानी लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के कई जिलों में रविवार सुबह से लगातार बारिश का सिलसिला बना हुआ है। रुक-रुककर हो रही बारिश ने मौसम को सुहावना बना दिया है और लोगों को उमस व गर्मी से राहत मिली है। मौसम विभाग ने 21 जुलाई तक राज्य के 55 जिलों के लिए भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके बाद 24 जुलाई तक प्रदेश के दक्षिणी क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए येलो वार्निंग भी जारी की गई है।
मौसम प्रणाली के कारण बढ़ी बारिश की संभावना
विशेषज्ञों के मुताबिक मानसूनी द्रोणी अब तराई क्षेत्र से दक्षिण की ओर खिसककर अमृतसर, करनाल, हरदोई, रांची और दीघा होते हुए उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी तक पहुंच रही है। इस बदलाव के कारण वातावरण में नमी बढ़ी है और प्रदेश में व्यापक स्तर पर बारिश की स्थिति बन रही है। मौसम विभाग का मानना है कि अगले कुछ दिनों तक मानसून सक्रिय रहेगा, जिससे कई इलाकों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।
किसानों के लिए राहत लेकर आई बारिश
लगातार हो रही बारिश किसानों के लिए राहत की खबर लेकर आई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह वर्षा खरीफ फसलों के लिए काफी लाभदायक साबित होगी। धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी, सांवा, कोदो, उड़द और अरहर जैसी फसलों को इस बारिश से पर्याप्त नमी मिलेगी, जिससे उनकी बढ़वार बेहतर होगी। लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों के चेहरों पर अब खुशी दिखाई दे रही है।
सब्जी उत्पादकों को दी गई महत्वपूर्ण सलाह
बख्शी का तालाब स्थित चंद्रभानु गुप्त कृषि महाविद्यालय के कृषि कीट विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह ने किसानों को मौसम के अनुसार जरूरी सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि कद्दू, लौकी, करेला और तरोई जैसी बेल वाली सब्जियों के लिए मजबूत मचान तैयार किए जाएं, ताकि बारिश और तेज हवाओं से पौधों को नुकसान न पहुंचे। साथ ही खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखना भी बेहद जरूरी है।
शुरुआती 40 दिन फसल के लिए सबसे अहम
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की रोपाई के बाद शुरुआती 40 दिन फसल के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान यदि खेतों में खरपतवार या दीमक का प्रकोप बढ़ता है तो उत्पादन में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। इसलिए किसानों को समय-समय पर खेतों का निरीक्षण करते रहना चाहिए और आवश्यक कृषि प्रबंधन अपनाना चाहिए। इसके अलावा मिर्च, टमाटर और बैंगन की रोपाई जल्द पूरी करने तथा भिंडी, ग्वार और लोबिया की बुआई भी समय रहते करने की सलाह दी गई है।
जलभराव से बचाव पर दें विशेष ध्यान
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हल्की से मध्यम बारिश फसलों के लिए फायदेमंद है, क्योंकि इससे मिट्टी की गहराई तक नमी पहुंचती है। हालांकि, लगातार बारिश की स्थिति में खेतों में पानी जमा होने से फसलों को नुकसान भी हो सकता है। इसलिए किसानों को मेड़बंदी मजबूत रखने के साथ-साथ जल निकासी की नियमित निगरानी करनी चाहिए, ताकि सब्जियों और अन्य फसलों को जलभराव से बचाया जा सके।
घर की बाड़ी में उग रहीं जैविक सब्जियां, घट रहा घरेलू खर्च और बढ़ रही पोषण सुरक्षा
अगले कुछ दिन रहें सतर्क
मौसम विभाग ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे अगले कुछ दिनों तक मौसम से जुड़ी चेतावनियों पर ध्यान दें। जिन जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, वहां अनावश्यक यात्रा से बचें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। वहीं किसानों को भी मौसम के अनुसार खेती से जुड़े आवश्यक कदम उठाने की सलाह दी गई है, ताकि अच्छी बारिश का अधिकतम लाभ मिल सके।










